पानी के टेंक में गिरी बच्ची को डॉक्टरों ने दो घंटे तक बचाने की भरकस कोशिश की, एक बार धड़कन लौटी, मगर फिर जिंदगी हार गई
एनसीआई@पाली
औद्योगिक थाना क्षेत्र के महाराणा प्रताप सर्किल इलाके में एक डेढ़ साल की बच्ची घर के आंगन में खेलते-खेलते पानी के टेंक में गिर गई। इसे अस्पताल में दो घंटे तक डॉक्टरों ने बचाने का भरकस प्रयास किया, इससे एक बार बच्ची की धड़कन लौटी, मगर अंततः जिंदगी हार गई। ऐसे में डॉक्टरों के चेहरों पर भी दर्द उभर आया और आंखें नम हो गईं।
जानकारी के अनुसार- महाराणा प्रताप सर्किल इलाके में रहने वाले पारसमल की डेढ़ साल की बेटी गुंजन गुरुवार दोपहर घर में खेल रही थी। बच्ची की मां घर के कामकाज में व्यस्त थीं। इस बीच गुंजन खेलते-खेलते घर में बने वाटर टेंक में गिर गई। कुछ देर बाद जब मां को बेटी का ध्यान आया तो वह उसे ढूंढने लगी। इस बीच टेंक में देखा तो बच्ची उसके अंदर पड़ी दिखी। यह देख मां चीख पड़ी। मां की चीख सुनकर पहुंचे पड़ोसियों ने बच्ची को टेंक से निकाला। इसी बीच महिला ने पति पारसमल को फोन कर दिया था। इस पर पारसमल तुंरत घर पहुंचे और अपराह्न करीब साढ़े तीन बजे पड़ोसी की स्कूटी पर बच्ची को बांगड़ अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ ने बच्ची की ईसीजी की, सीपीआर दिया। हार्ट को पम्प करने का प्रयास किया, लेकिन बच्ची में कोई हरकत नहीं हुई।
सीपीआर दिया, इंजेक्शन लगाए, लेकिन बचा नहीं पाए
ट्रॉमा वार्ड में चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. एसएन स्वर्णकार ने दोबारा ईसीजी करवाई। बच्ची की जान बचाने की कुछ सम्भावना दिखी तो उसे हॉस्पिटल के पीएनसीयू (PNCU) वार्ड में ले गए। वहां डॉ. स्वर्णकार और उनकी टीम के डॉ. राजवी और डॉ. कैलाश बच्ची गुंजन की जान बचाने में जुटे। उसकी हार्ट बीट वापस लाने के लिए इंजेक्शन लगाए, इलेक्ट्रॉनिक शॉट दिए व सीपीआर दिया। लेकिन, दो घंटे की कोशिश के बाद भी बच्ची बच नहीं पाई। शाम साढ़े पांच बजे बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया। डॉ. स्वर्णकार और डॉ. राजवी बच्ची की मौत पर दुखी नजर आए। डॉक्टर बोले- दो घंटे प्रयास किए, बचा नहीं पाए।
डॉ. एसएन स्वर्णकार ने बताया- बच्ची को उसके पिता गुरुवार अपराह्न साढ़े तीन बजे बजे ट्रॉमा सेंटर लेकर आए थे। तब बच्ची में बिल्कुल धड़कन नहीं थी। स्टाफ ने तुरंत सीपीआर देना शुरू कर दिया था। फिर मुझे कॉल आया कि एक बच्ची आई है जो पानी में डूब गई थी। मैं तुरंत वहां पहुंचा। थोड़ी देर सीपीआर देने के बाद ईसीजी की। हलचल दिखी तो तुरंत पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती किया। बच्ची में धड़कन नहीं के बराबर थी। ऐसे में उसे एड्रेलिन के इंजेक्शन लगाए। कार्डियो परमोंडिरेसिस्ट करते रहे। बच्ची में कुछ देर बाद रिस्पॉन्स आया। उसकी हार्ट रेट ठीक हुई। इसके बाद ब्लड प्रेशर बढ़ाने की दवाएं दीं। कुछ देर बाद फिर गड़बड़ हुई तो उसे डीसी शॉक दिया। दो घंटे स्टाफ ने काफी मेहनत की, लेकिन आखिरकार हम उसे बचा नहीं पाए। डॉ. स्वर्णकार ने कहा- घर में अगर पानी का टेंक है तो परिवार के लोगों को सावधानी रखनी चाहिए। सब घर वाले टेंक को बंद कर ताला लगाकर रखें।
तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी थी गुंजन
पारसमल ने बताया-मैं आरसीसी की छत डालने का काम करता हूं। घटना के वक्त मैं काम पर गया हुआ था। मेरे तीन बच्चों में गुंजन सबसे छोटी थी। बड़ा बेटा विजेन्द्र 12 और छोटा बेटा केशव 9 साल का है।
