April 24, 2026

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32 वीं बार भी चुनावी मैदान में उतरा नरेगा मजदूर, बड़े मकसद के लिए है यह जिद, पंचायत से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके, 3 पूर्व मंत्रियों को दे चुके चुनौती

32 वीं बार भी चुनावी मैदान में उतरा नरेगा मजदूर, बड़े मकसद के लिए है यह जिद, पंचायत से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके, 3 पूर्व मंत्रियों को दे चुके चुनौती

एनसीआई@श्रीगंगानगर

नरेगा मजदूर तीतर सिंह इस बार भी चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। यह उनका 32 वीं चुनाव है। वह पंचायत व विधान सभा से लेकर लोकसभा तक का चुनाव लड़ चुके हैं। पूर्व मंत्री गुरमीत सिंह कुन्नर व सुरेन्द्र पाल सिंह टीटी के अलावा केन्द्रीय मंत्री रहे निहालचंद मेघवाल तक के सामने उन्होंने खम ठोकी।

तीतर सिंह के अनुसार वह 10 बार विधानसभा और 10 बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। वह अब 32वां चुनाव श्रीकरणपुर विधानसभा सीट के लिए लड़ रहे हैं। 31 बार मिल चुकी हार के बावजूद चुनाव लड़ने का उनका हौंसला आज भी बरकरार है। तीतर सिंह की जेब में मात्र 2500 रुपए हैं। 78 वर्ष की उम्र में भी वह रोज दो गांवों में पैदल ही प्रचार करने जाते हैं और वोट मांगते हैं।

तीतर सिंह गांव 25 एफ गुलाबेवाला के रहने वाले हैं। उनके साथ प्रचार ‌करने में कोई एकआध व्यक्ति ही हो तो ठीक, वरना वह अकेले ही चलते रहते हैं। उनका दो कमरों का मकान आधा कच्चा और आधा पक्का है। यहां तीतर सिंह की पत्नी और बहू खुले में बने चूल्हे पर खाना बनाती मिलीं। अंदर जाकर तीतर सिंह से बातचीत की। वह कुछ देर पहले ही दो गांवों में घूम कर लौटे थे।

चार पीढ़ियां खत्म हो गईं, लेकिन जमीन नहीं मिली, इसके विरोध में ही चुनाव लड़ना शुरू किया

सरदार तीतर सिंह ने बताया- मैं नरेगा मजदूर हूं। परिवार की चार-चार पीढ़ियां खत्म हो गई हैं, लेकिन आज तक जमीन का हक नहीं मिला। जब हम छोटे थे, तब सरकार ने भूमिहीन काश्तकारों को नहरी क्षेत्र में जमीन आवंटित की थी, लेकिन तब उन्हें और उनके जैसे कई गरीब परिवारों को ये हक नहीं मिल पाया था। जबकि इस आवंटन के वो वास्तविक हकदारों में से थे। यहीं से अपने अधिकारों की लड़ाई शुरू की। अधिकारी-नेता कोई बात नहीं सुन रहा था, इसलिए चुनाव लड़ने का फैसला किया।

सरदार तीतर सिंह का बेटा और पत्नी।
सरदार तीतर सिंह का बेटा और पत्नी।

वर्ष 1984 में श्रीकरणपुर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार निर्दलीय नामांकन भरा और चुनाव लड़ा। पहले चुनाव में 2 हजार के करीब वोट मिले। अपनी और अपने जैसे गरीब काश्तकारों की मांग मनवाने के लिए कोई उन्होंने चुनाव नहीं छोड़ा। सरपंच, वार्ड पंच, पंचायत समिति सदस्य, विधायक और सांसद के चुनाव लड़ते गए। कहते हैं-इस बार 32 वां चुनाव लड़ रहा हूं।

चुनाव लड़ने के लिए जनता देती है चंदा

तीतर सिंह ने कहा- मुझे तो चुनाव लड़ने के लिए जनता ही रुपए देती है। चंदा मिलता है और चुनाव लड़ लेता हूं। कभी कुछ कमी हुई तो घर के सामान और बकरियां तक बेच दीं जो और जो भी रुपए मिले, उसे चुनाव प्रचार में खर्च कर दिया। चुनावों में चंदे में करीब लाख रुपए तक लोग दे देते हैं।

कितने चुनाव और लड़ेंगे ?

रुकना ही नहीं है। जिंदा हूं तब तक चुनाव लड़ता रहूंगा। आगामी लोकसभा चुनाव भी लड़ने वाला हूं। मेरा सरकारों से एक ही सवाल है कि हकदार किसानों को जमीन आपने क्यों नहीं दी? जब तक ये हक आप नहीं देंगे, मैं चुनाव लड़ता रहूंगा। मेरे मरने के बाद बच्चे अपने आप सोचें और देखें कि वो क्या करना चाहते हैं।

तीतर सिंह बताते हैं कि जिस दिन मुझे और मैं जिनकी लड़ाई लड़ रहा हूं, उन सभी को उनका हक मिल जाएगा, उस दिन चुनाव लड़ना बंद कर दूंगा।

इस बार जीत को लेकर क्या लगता है?

पक्की जीत मिलेगी, पूरा विश्वास है इस बार। मेरे सामने गुरमीत कुन्नर और सुरेन्द्रपाल टीटी चुनाव मैदान में हैं। दोनों ही मुझे मिलते हैं, लेकिन कभी भी इन दोनों उम्मीदवारों से मेरी चुनाव लड़ने और नहीं लड़ने को लेकर कोई बात नहीं हुई। गांव के लोग तो हमेशा कहते हैं कि आप मेहनत करो, एक दिन जीत जाओगे।

परिवार में कौन-कौन हैं, घर का खर्चा कैसे चलता है?

