March 1, 2021

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चंद्रेश नारायणन की कलम से: हमारे यहां प्लानिंग की कमी, इंग्लैंड दौरे की तैयारी अभी से शुरू हो

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मुंबई22 मिनट पहले

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भारतीय क्रिकेट टीम का जुलाई 2011 के बाद से SENA देशों (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) में लगातार फेल होना प्लानिंग में कमी दिखाता है। वर्ल्ड कप 2011 जीतने के बाद से हमने सेना देशों की टेस्ट सीरीज के लिए रणनीति पर ध्यान ही नहीं दिया। 36 पर ऑलआउट होने के बावजूद नाराजगी क्यों नहीं है, क्योंकि हमने ऐसे सिस्टम को पनपने दिया है। हमें लोगों को जवाबदेह बनाने की जरूरत है। जब आईपीएल चल रहा होता है तो सभी उसमें व्यस्त होते हैं। कोई भारतीय क्रिकेट टीम के बारे में नहीं सोचता। ऐसा क्यों है? प्लानिंग क्यों रुक जाती है?

2011 के इंग्लैंड दौरे से शुरू करते हैं। हम वर्ल्ड कप जीतने के बाद इंग्लैंड पहुंचे। लेकिन टेस्ट सीरीज में 4-0 से हार मिली। इसके बाद भी निराशा नहीं हुई। क्यों? क्योंकि हमने वर्ल्ड कप जीता था। 2014 के दौरे पर सीरीज में 1-0 की लीड लेने के बाद हम 1-3 से हार गए। लेकिन कोई पछतावा नहीं था। केवल एक चीज हुई। रवि शास्त्री को टीम डायरेक्टर बना दिया गया। 2018 में आईपीएल की थकावट के बाद टीम एक बार फिर इंग्लैंड पहुंची। इस बार भारतीय टीम का प्रदर्शन पहले से बेहतर रहा, लेकिन फिर भी 1-4 से हार मिली। हमारी गेंदबाजी बेहतर हुई लेकिन निचले क्रम के बल्लेबाज को आउट नहीं कर पाए।

2000 के दशक में हमारी टीम घर में और बाहर दोनों जगह टेस्ट मैचों में इंग्लैंड पर भारी थी। अब आईपीएल 2021 के बाद टीम को फिर से इंग्लैंड दौरा करना है। क्या इंग्लैंड में प्रदर्शन सुधारने का प्लान है? यहां एक बार फिर पिछले तीन दौरे का दाेहराव देखने को मिल सकता है। हमारे थके हुए खिलाड़ी 5 टेस्ट मैच के लिए इंग्लैंड जाएंगे। इसमें कुछ चोटिल भी होंगे। क्या आईपीएल के बाद होने वाले इंग्लैंड दौरे के लिए कोई प्लानिंग कर रहा है?

अगर टीम को पिछले तीन दौरे से बेहतर करना है तो अभी से तैयारी शुरू करनी होगी। हम इंग्लैंड का ही उदाहरण ले सकते हैं। ईसीबी के मैनेजिंग डायरेक्टर एश्ले जाइल्स ने नवंबर 2021 में होने वाले एशेज सीरीज की प्लानिंग शुरू कर दी है। वे प्रमुख खिलाड़ियों का वर्क लोड भी मैनेज कर रहे। लेकिन भारत में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है। फैंस को भी नतीजों की मांग करनी चाहिए। इस तरह हम क्रिकेट के सबसे बड़े देश नहीं हो सकते, सामान्य देश ही रहेंगे।

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