एनसीआई@जयपुर
प्रसिद्ध गढ़ गणेश मंदिर के लिए बनने वाले रोप-वे का भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम चुनाव आचार संहिता के चलते विवादों में आ गया। शिलान्यास करने पहुंच चुके मंत्री महेश जोशी को चुनाव अधिकारियों ने आचार संहिता का हवाला देते हुए रोक दिया। साथ ही मंत्री का नाम लिखी शिलान्यास पट्टिका को भी अधिकारियों ने हटवा दिया। इसके बाद पांच मंदिरों के पांच पुजारियों ने मिलकर रोप-वे का भूमि पूजन करते हुए शिलान्यास किया।

गेट पर खड़े रहे मंत्री ने यह दी प्रतिक्रिया
इस दौरान मंत्री महेश जोशी गेट के बाहर ही खड़े रहे। यहां जोशी ने विपक्ष के बारे में कहा- एक पार्टी के लोग ऐसे हैं, जो खुद तो कुछ नहीं करते हैं, कोई दूसरा करने लगता है तो उसे रोकने की कोशिश करते हैं।
यह था मामला
मामले के अनुसार आज गुरुवार सुबह 11 बजे नहर के गणेश मंदिर के पास रोप-वे के शिलान्यास का कार्यक्रम प्रस्तावित था। समचार पत्रों में इसके विज्ञापन प्रकाशित हुए थे। इस जानकारी के चलते निर्धारित समय से पहले ही हवा महल विधानसभा क्षेत्र के लोग गढ़ गणेश मंदिर के नीचे एकत्रित हो गए थे। इनमें काफी कांग्रेस कार्यकर्ता भी शामिल थे। जैसे ही चुनाव आयोग को इस बात की भनक लगी तो आयोग के अधिकारी ब्रह्मपुरी पुलिस थाने के जाब्ते के साथ कार्यक्रम रुकवाने मौके पर पहुंचे। इन्होंने आचार संहिता का हवाला देते हुए महेश जोशी को शिलान्यास करने से रोक दिया।
विज्ञापन भी आचार संहिता का उल्लंघन
चुनाव आयोग अधिकारी कीर्ति सिंह निर्वाण ने इस मामले में कहा-अखबार में जिस तरीके से विज्ञापन आया, वह आचार संहिता का उल्लंघन है। आचार संहिता लगने के बाद कोई भी पॉलिटिकल शिलान्यास कार्यक्रम नहीं हो सकता है। यह एक पॉलिटिकल कार्यक्रम था तो उसको रोकने की कोशिश की गई। हमने पूरी तरह से इस पॉलिटिकल प्रोग्राम को रोका है। यदि कोई आयोजन निजी है तो उसमें कोई दिक्कत नहीं है।
हम राजनीतिक लाभ नहीं लेना चाहते
वहीं, शिलान्यास कार्यक्रम पर मंत्री महेश जोशी ने कहा- जयपुर के सभी गणेश भक्तों को मैं बधाई देना चाहता हूं। सालों से जो लोग किसी कारणवश इतनी ऊंचाई तक नहीं जा सकते, उन लोगों को भी दर्शन की सुविधा मिल सकेगी। गढ़ गणेश मंदिर जयपुर के लोगों के लिए आस्था का बहुत बड़ा स्थान है। बहुत सारे लोग ऐसे हैं, जो आज भी नियमित रूप से गणेश जी के दर्शन को जाते हैं। रोप-वे के लिए एक कम्पनी आगे आई है। उस कम्पनी को हमने सहयोग किया। कम्पनी और बाकी लोगों की यह इच्छा थी कि मैं इसका शिलान्यास करूं, लेकिन शिकायतों के चलते चुनाव आयोग के अधिकारियों ने रोक दिया। जोशी ने आगे कहा- अभी मैं कोई बात करूंगा तो राजनीतिक बात हो जाएगी, जो मंदिर में ठीक नहीं है। लेकिन, एक पार्टी के लोग ऐसे हैं जो खुद कुछ काम करते नहीं हैं और कोई दूसरा करने लगता है तो उसको रोकने लग जाते हैं। मैं पहला जनप्रतिनिधि हूं, जिसने गोविंद देव जी मंदिर में सेवा करने की कोशिश की है। बाकी किसी भी पार्टी के जनप्रतिनिधि ने ढेले भर की भी सेवा नहीं की है। उनका काम राजनीतिक लाभ उठाने के लिए नारेबाजी, धरना-प्रदर्शन करना रह गया है। हमारी धार्मिक भावनाएं अलग तरीके की हैं। भाजपा की धार्मिक भावनाएं अलग तरीके की हैं। हम राजनीतिक लाभ नहीं लेना चाहते। हम कानून पसंद आदमी हैं। कानून का पालन करना चाहते हैं और सच्चे मन से पूजा-पाठ करना चाहते हैं। मुझे जैसे ही पता लगा कि इलेक्शन कमीशन यह नहीं चाहता कि कोई जनप्रतिनिधि रोप-वे का शिलान्यास करे तो कोई बात नहीं। यहां से जुड़े साधु-संतों ने शिला पूजन कर लिया। काम शुरू हो गया, मुझे इस बात की खुशी है।

यह सरकारी नहीं, निजी कार्यक्रम था
मंत्री महेश जोशी ने यह भी कहा- यह कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि निजी कार्यक्रम था। जिस कम्पनी ने रोप-वे बनाने का काम शुरू किया है, उसने वन विभाग की जमीन 30 साल के लिए लीज पर ली है। लीज की राशि भी जमा करा दी है तो फिर यह कैसे सरकारी जमीन है। मुझे इस बात का कोई मलाल नहीं है कि मैं इसका शिलान्यास नहीं कर पाया। मुझे इस बात की खुशी है कि यह शिलान्यास हो गया है और काम शुरू हो गया है। मुझे अगर इलेक्शन कमीशन नोटिस देता है तो मैं जरूर वहां अपनी बात रखूंगा।
5 संतों ने किया भूमि पूजन और शिलान्यास
शिलान्यास पूजन के बाद गढ़ गणेश मंदिर के महंत प्रदीप औदिच्य ने कहा- आज गढ़ गणेश मंदिर के रोप-वे के शिलान्यास का मुहूर्त था, जिसे चुनाव आयोग ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद कार्यक्रम को निरस्त करके सिर्फ पांच संत-महंतों ने भूमि पूजन करके रोप-वे का शिलान्यास किया।
9 करोड़ की लागत से 2 साल में बनेगा
गढ़ गणेश मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए शिवम प्राइम इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, जयपुर की ओर से रोप-वे बनाया जा रहा है। यह नहर के गणेश मंदिर से शुरू होकर गढ़ गणेश मंदिर तक जाएगा। अभी गढ़ गणेश मंदिर तक जाने के लिए 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। इस रोप-वे को बनने में 2 साल का समय लगेगा और 9 करोड़ रुपए की लागत आएगी।
