July 13, 2026

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लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ, कई शोध पत्र प्रस्तुत हुए, कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा: देश में कोटा की पहचान शिक्षा के कारण

लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ, कई शोध पत्र प्रस्तुत हुए, कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा: देश में कोटा की पहचान शिक्षा के कारण

एनसीआई@कोटा

संभाग के प्रतिष्ठित लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ संस्था के चेयरमैन कुलदीप माथुर व कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति कैलाश सोडानी ने अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्वलन कर किया। इसके बाद चेयरमैन कुलदीप माथुर, सीईओ ओपी माथुर तथा डायरेक्टर सुदर्शन माथुर ने संगोष्ठी में शामिल हुए शिक्षाविदों व विद्वानों को साफा बांध व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।

इस मौके पर चेयरमैन कुलदीप माथुर ने कोटा विश्व विद्यालय के कुलपति कैलाश सोडानी का स्वगत करते हुए कार्यक्रम में इनके आगमन को हर्ष का विषय बताया। उन्होंने कहा सोडानी ने समय पर परीक्षाएं करवाईं और समय पर ही परिणाम घोषित किए। चैयरमेन ने सभी अतिथियों को संगोष्ठी में आने के लिए धन्यवाद दिया। इनमें प्रो. अखिलेश भी शामिल रहे।

चीफ गेस्ट वाइस चांसलर प्रो. कैलाश सोडानी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि इस देश को शिक्षा प्रदान करना अपने आप में एक बहुत बड़ी सेवा है। पहले भारत बहुत अलग था और आज का भारत बहुत अलग है। इसने आज बहुत तरक्की की है। यह शिक्षा के माध्यम से ही सम्भव हो पाया है। आज शिक्षा के बल पर ही देश आगे बढ़ सकता है। आज का भारत एक बहुत बड़ी शक्ति बन गया है। आज कोटा को देश के महत्वपूर्ण शहरों में गिना जाता है। यह शिक्षा के माध्यम से ही सम्भव हो पाया है।

कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति कैलाश सोडानी राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ करते हुए।
कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति कैलाश सोडानी राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ करते हुए।

दिव्यांगजनों को भी मुख्य धारा से जोड़ा जाए

गेस्ट ऑफ ऑनर समाज कल्याण विभाग की डिप्टी डायरेक्टर सविता कृष्णिया ने आयोजन के विषय को काफी अच्छा बताया। उन्होंने कहा-हमें दिव्यांगों को भी समाज की मुख्य धारा में जोड़ना चाहिए। आज इनके लिए विद्यालय भी खुले हैं, जो इनके भविष्य के लिए कारगर हैं। इग्नू नई दिल्ली-एनसीडीएस के डायरेक्टर डॉ. संजयकांत प्रसाद ने अपने उद्बोधन में कहा कि एक-एक बच्चे की एजुकेशन हमारे लिए आवश्यक है। इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हम इस विषय पर डिस्कशन कर सकते हैं। यह हमारे लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की इस संगोष्ठी के उद्देश्यों व सम्भावित फायदों पर भी चर्चा की।

इन्होंने प्रस्तुत किए शोध पत्र

संगोष्ठी में आए विभिन्न गणमान्य लोगों ने समावेशी शिक्षा के विभिन्न मुद्दों व नवाचारों पर बात की। इग्नू-नई दिल्ली से आए हुए डॉ. आलोक उपाध्याय ने शिक्षा में प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से दिव्यांग छात्रों के समावेश को बढ़ावा कैसे दिया जा सके, इस विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। इन गहन चर्चाओं के बीच कई शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर नैन्सी वर्मा, लेक्चरर स्वाती द्विवेदी, मोनिका टांक, कृष्णा कुमारी व पीयूष सक्सेना के शोध पत्र प्रमुख रहे।

दूसरे सेशन में यह रहा विशेष

कार्यक्रम के दूसरे सेशन में डॉ. केशव शर्मा ने कहा-शिक्षण सीखने के संसाधन, शिक्षकों की दक्षता और कक्षा में मनोरंजन बढ़ाने में सहायक होते हैं। इस विषय पर गहन व्याख्यान प्रस्तुत किया। डॉ. धनंजय वी. देशमुख ने शिक्षण-अधिगम सामग्री का विकास-चुनौतियां और स्थिरता’ पर चर्चा की। अंत में कार्यक्रम के प्रभारी ऋषभ कुमार ने सभी अतिथियों और बड़ी संख्या में आए प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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