40-40 हजार में रेमडेसिविर बेच रही थी नामी डॉक्टर की गैंग, 70 इंजेक्शन और 36 लाख रुपए के साथ धरे गए
डॉ. अल्तमश लोगों को कोरोना संक्रमण से बचने की सलाह देता था, फिर बड़ी कम्पनी का सीईओ और नामी न्यूरोलॉजिस्ट होने की वजह से वह आसानी से रेमडेसिविर और दूसरे महंगे इंजेक्शन तक अपनी पहुंच बना लेता था, इसके 2 साथी भी गिरफ्तार
गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
गाजियाबाद में मंगलवार को देश का नामी न्यूरोलॉजिस्ट रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी मामले में गिरफ्तार हुआ। उसके 2 सहयोगियों को भी स्वाट और घंटाघर कोतवाली पुलिस की टीमों ने पकड़ लिया। इन तीनों के पास से 70 रेमडेसिविर इंजेक्शन और 36 लाख रुपए से ज्यादा कैश मिला। करीब 48 हजार रुपए कीमत का एक अन्य इंजेक्शन भी इनके पास से मिला है।
जरूरतमंद लोग डॉक्टर्स, अधिकारियों और नेताओं तक से रेमडेसिवर की गुहार लगाते थे। मगर इनमें से कोई इंतजाम नहीं करवा पाते थे। लेकिन कई गुना दाम चुकाने पर अर्थात
ब्लेक में उन्हें इंजेक्शन मिल जाता था। इसी क्लू पर पुलिस ने पड़ताल शुरू की और गैंग तक पहुंच गई। बड़ी बात यह है कि आरोपी डॉक्टर दिल्ली एम्स में भी अपनी सेवा देता है। यही नहीं वह एक नामी फार्मा कम्पनी का सीईओ भी है।
काली कमाई से कार भी खरीदी
एसपी सिटी निपुण अग्रवाल ने बताया कि आरोपियों में डॉ. अल्तमश के अलावा उसके साथी कुमैल और जाजिब शामिल हैं। डॉ. अल्तमश देश का नामी न्यूरोलॉजिस्ट है और दिल्ली के निजामुद्दीन में रहता है। इंजेक्शन वही उपलब्ध कराता था। चंद दिनों की कालाबाजारी में ही उसने 36 लाख रुपए कमा लिए थे। इसके अलावा आरोपियों से जो कार बरामद हुई है, वह भी इन्हीं पैसों से खरीदी गई थी।
ऐसे चलता था डॉक्टर का कालाधंधा
डॉ. अल्तमश लोगों को कोरोना संक्रमण से बचने की सलाह भी दे रहा था। बड़ी कम्पनी का सीईओ और नामी न्यूरोलॉजिस्ट होने की वजह से वह आसानी से रैमडेसिविर और दूसरे महंगे इंजेक्शन तक अपनी पहुंच बना लेता था। फिर इसकी गैंग के लोग मरीजों तक पहुंचते थे। इंजेक्शन केवल उसी को दिया जाता था, जो इनके लिंक के जरिए आते थे। अनजान लोगों से ये किसी तरह की बात नहीं करते थे।
4 हजार का इंजेक्शन 40 हजार में बेचा
डॉ. अल्तमश का गैंग गम्भीर मरीजों तक अपनी पहुंच बनाता था। ये 4 हजार रुपए का रेमडेसिविर इंजेक्शन 30 से 40 हजार रुपए के बीच बेच रहे थे। ये कोविड 19 बीमारी में ही इस्तेमाल होने वाले अक्टेमरा इंजेक्शन की भी कालाबाजारी करते थे। सामान्यतौर पर लगभग 48 हजार रुपए में मिलने वाले इस इंजेक्शन को डेढ़ लाख रुपए में बेचते थे। गाजियाबाद में डिमांड मिलने के बाद इंजेक्शन जाजिब और कुमैल के पास पहुंचता था। ये ही उसे बेचते थे।
इस तरह गिरफ्त में आई गैंग
एसएसपी से लेकर थानेदारों तक को रोज बड़ी संख्या में उनके परिचित व अन्य लोग रेमडेसिवर इंजेक्शन के लिए कॉल करते आ रहे हैं। मगर ये अफसर भी तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें इंजेक्शन नहीं दिला पा रहे थे। मगर इनमें से कई लोग दुबारा कॉल कर बताते थे कि, उन्हें इंजेक्शन मिल गया है। इससे ये बड़े हैरान होते थे। इस पर एसएसपी ने स्वाट टीम से संजय पांडेय और घंटाघर कोतवाली से संदीप सिंह को शामिल कर आरोपियों तक पहुंचने का प्लान बनाया। इस प्रकार पुलिस टीम के लो पीड़ित बनकर गैंग तक पहुंचे और बड़ा खुलासा हुआ, वह यह कि इस कालेधंधे का सूत्रधार तो देश का नामी डॉक्टर निकला।
