राजस्थान: रामलला की आरती के लिए 600 किलो घी अयोध्या रवाना, 11 रथों में 108 कलश घी के भेजे गए
एनसीआई@जोधपुर
देव दीपावली के दिन सोमवार को शुभ मुहूर्त में जोधपुर के बनाड़ स्थित श्रीश्री महर्षि संदीपनी राम धर्म गौशाला से 11 रथों में 600 किलो घी अयोध्या के लिए रवाना किया गया। रथों को रवाना करने से पहले घी से भरे 108 कलशों की आरती उतारी गई। इस दौरान गौशाला में भक्तों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। रथों के साथ गौशाला के महर्षि संदीपनी महाराज भी अयोध्या के लिए रवाना हुए हैं।
श्रीश्री महर्षि संदीपनी राम धर्म गौशाला के संचालक महर्षि संदीपनी महाराज ने बताया कि 22 जनवरी 2024 में रामलला राम मंदिर में विराजेंगे। इस दौरान होने वाली रामलला की आरती और हवन में हमारी गौशाला में तैयार घी का इस्तेमाल किया जाएगा। यह सौभाग्य की बात है कि जोधपुर से रामकाज के लिए घी भेजा गया है।

आज गौशाला से 11 विशेष रथ रवाना किए गए हैं। इन रथों को गौशाला में ही 6 महीने से तैयार किया जा रहा था। हर रथ पर 3.5 लाख रुपए लागत आई है। इन रथों में 108 स्टील के कलश रखे हैं, जिनमें कुल 600 किलो घी है। यह घी खास तौर से रामलला की पहली आरती और हवन के लिए ही हम 9 साल से इकट्ठा कर रहे थे।
बनाड़ गौशाला से अपराह्न 3 बजे विधिवत पूजा-अर्चना के बाद सजे-धजे रथ शोभायात्रा के रूप में रवाना हुए। हर रथ के साथ 3 सेवादार हैं। सभी 11 रथों को पावटा रोड होते हुए रात 9 बजे कायलाना स्थित भारत माता मंदिर पहुंच कर यहीं यात्री विश्राम करना है।

भारत माता मंदिर में मंगलवार सुबह 9 बजे आरती के बाद जोधपुर की सड़कों पर रथों की शोभायात्रा निकलेगी। यह यात्रा कायलाना से आखलिया चौराहा-रावण का चबूतरा-मेडिकल चौराहा-भगत की कोठी-झालामंड सर्किल होते हुए न्यू हाईकोर्ट तक जाएगी। वहां से 5 ट्रकों में सभी रथों को लोड कर पाली के लिए रवाना किया जाएगा। कई शहरों में इसी तरह शोभायात्रा निकालते हुए ये रथ करीब एक महीने में अयोध्या पहुंचेंगे।
पहले थी 108 भव्य रथ तैयार करने की योजना
महर्षि संदीपनी महाराज ने बताया- पहले हर कलश को एक अलग रथ में रवाना करने की योजना थी, अर्थात कुल 108 रथ बनाए जाने थे। लेकिन समय कम होने से ऐसा नहीं किया जा सका। इसके अलावा बीच में चुनाव भी आ गए। इसलिए 11 रथों के अलावा 97 प्रतीक रथ तैयार किए गए हैं। इन्हें मुख्य रथों में रखा गया है। बैलों से खींचे जाने वाले रथ 11 हैं, बाकी छोटे प्रतीक रथ हैं।

मुख्य रथों में घी के कलशों के अलावा शिवलिंग, भगवान गणेश व हनुमान की प्रतिमाएं, राम नाम लिखी पताका और हनुमान पताकाएं भी रखी गई हैं। हर एक रथ को दो बैल खींचेंगे। एक रथ में 9 से 10 कलश रखे गए हैं। रथ गौशाला में ही तैयार किए गए हैं।
रथयात्रा का अयोध्या तक यह रहेगा रूट
महर्षि संदीपनी महाराज ने बताया- शोभायात्रा जोधपुर से अजमेर-ब्यावर-जयपुर-भरतपुर होते हुए उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी। उत्तर प्रदेश में मथुरा और लखनऊ होते हुए यात्रा अयोध्या पहुंचेगी।
हर शहर में श्रीश्री महर्षि संदीपनी राम धर्म गौशाला से जुड़े भक्त और सेवक यात्रा को लेकर प्रशासन से अनुमति लेंगे और शोभायात्रा निकालने का प्रबंध करेंगे। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में यह यात्रा पांच दिन तक रहेगी।

