April 23, 2026

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प्रदर्शन की आड़ में साजिशन हिंसा की अनुमति नहीं, दिल्ली दंगा मामले में हाईकोर्ट सख्त, शरजील इमाम व उमर खालिद सहित सभी 9 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

प्रदर्शन की आड़ में साजिशन हिंसा की अनुमति नहीं, दिल्ली दंगा मामले में हाईकोर्ट सख्त, शरजील इमाम व  उमर खालिद सहित सभी 9 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों की साजिश मामले में शरजील इमाम व उमर खालिद सहित 9 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर‌ दी, अदालत ने इस मामले में पुलिस के तर्कों को मजबूत माना।

एनसीआई@नई दिल्ली

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के आरोपी शरजील इमाम, उमर खालिद, खालिद सैफी, तस्लीम अहमद सहित 9 आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शैलेन्द्र कौर की बेंच ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने 10 जुलाई को इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने इन जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया था, दावा किया कि यह कोई स्वतः स्फूर्त दंगा नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश थी।

यह फैसला यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम) के तहत दर्ज मामले में लम्बे समय से लम्बित मुद्दे पर आया है। इसमें आरोपी दंगों के मास्टर माइंड बताए गए हैं। वर्ष 2020 के फरवरी में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे ।साथ ही 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। ये दंगे नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान भड़के थे। दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने वॉट्सएप ग्रुप्स, स्पीचेस और मीटिंग्स के जरिए इस दंगे की साजिश रची, ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम किया जा सके।

एसजी तुषार मेहता ने दी थी ये दलील

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जुलाई माह में हुई सुनवाई में कहा था कि राष्ट्र के खिलाफ काम करने वालों को सजा या बरी होने तक जेल में रहना चाहिए। यह दंगे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े यूएपीए मामले हैं, जहां लम्बी हिरासत जमानत का आधार नहीं बन सकती। पुलिस ने शरजील इमाम के भाषणों का हवाला दिया, जिसमें उसने असम को ‘काटने’ और हिंसा भड़काने की बात कही थी। उमर खालिद पर 23 जगहों पर प्रदर्शन आयोजित करने का आरोप है।

इस मामले में अन्य आरोपियों अथर खान, मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और शादाब अहमद ने भी जमानत की याचिकाएं लगाईं थीं। उनके वकीलों ने लम्बी हिरासत (5 साल से ज्यादा), ट्रायल में देरी (चार्जशीट फ्रेमिंग तक नहीं पहुंचा) और अन्य सह-आरोपियों (जैसे देवांगना कालिता, नताशा नरवाल) को जमानत मिलने का हवाला दिया। उमर खालिद के वकील त्रिदीप पैस ने कहा कि वॉट्सएप ग्रुप में सदस्य होना या मैसेज भेजना अपराध नहीं है।

पुलिस के तर्कों को मजबूत माना 

खालिद सैफी की वकील रेबेका जॉन ने यूएपीए के दुरुपयोग पर सवाल उठाया, लेकिन अदालत ने पुलिस के तर्कों को मजबूत माना, कहा कि स्पीचेस और मीटिंग्स से डर का माहौल बना, जो सीएए-एनआरसी, बाबरी, ट्रिपल तलाक और कश्मीर जैसे मुद्दों पर आधारित था। यह मामला 2019 के सीएए विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ा है, जहां 18 आरोपियों पर यूएपीए के तहत चार्ज हैं। शरजील इमाम की गिरफ्तारी 25 अगस्त 2020 को हुई थी, जबकि उमर खालिद सितम्बर 2020 में पकड़ा गया था। हाईकोर्ट में इनकी जमानत याचिकाएं 2022 से लम्बित थीं। आरोपी पक्ष ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान किया।

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