एनसीआई@जयपुर
महंगे फल और कम समय में ज्यादा मुनाफा – यही वजह है कि राजस्थान में अब स्ट्रॉबेरी की खेती तेजी से बढ़ रही है। पहले सिर्फ पहाड़ी इलाकों तक सीमित रहने वाली ये ‘लाल सोना’ अब चित्तौड़गढ़, झालावाड़, अलवर और कोटा जैसे जिलों में किसानों की आय का नया जरिया बन रहा है।
उन्नत किस्मों और ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक तकनीक से अब 1 हेक्टेयर में 6 से 8 टन तक उत्पादन लिया जा रहा है।
इसलिए है स्ट्रॉबेरी ‘फायदे की फसल’
1. कम समय, ज्यादा रिटर्न: सितम्बर-अक्टूबर में रोपण और दिसम्बर से मार्च तक तुड़ाई। सिर्फ 4 महीने में पैसा हाथ में।
2. पोषण का पावर हाउस: विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला। आइसक्रीम, जैम, सिरप से लेकर एक्सपोर्ट तक डिमांड।
3. कम जमीन में ज्यादा कमाई: पारम्परिक फसलों की तुलना में प्रति एकड़ आय 3-4 गुना ज्यादा।
राजस्थान के लिए जरूरी: जलवायु, मिट्टी और किस्में
1. जलवायु और मिट्टी
स्ट्रॉबेरी को शीतोष्ण जलवायु चाहिए। 22-23°C तापमान सबसे बढ़िया है। जल निकास वाली दोमट मिट्टी जिसका pH 5.5 से 6.5 हो। राजस्थान में रेतीली दोमट में मल्चिंग करके भी अच्छी पैदावार ली जा रही है।
2. टॉप 5 उन्नत किस्में जो दे रही हैं बम्पर मुनाफा
• विंटर डॉन: जल्दी फल, ठंड सहनशील
• स्वीट चार्ली: मीठा स्वाद, मार्केट में हाई डिमांड
• चेडलर: बड़े आकार के फल, प्रोसेसिंग के लिए बेस्ट
• फेरिटवल: बीमारी रोधी, ज्यादा उपज
• कैमरोजा: लम्बी शेल्फ लाइफ, एक्सपोर्ट क्वालिटी
खास बात: इसके पौधे, बीज और रनर्स यानी प्रशाखाओं से तैयार किए जाते हैं।
स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए उन्नत किस्मों का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:-
1. स्वीट चार्ली (Sweet Charlie)
विशेषता: यह भारत में सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली किस्मों में से एक है।
फायदा: इसके फल जल्दी पकते हैं, आकार में बड़े और स्वाद में काफी मीठे होते हैं।
2. चैडलर (Chandler)
विशेषता: व्यावसायिक खेती के लिए यह एक बेहद लोकप्रिय किस्म है।
फायदा: इसका उत्पादन बहुत अच्छा होता है और इसके फल चमकदार लाल रंग व बेहतरीन कोन (शंकु) के आकार के होते हैं।
3. विंटर टाउन (Winter Down)
विशेषता: यह किस्म अधिक उत्पादन देने और जल्दी फल देने के लिए जानी जाती है।
फायदा: इसके पौधे से फूल और फल बहुत ज्यादा मात्रा में निकलते हैं।
4. फ्लोरिडा ब्यूटी (Florida Beauty)
विशेषता: इस किस्म के फल काफी आकर्षक और मजबूत होते हैं।
फायदा: अच्छी बनावट और लम्बे समय तक खराब न होने के कारण यह बाजार में ऊंचे दाम दिलाती है।
अन्य उन्नत किस्में
इनके अलावा आप अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुसार नाबिला (Nabila), कैमारोसा (Camarosa) और रैनबो (Rainbow) जैसी किस्मों का भी चयन कर सकते हैं।
आधुनिक खेती की 4 टेक्निक स्टेप
1. खेत की तैयारी और रोपण
2-3 बार हैरो से जुताई। आखिरी जुताई में गोबर की खाद 20-25 टन/हेक्टेयर मिलाएं। कतार से कतार 45-60 सेमी और पौधे से पौधा 25-30 सेमी की दूरी रखें। ड्रिप इरिगेशन + प्लास्टिक मल्चिंग से पानी 50% और खरपतवार 90% कम होता है।
2. उर्वरक प्रबंधन
NPK 60:80:60 किग्रा/हेक्टेयर। मिट्टी जांच के बाद ही उर्वरक दें। फूल और फल के समय बोरॉन और कैल्शियम का स्प्रे करने से क्वालिटी बढ़ती है।
3: कीट और रोग नियंत्रण
– कीट: रोपेवयर सुंडी, लाल मकड़ी, थ्रिप्स।
नियंत्रण: डायमेथोएट 30 EC @ 1ml/लीटर पानी।
– रोग: बुरे धब्बे से फल कड़े हो जाते हैं, सफेद फफूंद लगती है। नियंत्रण: मेन्कोजेब का छिड़काव।
4: तुड़ाई, भंडारण और मार्केटिंग
– सुबह या शाम को तुड़ाई करें। फल 70-80% लाल होने पर तोड़ें।
– डंठल के साथ 1-2 सेमी काटें, सीधा न खींचें।
– तुड़ाई के बाद तुरंत ठंडी/छायादार जगह पर रखें। दूर भेजने के लिए वेंटिलेटेड प्लास्टिक क्रेट और रेफर वैन जरूरी।
– डिस्पोजेबल ग्लव्स पहनकर तुड़ाई करें, ताकि क्वालिटी बनी रहे।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह
स्ट्रॉबेरी से किसान 3 लाख से 5 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर तक शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं। बस ध्यान रखें – पानी की निकासी, समय पर तुड़ाई और मार्केट लिंकेज। सरकारी योजनाओं के तहत ड्रिप और पॉली हाउस पर सब्सिडी भी मिलती है।
किसानों के लिए 3 जरूरी टिप्स
1. मार्केट पहले तय करें: लोकल मंडी, होटल, प्रोसेसिंग यूनिट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से पहले ही टाई-अप कर लें।
2. FPO के साथ जुड़ें: समूह में बेचने से रेट अच्छा मिलता है और कोल्ड चेन की लागत कम होती है।
3. जैविक स्ट्रॉबेरी: ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन लेकर आप 30-40% ज्यादा दाम ले सकते हैं।
