दो महीने पहले घर आया था, अब शहीद होकर लौटा, 40 किमी लम्बी तिरंगा यात्रा के साथ शव घर लाया गया
एनसीआई@श्रीगंगानगर
जिले के सूरतगढ़ के लालगढ़िया गांव के रहने वाले बीएसएफ जवान 34 वर्षीय राजेश भांभू 23 मार्च, गुरुवार को शहीद हो गए। वह पश्चिम बंगाल में बीएसएफ की 75 वीं बटालियन में तैनात थे। शहादत की खबर मिलने पर परिवार में कोहराम मच गया। अभी तो 6 महीने पहले शहीद की मां की हुई मौत का गम परिवार भूला नहीं था।

अब बेटे की मौत से परिवार बेहाल है। पिता रोते-रोते बोले- दो महीने पहले आया था, तब जल्दी आने का वादा करके गया था। ऐसे आएगा, पता नहीं था। पत्नी तो बेसुध हो गई। उसे यकीन नहीं हुआ कि सुहाग उजड़ गया।राजेश भांभू ने 2013 में बीएसएफ जॉइन की थी। वे तब से पश्चिम बंगाल में ही तैनात थे।

राजेश भांभू के पार्थिव शरीर शुक्रवार रात सड़क मार्ग से सूरतगढ़ के सिटी थाना लाया गया। शनिवार सुबह सूरतगढ़ से लेकर उनके गांव तक 40 किलोमीटर की तिरंगा यात्रा निकालकर पार्थिव देह उनके घर लाई गई । इस दौरान जमकर नारेबाजी कर रहे थे। राजेश भांभू की पत्नी और पिता ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वाहन को फूलों से सजाकर शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद राजेश भांभू को उनके भाई संतोष भांभू ने मुखाग्नि दी।
इस दौरान शिल्प एवं माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष और राज्य मंत्री डूंगरराम गेदर तथा केश कला बोर्ड अध्यक्ष महेन्द्र गहलोत भी शामिल रहे। इनके अलावा सामाजिक और व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों समेत युवाओं ने शहीद को श्रद्धांजलि दी।
6 महीने पहले शहीद की मां का निधन
शहीद राजेश भांभू के चाचा मोहन भांभू ने बताया कि हादसे से कुछ देर पहले ही भतीजे ने परिवार से फोन पर बात की थी। इसके कुछ देर बाद ही परिवार ने उन्हें फोन किया तो उन्होंने रिसीव नहीं किया। बीएसएफ हेड क्वार्टर पर सम्पर्क किया तो उनके निधन की जानकारी मिली। चाचा ने बताया कि इसे लेकर दो दिन से परिवार सहित पूरे गांव में सन्नाटा है। राजेश की मां पार्वती का भी करीब 6 महीने पहले निधन हो गया था। परिवार अभी इस दर्द को भुला भी नहीं पाया था कि बेटा भी देश के लिए शहीद हो गया।

2 महीने पहले छुट्टी पर आए थे
शहीद के पिता किसान मनीराम भांभू के तीन बेटे हैं। राजेश भांभू ने बीए के बाद देश सेवा के लिए बीएसएफ में जाने का फैसला लिया था। बीएसएफ में नौकरी लगने के बाद 2013 में पश्चिम बंगाल के गोपालपुर में पोस्टिंग हुई थी। ट राजेश 2 महीने पहले ही छुट्टी पर घर आए थे। उन्होंने पिता को जल्द ही आसपास अपना ट्रांसफर करवाने की बात कही थी। राजेश की 2014 में धापी देवी से शादी हुई थी। उनके कोई संतान नहीं है। उनके दोनों भाई भी सीआरपीएफ और आईटीबीपी में हैं।
राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि
राजेश की शहादत की खबर मिलने पर परिजन पार्थिव देह लेने के लिए सूरतगढ़ से रवाना हुए थे। राजियासर थाना प्रभारी सत्यनारायण गोदारा ने बताया कि उन्हें कोई अथॉरिटी लेटर नहीं मिला है, फिर भी पुलिस की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि की जा रही है। सीआई ने बताया कि केवल बीएसएफ के अधिकारी गार्ड ऑफ ऑनर दे रहे हैं।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने ट्वीट कर दी श्रद्धांजलि
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी ने ट्वीट कर शहीद को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा है कि- राजस्थान के सूरतगढ़ स्थित लालगडिया गांव निवासी, बीएसएफ के जवान राजेश भाम्भू जी की शहादत का समाचार अत्यन्त दुःखद है। परमपिता परमेश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति!