20 साल पुराना संकल्प, 9 साल पहले गौशाला स्थापित
महर्षि संदीपनी महाराज ने बताया- 20 साल पहले 2003 में संकल्प लिया था कि अयोध्या में जब भी राम मंदिर बनेगा, उसके लिए वे देसी गाय का शुद्ध घी लेकर जाएंगे। साल 2014 की बात है, जोधपुर से गौकशी के लिए गायें ट्रकों में भरकर ले जाई जा रहीं थीं। हमने ट्रकों को रुकवाया, उनमें कुल 60 गायें निकलीं। इन गायों को मुक्त कराया और आसपास की गौशालाओं में ले गए। गौशाला वालों ने इन गायों को रखने से इनकार कर दिया। तब हमने बनाड़ (जोधपुर) में श्रीश्री महर्षि संदीपनी राम धर्म गौशाला की स्थापना की और इन गायों को पालने का संकल्प लिया।
गायों को पालने से पहले संकल्प था कि रामलला के लिए घी हम लेकर जाएंगे। इसलिए इन गायों से प्राप्त घी को इकट्ठा करते गए। यही चाहते थे कि इन गायों से जितना भी घी प्राप्त होगा, सारा घी बैलों से अयोध्या लेकर जाएंगे और भगवान राम के चरणों में समर्पित कर देंगे। राम मंदिर बनने की उम्मीद बलवती होती गई और आखिरकार मंदिर बनकर तैयार हो गया।
लोगों ने मजाक उड़ाया, संकल्प दृढ़ था
महर्षि संदीपनी महाराज ने बताया- जब इन 60 गायों का घी जुटाना शुरू किया तो लोगों ने कई सवाल किए और मजाक भी उड़ाया। यात्रा कैसे पूरी होगी? इतना घी कहां से लाओगे? मैंने घी एकत्रित करना जारी रखा। इसके बाद 2016 में लोग हमारा सहयोग करने लगे।
शुरुआत में वे मटकी में घी जुटाते थे। ऐसे में गर्मी में घी पिघलकर बाहर आ जाता था। मटकियों में दरारें भी आने लगीं। एक-दो बार घी खराब भी हो गया। तब किसी संत से पता चला कि 5 अलग-अलग जड़ी-बूटियों के रस से घी को कई साल तक स्टोरेज किया जा सकता है। मैं हरिद्वार गया और वहां से ब्राह्मी व पान की पत्तियों सहित अन्य जड़ी-बूटियां लाया। इनका रस तैयार कर घी में मिलाया। इसके बाद इस घी को स्टील की टंकियों में डालकर एसी के जरिए 16 डिग्री सेल्सियस तापमान में स्टोर किया गया।
गायों की डाइट और रूटीन तक बदला
महर्षि संदीपनी महाराज ने बताया- मिलावट वाला घी जल्दी खराब हो जाता है। हमने प्राचीन परंबपरा के अनुसार देसी घी तैयार किया है। इसलिए यह घी 9 साल से खराब नहीं हुआ है। घी की शुद्धता बनाए रखने के लिए गायों की डाइट में भी बदलाव किया। 9 साल से गायों को हरा चारा, सूखा चारा और पानी दे रहे हैं। इन तीन चीजों के अलावा बाकी सारी चीजों पर पाबंदी लगाई। गौशाला में आने वाले लोगों को भी हिदायत दी कि गायों को बाहर से लाया कुछ न खिलाया जाए।
पूरे घी को हर तीन साल में एक बार पांच जड़ी-बूटियां मिलाकर उबाला गया। इसके लिए घी के बर्तनों को अच्छी तरह साफ किया। यही कारण है कि इतने साल में भी ये घी खराब नहीं हुआ। जिस कमरे में ये घी स्टोर किया गया, उसमें साफ-सफाई, वेंटिलेशन का ध्यान रखा गया।
9 साल में 60 से 350 हुई गायें
महर्षि संदीपनी महाराज ने बताया- 9 साल में गायों की संख्या 60 से बढ़कर 350 पहुंच गईं। ये वे गायें हैं जो सड़क हादसे का शिकार थीं या बीमार थीं। गौकशी के लिए जा रही गायों को बचाकर आज इनका घी भगवान राम की पहली आरती के लिए भेजा गया है।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने दी सहमति
महर्षि संदीपनी ने बताया- घी तैयार हो गया था, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती थी कि इस घी को अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर तक कैसे पहुंचाएं। विहिप प्रांत सहमंत्री महेन्द्र सिंह राजपुरोहित ने बताया कि जोधपुर से एक टीम अयोध्या गई। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों से मिलकर उन्हें महाराज के संकल्प के बारे में बताया। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यालय में भी टीम गई और घी स्टोरेज के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद अयोध्या से एक टीम जोधपुर आई। यहां गौशाला में घी स्टोरेज की पूरी प्रक्रिया समझी। इसके बाद टीम ने सहमति दी। सहमति मिलने के बाद घी को रथों के जरिए अयोध्या ले जाने की रूपरेखा बनाई गई, अब इसकी क्रियान्वित कर दी गई है।
