पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल 5 रुपए सस्ता हुआ, अब यहां पेट्रोल 409.78 रुपए और हाई-स्पीड डीजल 409.58 रुपए लीटर मिल रहा, भारत में कल 3-3 रुपए बढ़ी थी कीमत
एनसीआई@नई दिल्ली/इस्लामाबाद
पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 रुपए लीटर (पाकिस्तानी रुपया) की कटौती की है। इसके बाद अब पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 409.78 रुपए प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत 409.58 रुपए प्रति लीटर पर आ गई है। नई कीमतें आज यानी 16 मई, शनिवार से लागू हो गई हैं।
हाल के दिनों में लगातार बढ़ती कीमतों के बाद इस कमी से मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के बजट को थोड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पेट्रोल का सीधा असर मोटरसाइकिल, रिक्शा और छोटी गाड़ियों पर पड़ता है।
हर हफ्ते शुक्रवार रात को तय हो रहे दाम
पाकिस्तान सरकार पिछले कुछ समय से हर हफ्ते शुक्रवार रात को पेट्रोलियम कीमतों की समीक्षा कर रही है। दरअसल, 28 फरवरी से अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध (जो फिलहाल थमा हुआ है) के बाद से ही पाकिस्तान में ईंधन संकट है।
पिछले हफ्ते ही 15 रुपए तक बढ़ाए थे दाम
पाक सरकार ने भले ही 5 रुपए की राहत दी है, लेकिन ठीक एक हफ्ते पहले पेट्रोल की कीमतों में 14.92 और डीजल में 15 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद, सरकार ने 6 मार्च को पेट्रोल-डीजल 55 रुपए लीटर महंगा कर दिया था। 2 अप्रेल को पेट्रोल में 43% और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 55% की बढ़ोतरी की थी।
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 15 मई 2026 को एक विरोध रैली हुई। इसमें सरकार से ईंधन (पेट्रोल-डीजल) के दाम कम करने की मांग की थी।
भारत में पेट्रोल-डीजल 3-3 रुपए महंगे हुए
भारत में 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतें 3-3 रुपए प्रति लीटर बढ़ी थीं। इससे दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया। वहीं, कम्पनियों ने प्रमुख शहरों में CNG भी 2 रुपए प्रति किलो तक महंगी कर दी। दिल्ली में अब एक किलो CNG के लिए 79.09 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?
इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।
क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से तेल कम्पनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लम्बे समय तक तेजी बनी रही है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।
