July 12, 2026

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हैरतअंगेज: पाकिस्तान के लाहौर में इस्लामी पहचान वाले 9 जगहों के नाम बदल कर मूल नाम किए, जैसे इस्लामपुरा अब कृष्णनगर व बाबरी चौक फिर से जैन मंदिर चौक हुआ

हैरतअंगेज: पाकिस्तान के लाहौर में इस्लामी पहचान वाले 9 जगहों के नाम बदल कर मूल नाम किए, जैसे इस्लामपुरा अब कृष्णनगर व बाबरी चौक फिर से जैन मंदिर चौक हुआ

सुन्नत नगर बन गया संत नगर और मुस्तफाबाद का नाम बदलकर फिर से पुराना नाम धर्मपुरा कर दिया गया

एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क

पाकिस्तान के पंजाब सूबे में कहावत है ‘जिन्ने लाहौर नहीं वेख्या, ओ जमिया ही नहीं’ (जिसने लाहौर नहीं देखा, उसका जन्म ही नहीं हुआ)। अमृतसर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लाहौर दशकों तक इस्लामीकरण के शिकंजे में रहने के बाद जड़ों की ओर लौटता दिख रहा है। कमसे कम इस तरह की कशमकश तो नजर आ ही रही है। दरअसल, लाहौर के जिन स्थानों के नाम इस्लामी पहचान वाले कर दिए गए थे, इनमें से 9 जगहों के नाम दो महीने के भीतर वापस मूल हिन्दू या ब्रिटिश विरासत की पहचान को दर्शाने वाले रख दिए गए हैं।

इनमें इस्लामपुरा अब अपने पुराने नाम कृष्णनगर और बाबरी मस्जिद चौक अब पुराने जैन मंदिर चौक के नाम से आधिकारिक रूप से जाना जाएगा। इनके बोर्ड भी लगा दिए गए हैं। खास बात यह भी है कि इन बदलावों का वहां किसी कट्‌टरपंथी गुट ने जरा भी विरोध नहीं किया है। इसके उलट आम लाहौरवासी इन बदलावों का खैरमकदम (स्वागत) ही कर रहे हैं।

पंजाब सूबे की सीएम मरियम नवाज के अनुसार परकोटा शहर लाहौर के आठों दरवाजे जिनमें दिल्ली गेट भी शामिल है, उसका भी जीर्णोद्धार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार नाम प​परिवर्तन के दूसरे चरण में पाकिस्तान के सिंध और खैबर पख्तूनख्वाह प्रांतों में भी बदल‌ कर रखे गए इस्लामी नामों की जगह उनके मूल नामों का ऐलान किया जा सकता है।

लक्ष्मी चौक: हमारी विरासत का हिस्सा

इस मामले को लेकर सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लाहौर की बीकनहाउस यूनिवर्सिटी के लेक्चरर साद मलिक कहते हैं- यह वाकई सुखद बदलाव है। मैं इसे हमेशा लक्ष्मी चौक ही कहता रहा, क्योंकि मेरे पिता इसे इसी नाम से बुलाते थे। साद कहते हैं म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने अपने कागजों में भले ही इसका नाम मौलाना जफर अली चौक कर दिया हो, लेकिन मेरे और मेरे जैसे कई लोगों के लिए लक्ष्मी चौक उस विरासत का हिस्सा है, जिसे जफर अली खान के नाम से कोई लेना-देना नहीं है। लक्ष्मी चौक पीढ़ियों से जुड़ा हुआ नाम है।

जैन मंदिर: नाम से ईमान पर आंच नहीं

इसी प्रकार लाहौर में बाबरी चौक का नाम बदलकर फिर से पुराना नाम जैन मंदिर चौक कर दिया गया है। इस मामले में जैन मंदिर के पास के अनारकली इलाके के मौलाना वाजिद कादरी का मानना है कि इस्लाम को किसी मंदिर या गुरुद्वारे से समस्या नहीं है। 1990 के दशक में जैन मंदिर चौक का नाम बदलकर बाबरी मस्जिद चौक कर दिया गया। ये सियासी फैसला था। हमने कभी इसे बाबरी मस्जिद चौक नहीं बोला। हमें यह समझना होगा कि जिन पूर्वजों ने ये हिन्दू नाम रखे थे, वे भी मुसलमान ही थे, और इससे उनके ईमान पर आंच नहीं आई थी।

वो सब कुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है

जब हम पिछले सालों पर नजर डालते हैं तो पता चलता है कि नवाज शरीफ, बेनजीर भुट्टो व परवेज के दौर में कई नाम बदले गए थे। यह वह दौर था, जब भारत में कथित बाबरी मस्जिद ढांचे का विध्वंस हुआ था। इन नामों को अब नवाज शरीफ कीनबेटी मरियम नवाज ही अब दुरुस्त कर रही है। वापस मूल नाम दे रही है। यहां खास बात यह भी है कि नवाज के बाद प्रधानमंत्री बने इमरान खान के समय ऐसे नामों को बदलने पर रोक लग गई थी।

वहीं, अब बदली सोच के चलते पाक के पूर्व पीएम नवाज शरीफ और उनकी बेटी पंजाब की सीएम मरियम नवाज ने 19 मार्च को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी। इसमें लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल (एलएचएआर) प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई। साथ ही लाहौर के नए नामों को फिर से पुराने हिन्दू या ब्रिटिश विरासत के दौर के नामों पर रखने का फैसला लिया गया था।

नवाज और मरियम का यह कहना था

पहले नामों को बदलने वाले नवाज शरीफ का कहना था कि हमें यूरोप से सीख लेनी चाहिए। वे ऐतिहासिक नामों से छेड़छाड़ नहीं करते हैं। लाहौर के पुराने नाम हमारा इतिहास हैं, इसे हमें सहेजना है, बदलना नहीं है। मरियम का कहना था कि लाहौर का इतिहास ही इसकी पहचान है। पुराने नाम और इमारतें इसका सबूत हैं।

हैरतअंगेज रहा कट्‌टरपंथियों का रवैया

कट्‌टरपंथ के नाम पर सड़कों पर उत्पात मचाने के लिए कुख्यात तहरीक-लब्बैक-पाकिस्तान (टीएलपी) को मरियम सरकार ने बैन कर रखा है, इसलिए इसकी ओर से कोई विरोध नहीं हुआ। इसके अलावा लश्कर-ए-तैयबा ने भी मूल नाम रखने का कोई विरोध नहीं किया।

इमरान खान के समय नहीं बदले गए नाम

लाहौर में नाम बदलने की कवायद 1990 के दशक में बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिराने के बाद हुई। उस दौर में केन्द्र में नवाज शरीफ, फिर बेनजीर और परवेज मुशर्रफ की सरकारें रहीं। वहीं, 2018 से 2022 तक पीएम रहे इमरान खान के समय में नाम बदलने का दौर नहीं चला।

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