एनसीआई@बूंदी
भारतीय सांस्कृतिक निधि ( Indian National Trust for Art and Cultural Heritage या INTACH / इंटेक) चेप्टर बूंदी की ओर से आज मंगलवार को महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण सप्ताह के तहत महाकवि का जन्मदिन हर्षोल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर रानी जी की बावड़ी स्थित महाकवि मिश्रण की प्रतिमा पर समारोहपूर्वक माल्यार्पण किया गया। इसके बाद शहर में विरासत यात्रा निकाली गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नगर परिषद के सभापति भरत शर्मा थे।
मुख्य अतिथि सभापति शर्मा ने अपने सम्बोधन में कहा कि
महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण राजस्थान की शान हैं। इनके पदचिह्नों पर चल कर बूंदी की विरासत को बचाने के साथ बूंदी में विकास कर बदलाव लाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

आगे इंटेक चेप्टर संयोजक राजकुमार दाधीच ने कहा कि प्रति वर्ष आयोजित होने वाले ‘महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण जन्मोत्सव सप्ताह’ के दौरान जन जन को महाकवि के बारे में जानकारी देने का कार्य किया जाता है। बूंदी की विरासत महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण को आराध्य देव मान कर बचाई जा सकती है। मिश्रण का साहित्य राष्ट्रवाद की भावना विकसित करने के लिए पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण के प्रपौत्र खुमान सिंह और सह संयोजक राजेन्द्र भारद्वाज ने भी समारोह को सम्बोधित किया।
इस मौके पर मुख्य अतिथि नगर परिषद के सभापति शर्मा, साहित्यकार नंदू राजस्थानी, पीयूष पाचक, सुमित विजय, प्रकाश परचम, नंदलाल राव, रामस्वरूप मूंदड़ा व डॉ. सतीश शर्मा को सूर्यमल्ल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इस मौके पर इंटेक् सदस्य नंद प्रकाश नंजी, ऋतुराज दाधीच, अनुराग शर्मा, सतीश जोशी, डॉ. युवराज सिंह, अशोक कुमार शर्मा तलवास, सतीश जोशी, पंकज दाधीच, शिफाउल हक, मनीष सिसोदिया, ओराक नैय्यर आदि ने महाकवि की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
आयोजन में ये गणमान्य भी रहे शामिल
इस अवसर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नारायण सिंह गौड़ झुवासा, विनोद शृंगी , शुभम शृंगी, सुरेश शर्मा, अधीक्षण अभियंता एजाजुद्दीन अंसारी, बलवंत भड़कत्या, अशफ़ाक गौरी, नर्सिंग कॉलेज एवं राजकीय एएनएम के बालक- बालिकाओं के साथ विरासत संरक्षण का संकल्प लिया। बूंदी शहर की बसावट की बारीकियां देखीं।
इस ‘विरासत यात्रा’ के दौरान शहर की विरासत से परिचय करवाते हुए महाकवि की हवेली एवं भवाल्दी बावड़ी पर यात्रा का समापन किया गया। यहां समारोह में सभी ने विरासत संरक्षण का संकल्प लिया।
इंटेक के बारे में जानिये
भारतीय सांस्कृतिक निधि ( Indian National Trust for Art and Cultural Heritage) भारत की कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित एक प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन है।
• स्थापना: 27 जनवरी 1984
• मुख्यालय: नई दिल्ली (लोधी एस्टेट)
• अध्यक्ष: अशोक सिंह ठाकुर (मार्च 2025 में चुने गए)
• पंजीकरण: सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत
• विस्तार: देशभर में इसकी 228 से अधिक शाखाएं (चेप्टर) हैं।
प्रमुख कार्य और उद्देश्य:
• विरासत संरक्षण: ऐतिहासिक स्मारकों, प्राचीन भवनों, कलाकृतियों और प्राकृतिक स्थलों की सुरक्षा और जीर्णोद्धार करना।
• अमूर्त विरासत: भारत की पारंपरिक कलाओं, लोक नृत्यों, शिल्पकला और सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देना और सहेजना।
• जागरुकता: स्कूल-कॉलेजों और स्थानीय स्तर पर कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और अभियानों के माध्यम से विरासत के प्रति जागरूकता फैलाना।
• अंतरराष्ट्रीय मान्यता: इसे संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (UN ECOSOC) से विशेष सलाहकार का दर्जा प्राप्त है।
