April 17, 2026

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गहलोत के सलाहकार का फिर पायलट केम्प पर हमला: संयम लोढ़ा ने लिखा-सूरज को तो पग-पग तपना ही है, ‘खेला होबे’ तो पंचर ही रहेगा

गहलोत के सलाहकार का फिर पायलट केम्प पर हमला: संयम लोढ़ा ने लिखा-सूरज को तो पग-पग तपना ही है, ‘खेला होबे’ तो पंचर ही रहेगा

एनसीआई@जयपुर

मुख्यमंत्री के सलाहकार और निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने सरकार के तीन साल पूरे होकर चौथे साल में प्रवेश की बधाई देने के साथ ही इशारों में सचिन पायलट केम्प पर हमला बोला है। संयम लोढ़ा ने ट्वीट कर पायलट केम्प पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला बोला।

संयम लोढ़ा ने लिखा-सरकार की शुरुआत दुधारी तलवार की नोक पर। लगातार अस्थिरता सिर उठाती रही। सूरज को तो पग पग तपना ही है। “खेला होबे” तो पंचर ही रहेगा। राज्य के कोने-कोने में फैला विकास, उत्सव का भाव तो पैदा करता ही है। संयम लोढ़ा ने खेला होबे तो पंचर रहेगा लिखकर पायलट केम्प पर हमला बोला है। लोढ़ा मुख्यमंत्री गहलोत के सलाहकार बनने से पहले भी पायलट केम्प पर फितरे कसते रहते थे। सीएम के सलाहकार बनने के बाद भी लोढ़ा के पायलट केम्प पर इशारों में हमले जारी हैं। संयम लोढ़ा से ट्वीट के मायनों के बारे में जब पूछा तो उन्होंने कहा-पाठक समझदार है, ट्वीट के मायने निकालने के लिए पाठक स्वतंत्र है।

सीएम के सलाहकार के इस ट्वीट के बाद यह साफ हो गया है कि गहलोत-पायलट खेमों के बीच अंदरूनी खींचतान अब भी जारी है। संयम लोढ़ा के अलावा गहलोत समर्थक कई और नेता भी पायलट केम्प पर निशाना साधते रहते हैं।

सीएम के सलाहकार के ट्वीट के सियासी मायने

सीएम के सलाहकार के ट्वीट करके पायलट केम्प पर हमला बोलने के सियासी मायने हैं। मंत्रिमंडल फेरबदल के बाद पहले यह माना जा रहा था कि सीएम अशोक गहलोत और पायलट खेमों के बीच स्थायी युद्ध विराम हो गया है, लेकिन यह ज्यादा दिन चला नहीं। अंदरूनी तौर पर दोनों खेमों के नेता अब भी एक दूसरे पर हमला करने का मौका नहीं चूकते हैं।

दोनों खेमों के बीच खींचतान जारी रहने के संकेत

सीएम के सलाहकार के बयान से साफ हो गया है कि कांग्रेस आलाकमान के दखल के बाद दोनों खेमे सियासी दिखावे के तौर पर एकजुटता के दावे भले करें, लेकिन मतभेद और मनभेद बरकरार हैं। आगे राजनीतिक नियुक्तियों पर मतभेद और गहरा सकते हैं। पिछले दिनों रैली की तैयारी बैठक में मुख्यमंत्री भी दो बार यह कह चुके हैं कि निर्दलीय और बसपा से आने वाले विधायकों ने साथ नहीं दिया होता तो सरकार नहीं बचती, 19 विधायक तो जा चुके थे। मुख्यमंत्री का यह बयान उनके समर्थक विधायकों को एक रणनीतिक संकेत की तरह माना गया।


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