प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आलोचकों को नए तरीके से आड़े हाथों लिया है। उन्होंने हर बात पर सवाल उठाने वाले विपक्षी नेताओं को नाराज फूफा बताया और कहा कि होम्योपैथी की ऐसी दवा दी है कि सारे दिमागी नक्सल बाहर आ गए हैं।
एनसीआई@नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को विपक्ष और अपने अन्य विरोधियों पर अलग ही अंदाज में निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा कि वह जब भी कोई नया काम शुरू करते हैं, कुछ लोग फूफा बनकर सवाल करने लगते हैं, लेकिन भारत ने ऐसे लोगों को जवाब दे दिया है। अपने विरोधियों के लिए उन्होंने यह भी कहा कि इस बार 15 अगस्त को उन्होंने लाल किला से होम्योपैथी की दवा दे दी, जिसके बाद से सभी दिमागी नक्सल निकलकर बाहर आ गए।
छात्रों से बोले पीएम मोदी- बाहर दो तरह के लोग मिलेंगे
प्रधानमंत्री मोदी श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में स्टूडेंट्स को सम्बोधित कर रहे थे। पीएम मोदी ने कहा, ‘केम्पस के बाहर आपको नई दुनिया मिलेगी। दो तरह के लोग मिलेंगे, एक वो जो पॉजिटिव तरीके से समाज के लिए काम करते हैं। दूसरी प्रजाति, जो कोई भी काम शुरू होने पर ‘नाराज फूफा’ बन जाते हैं।’
नाराज फूफा का पसंदीदा काम-हर चीज का विरोध करो
मोदी ने कहा कि नाराज फूफा का पसंदीदा काम हर काम का विरोध करना होता है। उनका एक ही डायलॉग होता है – इसकी क्या जरूरत है? हम यूपीआई लाए, सबसे ऊंची मूर्ति बनाई, चिप बनाने की बात की, नई संसद बनाई, वीर सेना नायकों का मेमोरियल बनाया, हर जगह फूफा मैदान में आ गए कि इसकी क्या जरूरत है? लेकिन भारत ने ऐसे सारे फूफाओं को जवाब दिया। जो देश के लिए जरूरी है, उसे कोई रोक नहीं सकता। इस प्रकार पीएम मोदी ने आलोचकों को ‘नाराज फूफा’ बताया।
पीएम ने आगे कहा-जब हम दुनिया का सबसे बड़ा स्टेच्यू बना रहे थे, तब फूफा जी ने कमर कस ली, इसकी जरूरत क्या है। जब हमने हाई स्पीड ट्रेन पर काम किया तो फूफा जी बोले, इसकी जरूरत क्या है। जब यूपीआई लेकर आए तो फूफा बोले, इसकी जरूरत क्या है। हमने नई पार्लियामेंट बिल्डिंग बनाई तो फिर बोले, इसकी जरूरत क्या है। जब हमने हमारे वीर सेना नायकों का मेमोरियल बनाया तो फूफा फिर मैदान में आ गए, इसकी क्या जरूरत थी। लेकिन भारत ने ऐसे सारे फूफाओं को जवाब दिया। जो देश के लिए जरूरी है वो भारत को करने से कोई रोक नहीं सकता।
मोदी बोले- देश आर्थिक और सामाजिक रूप से सुरक्षित
पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज 2013 के मुकाबले देश आर्थिक रूप से, सामाजिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित है। लेकिन ये देखकर कुछ लोगों की बौखलाहट बढ़ रही है। ऐसे लोगों के लिए मैंने लाल किले से एक होम्योपैथी का डोज दिया था… दिमागी नक्सल! उन्होंने कहा कि होम्योपैथी की गोली बीमारी को कुछ समय के लिए और उभार देती है, उसके बाद बीमारी का इलाज शुरू करती है। तो जैसे ही मैंने दिमागी नक्सल वाली होम्योपैथी की गोली दी, सारे दिमागी नक्सल निकल कर बाहर आने लगे, और जो लोग दिमागी नक्सल को बढ़ावा दे रहे हैं, अब जनता उनका भी असली रंग देख रही है।
भ्रष्टाचारी बेखौफ घूमते थे, आतंकी बेलगाम थे
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने सम्बोधन के दौरान 2014 से पहले के समय के अपने सं६बोधन को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय (2013) विकास फर्श पर था और महंगाई अर्श पर थी। उस समय घोटाले चरम पर थे और भ्रष्टाचारी बेखौफ घूमते थे। आतंकी बेलगाम थे और पाकिस्तान बेकाबू था। एक वह दिन था और एक आज का दिन है, जब आतंकवाद फैलाने वाले पस्त पड़े हैं, पाकिस्तान कोई नापाक हरकत करता है तो भारतीय सेना घर में घुसकर मारती है, नक्सलवाद की कमर तोड़ दी गई है। इस दौरान पीएम मोदी की हर बात पर रह रहकर तालियां बजती रहीं।
