सनातन की डेंगू, मलेरिया, कोरोना से तुलना पर घिरे I.N.D.I.A. के दल, जानें क्या है पूरा मामला और क्या प्रतिक्रियाएं आई हैं सामने
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया-कोरोना जैसी बीमारी बता दिया। उदयनिधि के इस बयान पर साधु-संतों ने नाराजगी जताई और सियासी हमला भी तेज हो गया। हिन्दू सेना ने दिल्ली में उदयनिधि के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई है। उदयनिधि का यह बयान तमिलनाडु से लेकर दिल्ली तक छा गया, बीजेपी ने उदयनिधि के बहाने पूरे विपक्ष को घेरना शुरू कर दिया। यह मामला इसलिए और अधिक गम्भीर है कि उदयनिधि ने यह बात लिखित बयान पढ़ कर कही है, साफ है कि योजनाबद्ध तरीके से जानबूझकर ऐसा किया गया।
एनसीआई@चेन्नई
विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ने हाल ही में मुम्बई में बैठक कर यह संदेश दिया कि वे एक हैं। इसके बाद राहुल गांधी और लालू यादव का एक वीडियो सामने आया, जिसमें दो अलग-अलग दलों के नेताओं का तालमेल दिखा। लालू और राहुल डिनर बना रहे थे। इन तमाम वीडियो और बैठकों से यह संदेश देने की कोशिश हुई कि दलों के साथ दिल भी मिल रहे हैं। लेकिन यह पूरी कवायद वहां आकर बिखर गई जब डीएमके के नेता के एक बयान से इन सभी दलों ने पल्ला झाड़ लिया। इस बयान को लेकर भाजपा ने गठबंधन I.N.D.I.A. पर निशाना साधा तो गठबंधन के दलों की राय अलग-अलग सामने आई। उल्लेखनीय है कि स्टालिन की पार्टी डीएमके विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. की प्रमुख घटक है। सांसदों की संख्या के लिहाज से कांग्रेस के बाद दूसरी बड़ी पार्टी है। उदयनिधि ने यह बात लिखित बयान पढ़ कर कही है, साफ है कि योजनाबद्ध तरीके से जानबूझकर ऐसा किया गया।
दरअसल लोकसभा चुनाव में अब 172 दिन बाकी हैं। ऐसे में हर पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इन तैयारियों के बीच लगातार नए-नए बयानों से सियासी सरगर्मी बढ़ रही है। ऐसा ही एक बयान दिया है तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने। इन्होंने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया-कोरोना जैसी बीमारी बता दिया। उदयनिधि के इस बयान पर स्वाभाविक रूप से हिन्दू समाज में भारी आक्रोश फैल गया है। साधु-संतों ने भी नाराजगी जताई है। इसके अलावा सियासी हमला भी तेज हो गया। हिन्दू सेना ने दिल्ली में उदयनिधि के खिलाफ शिकायत भी दर्ज करा दी है।
यह था बयान
इस देश में करीब अस्सी फीसदी लोग जिस सनातन संस्कृति को मानते हैं, जिस संस्कृति को वो पूजते हैं, जिस संस्कृति से उनका सरोकार है, उसी सनातन संस्कृति के खिलाफ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और तमिनलाडु सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने जहर उगला। उदयनिधि ने कहा कि सनातन धर्म डेंगू मलेरिया और कोरोना की तरह है। जिसका महज विरोध नहीं किया जा सकता, बल्कि इसे खत्म किया जाना चाहिए, जिसे खत्म कर देना चाहिए। इसी बीच उन्होंने अपने हिसाब से सनातन का अर्थ भी बताया। उन्होंने कहा कि सनातन नाम संस्कृत से है, यह सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है। उदयनिधि स्टालिन ने सनातन उन्मूलन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए यह टिप्पणी की।
भाजपा ने उदयनिधि के साथ ‘I.N.D.I.A.’ को भी घेरा
