April 19, 2026

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फार्मा कम्पनी ने डोलो 650 लिखने के लिए डॉक्टरों को 1000 करोड़ रुपए के उपहार बांटे, सुप्रीम कोर्ट हैरान

फार्मा कम्पनी ने डोलो 650 लिखने के लिए डॉक्टरों को 1000 करोड़ रुपए के उपहार बांटे, सुप्रीम कोर्ट हैरान

एनसीआई@नई दिल्ली

फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि मरीज़ों को डोलो 650 लिखने के लिए इसकी निर्माता कम्पनी ने डॉक्टर्स को 1000 करोड़ रुपए के तोहफे दिए। सुप्रीम कोर्ट फार्मा कम्पनियों के कथित अनैतिक व्यवहारों पर अंकुश लगाने और एक प्रभावी निगरानी तंत्र के लिए समान कोड बनाने की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। इस दौरान ही फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने यह सनसनीखेज आरोप लगाया। इससे सुप्रीम कोर्ट भी हैरान रह गया।

याचिकाकर्ता एनजीओ फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख और अधिवक्ता अपर्णा भट्ट ने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ को बताया कि 500 मिलीग्राम तक की किसी भी टेबलेट का बाजार मूल्य सरकार की कीमत नियंत्रण प्रणाली के तहत नियंत्रित होता है, लेकिन 500 मिलीग्राम से ऊपर की दवा की कीमत सम्बन्धित फार्मा कम्पनी द्वारा तय की जा सकती है।

इन्होंने आरोप लगाया कि उच्च लाभ हासिल करने के लिए कम्पनी ने डॉक्टरों को मरीजों को डोलो-650 मिग्रा टेबलेट लिखने के लिए उन्हें मुफ्त उपहार बांटे हैं। वकील ने यह भी कहा कि केन्द्र द्वारा जवाब दाखिल किए जाने के बाद वे इस तरह के और तथ्य अदालत के संज्ञान में लाएंगे। कोर्ट ने इस आरोप को ‘गम्भीर मुद्दा’ करार दिया। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘आप जो कह रहे हैं वह सुनने में सुखद लगता है। यही दवा है जो मैंने कोविड होने पर ली थी। यह एक गंभीर मुद्दा है और हम इस पर गौर करेंगे।

जज ने कहा मैंने भी यह दवा खाई थी

एडवोकेट अपर्णा भट्ट के माध्यम से अदालत में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी। इसमें यूनिफार्म कोड ऑफ फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रेक्टिसेस (UCPMP) से वैधानिक समर्थन की मांग की गई थी। याचिका के दौरान दावा सुनकर जज भी हैरान रह गए कहा, ‘मैंने भी यही खाई थी।’

डोलो-650 एक ऐसी दवा है, जिसे हम और आप में से काफी लोगों ने खाई होगी। कोरोना महामारी के दौरान बुखार आने पर डॉक्टर ने यही दवा दी होगी। आप सोच रहे होंगे कि दवाई बहुत अच्छी है, लेकिन असल में डॉक्टरों को ये दवा लिखने के लिए कम्पनी की ओर से काफी पैसे दिए गए थे। जी हां, आपको भले अजीब लगे, लेकिन दवा कम्पनियां अक्सर दवाइयों के प्रमोशन के लिए ऐसे तरीके इस्तेमाल करती हैं।

यह है मामला

केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने डोलो-650 टेबलेट के निर्माताओं पर दवा लिखने के लिए डॉक्टरों को मुफ्त उपहार वितरित करने के लिए 1,000 करोड़ रुपए खर्च करने का आरोप लगाया है। फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FMRAI) बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में, FMRAI का प्रतिनिधित्व करने वाले एडवोकेट संजय पारिख ने कहा कि DOLO ने बार और बेंच (B & B) के अनुसार निर्धारित राशि को ‘फ्रीबीज’ में निवेश किया था।

