April 17, 2026

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लालू की ‘रडार’ से बाहर राजद के 12 विधायक, फ्लोर टेस्ट से पहले राजद में ही ‘खेला’ होने की आशंका

लालू की ‘रडार’ से बाहर राजद के 12 विधायक, फ्लोर टेस्ट से पहले राजद में ही ‘खेला’ होने की आशंका

एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क

अपनी ही पार्टी राजद के एक दर्जन विधायकों से उनका सम्पर्क नहीं हो पा रहा है। साथ ही जो विधायक सम्पर्क में हैं, उनके बारे में भी संशय बना हुआ है। इसमें बड़ी बात यह है कि लालू की पहुंच से दूर रहने वाले विधायक मुस्लिम-यादव समीकरण से अलग हैं। राजद पहले से ही मानकर चल रहा है कि उसके दो विधायक आनंद मोहन के पुत्र चेतन आनंद और मोकामा की नीलम देवी का खेमा बदल चुका है।

विधानसभा में शक्ति परीक्षण से दो दिन पहले ऐसी स्थिति पैदा हो जाने से राजद में सन्नाटा है। लापता 12 विद्यायकों की खोज-खबर लेने की कोशिश की जा रही है। उन्हें फोन मिलाया जा रहा है। जिनका अता-पता नहीं चल रहा है, उनके नजदीकियों के पास ‘विशेष दूत’ भेजकर जानने का प्रयास किया जा रहा है कि वे कहां हैं और सतत सम्पर्क में रहने से कन्नी क्यों काट रहे हैं।

बिहार में हो सकता है बड़ा खेला

सूत्रों का दावा है कि राजद के एक पूर्व मंत्री के आवास पर तीन-चार दिन पहले गुप्त बैठक हुई थी। इसमें राजद में रहकर क्या खोया और क्या पाया के आधार पर आत्म-विश्लेषण किया गया था। इस बैठक का निष्कर्ष अन्य विकल्पों पर विचार करने का भी था। सूत्र का यह भी दावा है कि राजद के विपरीत दिशा में चलने का रास्ता यहीं से निकला। स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के लिए शक्ति परीक्षण के दिन तेजस्वी यादव जिस ‘खेला’ होने की बात कर रहे हैं, बहुत सम्भव है कि वह स्वयं ही इसका शिकार हो जाएं और जरूरत के वक्त उनके कुछ विधायक सदन में अनुपस्थित रहें।

कांग्रेस विधायकों के भी टूटने का डर

राजद-कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा के साथ बनी बिहार की नई सरकार की विधानसभा में 12 फरवरी को परीक्षा है। इसी दिन विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होगी, जिससे साफ हो जाएगा कि किसके पक्ष में कितने विधायक हैं। अबतक कांग्रेस विधायकों के सबसे ज्यादा टूटने का डर था। यही कारण है कि 19 में से उसके 16 विधायकों को करीब हफ्ते भर से बिहार से बाहर हैदराबाद के रिसोर्ट में रखा गया है, जहां कांग्रेस की सरकार है। भाजपा-जदयू की तरफ से भी एहतियात बरता जा रहा है। विधायकों पर नजर रखी जा रही है।

अनहोनी पर भरपाई की व्यवस्था

दरअसल कुछ दिन पहले राजद नेता तेजस्वी यादव के दिए गए उस बयान का मतलब निकाला जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। तेजस्वी का संकेत सदन में नीतीश कुमार की नई सरकार को बहुमत साबित करने के लिए आवश्यक संख्या से था। बिहार में बहुमत साबित करने के लिए कम से कम 122 विधायक चाहिएं। सत्ता पक्ष के पास अभी 128 विधायक हैं।

अनुपस्थित रहकर सत्ता पक्ष को मदद

चार विधायकों वाली पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) को विश्वसनीय नहीं माना जा रहा है। पार्टी प्रमुख जीतनराम मांझी ने पहले ही यह बताकर सत्तापक्ष को सशंकित कर दिया है कि लालू प्रसाद की तरफ से उन्हें सीएम पद का ऑफर दिया गया था। यदि उन्होंने निष्ठा बदल ली और सत्ता पक्ष में कोई ‘अनहोनी’ हो गई तो भरपाई के लिए राजद के असंतुष्ट विधायकों का सहारा चाहिए। ऐसे में राजद के कुछ विधायक अनुपस्थित रहकर सत्ता पक्ष को मदद पहुंचा सकते हैं।

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