मेरी तीन बच्चियां और 2 बच्चे हैं। आज तक मैंने दिहाड़ी मजदूरी करके ही घर चलाया है। बच्चे भी दिहाड़ी मजदूरी ही करते हैं। दो पोतियां हैं, जिन्होंने ग्रेजुएशन कर ली है और अब नौकरी की तलाश में हैं।

परिवार के लोग क्या कहते हैं?

तीतर सिंह इस सवाल पर कहते हैं नहीं, ये तो मेरा अपना फैसला है। बच्चे दिन में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और इसके बाद चुनाव प्रचार में मेरे साथ जाते हैं। भतीजा तो दिनभर मेरे साथ गांवों में घूमता है। चुनाव प्रचार पैदल ही करना होता है, ऐसे में रोज दो पिंड (गांव) तक ही जा पाते हैं। ऐसे ही चुनाव आते-आते पूरी विधानसभा तक पहुंच जाएंगे। लोगों से प्रचार में हाथ जोड़ कर कहता हूं कि वोट दो।

क्या विधायक-सांसद बनना ही मकसद है?

तीतर सिंह सख्ती से कहते हैं-नहीं-नहीं, ऐसा नहीं है। जिस दिन भूमिहीन किसानों को उनके हक की जमीन मिल जाएगी और उनके नाम में खातेदारी दर्ज हो जाएगी, उसी दिन चुनाव लड़ना छोड़ दूंगा। अब तक जिन लोगों के सामने चुनाव लड़ा हूं, उनमें से तो कुछ अब इस दुनिया में भी नहीं हैं। जमीनों का हक दिलाने की तो छोड़िए, आज तक कोई नेता मुझसे वोट मांगने भी नहीं आया।

पत्नी बोलीं-अब तक तो चुनाव लड़कर बर्बाद ही हुए, अब तो कुछ हक दिला दीजिए

सरदार तीतर सिंह की पत्नी ने कहा कि- आज तक तो चुनाव लड़कर हम बर्बाद ही हुए हैं। हालांकि हमने कभी भी उन्हें चुनाव लड़ने से मना नहीं किया। हर बार सभी घर वालों ने साथ दिया है, लेकिन अब तो सरकार को भी चाहिए कि मांगों को माने और हमें कुछ न कुछ हक दिलाए। आज तक जितना कमाया है, वो सब चुनावों में खर्च कर दिया है। यहां तक कि घर की बकरियां तक बेच दीं। न सिर्फ बच्चों की कमाई बल्कि लोगों से उधार रुपए लेकर भी चुनाव में खर्च किए हैं।

पोती का कहना है-जब तक सरकार से जीतेंगे नहीं, दादाजी मानेंगे नहीं

सरदार तीतर सिंह की बड़ी पोती गुरप्रीत कौर ने कहा- दादाजी बड़े जिद्दी हैं। उनकी सोच है कि जब तक सरकार हमारी बात नहीं मानेगी, तब तक वो चुनाव लड़ना नहीं छोड़ेंगे। नहरी क्षेत्र की सरकारी जमीनों पर भूमिहीन किसानों का हक है, लेकिन उन्हें उनके हक से वंचित कर रखा है। इसे दूर करने के लिए ही वो चुनाव लड़ रहे हैं। यही उनका जुनून और मकसद है।

गुरप्रीत कहती हैं- लोग आज रुपयों वालों को वोट देते हैं, जबकि उन्हें गरीब और ईमानदार लोगों को जिताना चाहिए। हमारे गांव से दादाजी को हर बार 300 वोट मिलते हैं। चुनावों में लोग बातों से तो सपोर्ट करते हैं, लेकिन आखिरी दिन धनबल से सब बदल दिया जाता है। गुरप्रीत ने बताया कि वो REET की तैयारी कर रही हैं।

तीतर सिंह की दूसरी पोती ऋतु कौर कहती हैं, अब दादाजी के बाद उनकी इस राजनीतिक विरासत को कौन आगे ले जाएगा, ये तो अभी हमने कुछ सोचा नहीं है। देखते है आगे क्या होता है ?

दस बार लोकसभा और दस बार विधानसभा चुनाव लड़ने का दावा

तीतर सिंह दस बार लोकसभा चुनाव, दस बार विधानसभा चुनाव, 11 बार जिला परिषद अध्यक्ष और सरपंच और वार्ड सदस्यता चुनाव लड़ने का दावा करते हैं। कई बार तो दो-दो सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि रिकॉर्ड से 6 विधानसभा और 4 लोकसभा चुनावों की जानकारी पुख्ता हो पाई है। 1985 के चुनाव में उन्हें 946 वोट हासिल हुए थे, जबकि 2018 में 653 मत।

चुनावी हलफनामे में तीतर सिंह की सम्पत्ति की जानकारी

तीतर सिंह के हलफनामे के अनुसार, वर्तमान में वह 78 वर्ष के हैं। उनकी तीन बेटियां, दो बेटे और पोते-पोतियां हैं। उनके पास महज 2500 रुपए कैश हैं, जो किसी बैंक में जमा नहीं हैं। कोई जमीन और गाड़ी उनके पास नहीं है। हर बार चुनाव हारने पर उनकी जमानत जब्त हुई है।

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