एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी लगातार सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमलावर हैं। कुरैशी ने फॉर्म 6 में बदलाव का आरोप लगाते हुए सवाल उठाते हुए इसे कानूनी रूप से गलत बताया ट। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसला लेने का आरोप लगाया है।
एनसीआई@नई दिल्ली
देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी इन दिनों मुख्य रूप से मतदाता सूची की एसआईआर प्रक्रिया पर दिए गए अपनी तीखी प्रतिक्रिया और बेबाक बयानों के कारण चर्चा में हैं। हाल में उन्होंने मीडिया इंटरव्यू में वर्तमान में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग के फैसलों में अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार कर एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि एसआईआर (SIR) में 13 करोड़ नाम काटे गए, जिनमें केवल 150 बांग्लादेशी थे। वहीं, अब कुरैशी के बयान पर सरकार की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।
इसी क्रम में भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने एसवाई कुरैशी के बयान पर करारा जवाब दिया है। उन्होंने एक्स हेंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि झूठे और शर्मनाक एसवाई कुरैशी से यह पूछा जाना चाहिए था कि जब वे मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) थे, तब उन्होंने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के नियमों को कैसे बदल दिया था। उन्होंने बांग्लादेशी मुसलमानों के लिए नाम जुड़वाना आसान बना दिया और एक बार नाम जुड़ जाने के बाद, उन्हें हटाना लगभग असंभव कर दिया।
फॉर्म-6 में बदलाव पर भी जताई थी आपत्ति
कुरैशी ने चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों से दोबारा फॉर्म-6 भरवाने के निर्देश की भी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 केवल नए मतदाताओं के लिए होता है। गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं से इसे जबरन भरवाना और उनसे डिक्लेरेशन लेना कानूनी रूप से गलत है। इसमें 1 साल तक की जेल हो सकती है।
जानिये डॉ. एसवाई कुरैशी कौन हैं?
उल्लेखनीय है कि डॉ. एसवाई कुरैशी भारत के 17वें मुख्य चुनाव आयुक्त रहे हैं। उन्होंने 30 जुलाई 2010 से 10 जून 2012 तक मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी संभाली थी। वह भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने वाले पहले मुस्लिम व्यक्ति हैं। वह 1971 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी हैं।
