पाकिस्तानी लेपर्ड ने भारत की सीमा में घुस कर किया बकरी का शिकार, ट्रेंक्युलाइज कर पिंजरे में डाला
एनसीआई@जैसलमेर
जैसलमेर में पाकिस्तान से लगती सीमा पर वन विभाग की टीम ने पाकिस्तान की ओर से घुसे एक लेपर्ड (तेंदुए) का शुक्रवार को रेस्क्यू किया। पकड़ा गया नर लेपर्ड करीब चार साल का है। जोधपुर से आई वन विभाग की टीम ने नाले में छिपे इस लेपर्ड को ट्रेंक्युलाइज कर पिंजरे में डाला। इसके बाद इसे जोधपुर ले जाने की कार्रवाई शुरू हुई। वहां इसे अरावली की पहाड़ियों में छोड़ा जाना है।

क्षेत्रीय वन्य जीव अधिकारी लखपत सिंह भाटी ने बताया कि गुरुवार को सूचना मिली थी कि भारत-पाक सरहद के पास 12 किमी अंदर जालुवाला और टावरीवाला इलाके की कमलेश विश्नोई की ढाणी में किसी जंगली जानवर ने बकरी का शिकार किया है। इस पर हमारी टीम ने मौके पर जाकर पंजे के निशान देखे। पंजों के ये निशान लेपर्ड के होने पर हमने जोधपुर वन्य जीव विभाग से रेस्क्यू टीम को बुलाया। शुक्रवार सुबह से हमने पंजों के निशान के आधार पर लेपर्ड की तलाश शुरू की। काफी देर तलाशने के बाद इंदिरा गांधी नहर के बनाए पुराने नालों के अंदर लेपर्ड के पंजों के निशान जाते नजर आए। करीब 300 मीटर लम्बे नाले पर पत्थर की पट्टियां आदि हटाते हटाते एक जगह बकरी के अवशेष नजर आए। वहीं पास में लेपर्ड भी दिख गया।
चार माह पहले भी आया था यही लेपर्ड
जोधपुर से आई ट्रेंक्युलाइज टीम के बंशीलाल ने लेपर्ड को ट्रेंक्युलाइज किया। ट्रेंक्युलाइज करने के काफी देर बाद उसे नाले से बाहर निकालकर पिंजरे में बंद किया गया। लखपत सिंह ने बताया कि ये वही लेपर्ड है जो 4 महीने पहले सरहद पार कर टावरीवाला व जालुवाला इलाके में आया था। बकरियों का शिकार कर यह वापस लौट गया था। गुरुवार को फिर बकरी का शिकार करने पर इसके पंजे के निशान देख हमारी टीम ने इसे पकड़ने में कामयाबी हासिल की।

सुबह 6 बजे से रेस्क्यू ऑपरेशन किया शुरू
क्षेत्रीय वन अधिकारी लखपत सिंह भाटी ने बताया कि गुरुवार शाम को जब बकरी के शिकार कि जानकारी मिली तब हमने मौका-मुआयना किया। पंजों के निशान देखकर पेंथर कि पुष्टि हुई। इसके बाद डीएफओ आशुतोष ओझा को जानकारी देकर जोधपुर वन्य जीव विभाग को सूचना दी गई। शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे जोधपुर से बंशीलाल के नेतृत्व में ट्रेंक्युलाइज टीम मौके पर पहुंची। उसी समय से हमने रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत लेपर्ड की तलाश शुरू की। भारत पाक सीमा से करीब 12 किमी पास हमने लेपर्ड के पंजों के निशान के लिहाज से तलाश जारी रखी। शुक्रवार अपराह्न करीब 3 बजे हमें नहर के सूखे नाले के पास लेपर्ड के पंजों के निशान मिले। सूखे नाले पर रेत व पत्थर की पट्टिया थीं। सभी ने ग्रामीणों के सहयोग से उनको हटाने का काम किया। इससे पहले करीब 300 मीटर सूखे नाले के दोनों तरफ पत्थर आदि लगाकर नाले को बंद किया गया, ताकि लेपर्ड बाहर ना आ सके और ना ही किसी पर हमला कर सके। अब इसे जोधपुर भेजा जाएगा।