उदयनिधि का ये बयान तमिलनाडु से लेकर दिल्ली तक छा गया, बीजेपी ने उदयनिधि के बहाने पूरे विपक्ष को घेरने शुरू कर दिया। गृहमंत्री अमित शाह ने भी जोरदार पलटवार किया। अमित शाह ने कहा कि उन्होंने सनातन धर्म का अपमान किया है। इसके अलावा बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी उदयनिधि के बहाने पूरे विपक्ष को घेर लिया। इस क्रम में भाजपा नेताओं ने पूरे I.N.D.I.A. गठबंधन को भी आड़े हाथों लेने की कोशिश की, लेकिन गठबंधन के अन्य दलों ने उदयनिधि के बयान से पल्ला झाड़ लिया।
कांग्रेस ने ऐसे किया किनारा
छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने इस पर बयान दिया कि यह उदयनिधि का निजी मत हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। यह उनकी निजी राय हो सकती है। दुनिया में बहुत सारे धर्म हैं और किसी भी धर्म पर ऐसी कोई भी टिप्पणी व्यक्तिगत है। हर किसी को स्वतंत्रता है। सनातन धर्म एक स्थापित जीवन शैली और एक धार्मिक अभिव्यक्ति है। इसका पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए। मैं कांग्रेस की ओर से नहीं कह सकता, मैं प्रवक्ता नहीं हूं। मैं व्यक्तिगत रूप से कह सकता हूं कि भारत का सनातन धर्म सदियों पुराना है और अच्छी तरह से स्थापित है। सनातन धर्म की गहराई और वेदों और पुराणों की शिक्षाएं अतुलनीय हैं।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने उदयनिधि के बयान पर कहा, ‘यह देश सभी धर्मों का सम्मान करने के लिए जाना जाता है। हमारा संविधान धर्मनिरपेक्ष है, क्योंकि विभिन्न धर्मों के लोग हमारे देश में रहते हैं, ताकि देश का विकास हो सके। राशिद अल्वी ने कहा कि सभी एकजुट रहें, लेकिन पिछले 9 सालों में बीजेपी ने धर्म का राजनीतिकरण किया है और यही कारण है कि कोई भी आकर धर्म के बारे में कुछ भी कह देता है। जिसने यह कहा है वह गलत है, लेकिन धर्म का राजनीतिकरण करने के लिए बीजेपी के नेता जिम्मेदार हैं।
इसके अलावा महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले का कहना था कि कांग्रेस का रुख स्पष्ट है। हम किसी भी धर्म पर टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं चाहते हैं।
इधर, तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन की ‘सनातन धर्म को खत्म कर देना चाहिए’ वाली टिप्पणी पर कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कहते हैं, ‘नेताओं के बीच हिन्दुओं को गाली देने की होड़ लगी है। 1000 साल से ‘सनातन धर्म’ को मिटाने की कोशिशें हो रही हैं, कोई नहीं मिटा सका।
आप ने भी बयान को बताया निजी
वहीं, विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A.में शामिल आम आदमी पार्टी से भी इस बाबत सवाल किया गया कि स्टालिन के बेटे के बयान से वो कितना सरोकार रखते हैं तो जवाब मिला, सबको सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। आप सांसद संजय सिंह ने कहा, ‘भारत में अलग-अलग धर्म, जातियां और भाषाएं हैं। यह हमारी खूबसूरती है कि इसके बावजूद हम एक साथ रहते हैं। उदयनिधि के बयान पर मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि भारत में हमें हर धर्म का सम्मान करना चाहिए और किसी को भी दूसरे के धर्म पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।’
आरजेडी नेता ने दिया ये बयान
वहीं राज्यसभा सांसद और राजद नेता मनोज झा ने कहा, मैं समझता हूं कि कभी-कभी हम लोगों को प्रतीक मुहावरों के अंदर जाकर सोचना होगा।
जेडीयू नेता ने यह बात कही
वहीं, उदयनिधि के बयान पर जेडीयू नेता नीरज कुमार ने कहा, मुझे नहीं पता कि तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने क्या कहा, लेकिन सभी धर्मों के लोगों का सम्मान करना और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है और भारत गठबंधन इसकी अभिव्यक्ति है।
