एनसीआई@जयपुर
राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता राजेश पायलट के बीच गुटबाजी का एक बार फिर जोरदार तरीके से उभरना तय है। इस हार से चूंकि गहलोत के साथ आलाकमान के दावे भी धरे रह गए, इसलिए उसका भी दबाव में होना तय है।
इन्हीं हालातों के बीच मंगलवार को विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। यह बैठक कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय पर सुबह 11 बजे होगी। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसमें सभी 69 विधायकों को शामिल होने का मैसेज भिजवाया है। कांग्रेस की हार के बाद होने वाली इस पहली विधायक दल की बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। इस बैठक में पार्टी की अगली रणनीति पर मंथन होने के साथ हार का मुद्दा छाए रहने की सम्भावना है। बैठक में चुनाव में हुए भितरघात का मुद्दा भी उठेगा। हार के लिए वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठने की भी संभावना है। यहां कई वरिष्ठ नेता निशाने पर रह सकते हैं।
सीएम-सरकार के काम पर लड़ा गया चुनाव, इसलिए हार की जिम्मेदारी भी उन्हीं की
कांग्रेस में जब सरकार के रहते विधानसभा चुनाव होता है तो उसकी हार-जीत की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की ही होती है। यह चुनाव सीएम अशाेक गहलाेत और उनकी सरकार के कामकाज के आधार पर लड़ा गया था। गहलोत की सात गारंटियों को प्रचार का मुख्य हिस्सा बनाया गया। ऐसे में अब हार की जिम्मेदारी भी उन्हीं की मानी जा रही है। कुछ विधायक बैठक के दौरान हार की जिम्मेदारी का मुद्दा उठाएगा।
नेता प्रतिपक्ष के चयन का फैसला हाईकमान पर छोड़ेंगे
विधायक दल की बैठक में नेता प्रतिपक्ष के चयन का फैसला हाईकमान पर छोड़ने का प्रस्ताव पारित हो सकता है। कांग्रेस में अहम पदों का फैसला हाईकमान पर छोड़ने की परम्परा रही है। इस बैठक में पर्यवेक्षक भी मौजूद रहेंगे।
सचिन पायलट उठाएंगे जिम्मेदारी तय करने का मुद्दा
कांग्रेस की हार को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमों के बीच गुटबाजी फिर तेज होने के आसार बन गए हैं। सचिन पायलट विधायक दल की बैठक में हार के जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठा सकते हैं। पायलट ने सोमवार को इसके साफ संकेत भी दे दिए थे। उन्होंने जिस अंदाज में हार को लेकर सवाल उठाए यह इस बात के संकेत है कि आगे गुटबाजी फिर तेज होगी।
पायलट ने कही थी यह अहम बात
कांग्रेस विधायक दल की बैठक से एक दिन पहले सचिन पायलट ने हार पर सवाल उठाते हुए इस पर मंथन करने का मुद्दा उठाया। पायलट ने कहा- हम लोग चाहते थे कि सरकार दोबारा बने, इसके लिए हम सब लोगों ने जितना हो सका पूरी ताकत लगाकर काम किया, फिर भी हम कामयाब नहीं हो सके। इसके कारणों को तलाशना होगा। जिस परम्परा को तोड़ने के लिए हमने बहुत मेहनत की, हरसंभव कोशिश करने के बावजूद भी हम कामयाब नहीं हो सके, निश्चित रूप से यह चिंता का विषय है। हर बार हम सरकार बनाने के बाद उसे रिपीट नहीं कर पाते हैं। इस बार दोबारा वही हुआ, इस बात का खेद हम सबको है। इस पर हमें आत्मचिंतन करना पड़ेगा। हर स्तर पर कहां कमी रही, क्या वह कारण थे जिसकी वजह से हम सरकार दोबारा नहीं बना पाए।