कई ठिकानों पर छापेमारी

वहीं, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टेक्सेज (CBDT) ने भी छापेमारी के बाद दावा किया था कि दवा निर्माता कई तरह की अनैतिक गतिविधियां करते हैं। सीबीडीटी ने कहा था कि 300 करोड़ रुपए की टेक्स की चोरी भी की गई। एजेंसी ने कम्पनी के 36 ठिकानों पर छापेमारी की थी। फेडरेशन की तरफ से पेश हुए वकीलल संजय पारिक ने कहा, डोलो ने डॉक्टरों को 1 हजार करोड़ रुपए के मुफ्त उपहार दिए, ताकि उनकी दवा का प्रमोशन हो।

दायर की याचिका

एडवोकेट अपर्णा भट्ट के माध्यम से अदालत में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी, जिसमें यूनिफ़ॉर्म कोड ऑफ़ फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रेक्टिसेस (UCPMP) से वैधानिक समर्थन की मांग की गई थी। इसमें कहा गया है कि स्वास्थ्य का अधिकार जीवन के अधिकार का हिस्सा है और फार्मा कम्पनियों को नैतिक मार्केटिंग प्रेक्टिसेस का पालन करना चाहिए।

दस दिनों में मांगा जवाब

पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह एक गम्भीर मुद्दा है। उन्होंने बार एंड बेंच के हवाले से कहा, “यह मेरे कानों के लिए संगीत नहीं है। मुझे भी कोविड होने पर डोलो दवाई दी गई थी। यह एक गंभीर मामला है। ” केंद्र सरकार को दस दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इसका प्रतिनिधित्व एडिशनल सॉलिसिटर केएम नटराज कर रहे थे।

स्वास्थ्य के लिए खतरा

याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि भारत में फार्मा मार्केटिंग प्रथाओं में भ्रष्टाचार अनियंत्रित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के हस्ताक्षरकर्ता होने के बावजूद है। वर्तमान में भारत में कोई भी कानून ऐसी किसी भी प्रथा को प्रतिबंधित नहीं करता है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह की दवाएं मरीज के जीवन और स्वास्थ्य के लिए खतरा हैं। यह भी कहा कि इस स्थिति में, ग्राहक ब्रांडेड दवाओं के लिए भुगतान करता है,जो डॉक्टरों द्वारा “over-prescribed” या “irrationally prescribed”हैं।

इसने तर्क दिया कि यूसीपीएमपी (UCPMP) को वैधानिक आधार देने से प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही मिलेगी, हालांकि, सरकार ने यूसीपीएमपी का मसौदा जारी किया और सुनवाई के तुरंत बाद जनता से टिप्पणियां मांगी।

यह था पूरा मामला

उल्लेखनीय है कि जुलाई माह में आयकर विभाग ने बेंगलुरू स्थित माइक्रो लैब्स नाम की फार्मा सेक्टर की एक कम्पनी के ठिकानों पर आयकर के छापे मारे थे। इस कम्पनी पर गलत तरीके से अपने उत्पादों के प्रमोशन का आरोप लगा था। विभाग को कई ऐसे सबूत मिले थे, जिनसे पता चला कि कम्पनी अपने उत्पादों को प्रमोट करने के लिए मेडिकल सेक्टर से जुड़े लोगों को मुफ्त में तोहफे बांट रही थी और ये खर्च अलग-अलग मदों में दिखाया जा रहा था।

आयकर विभाग ने बेंगलुरू स्थित फार्मा कम्पनी के ठिकानों पर 6 जुलाई को तलाशी अभियान चलाया था। फार्मा कम्पनी पर आरोप था कि वो मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों को तोहफे बांट रही थी। कम्पनी इन लोगों के यात्रा का खर्च उठा रही थी, वहीं मुफ्त में कई सामान भी गिफ्ट कर रही थी। ये खर्च प्रमोशन, सेमीनार और मेडिकल एडवायजरी के नाम से उठाए जा रहे थे।

जांच में पता चला कि कम्पनी ने करीब 1000 करोड़ रुपए के मुफ्त तोहफे बांटे थे। इसके साथ ही टेक्स चोरी के कई अन्य तरीकों का भी पता चला। प्रमोशन के अलावा अन्य तरीकों से करीब 300 करोड़ रुपए की टेक्स चोरी की बात सामने आई। छापे में विभाग ने 1.2 करोड़ रुपए की नकदी और 1.4 करोड़ की ज्वैलरी जब्त की।

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