May 7, 2021

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एथलीट अंजू बॉबी की दास्तान: 2002 के कॉमनवेल्थ गेम्स के पहले पता चला कि मेरी एक ही किडनी; मैंने खुद को समझाया, ब्रॉन्ज जीता

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नई दिल्ली/कोच्चि15 मिनट पहलेलेखक: राजकिशोर

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2003 में पेरिस विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीतकर इतिहास रचने वाली ओलिंपियन अंजू बॉबी जॉर्ज ने सोमवार को खुलासा किया कि उनकी एक ही किडनी है। इसके बावजूद उन्होंने सफलता हासिल की और शीर्ष स्तर पर पहुंचीं।

कोरोना से डरे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाते हुए आईएएएफ विश्व एथलेटिक्स फाइनल्स की स्वर्ण पदक विजेता अंजू ने कहा कि ‘एक किडनी के कारण दौड़ शुरू करते समय उनका पैर नहीं उठता था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इस खुलासे के बाद केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि अंजू, आपने कड़ी मेहनत, धैर्य और प्रतिबद्धता से देश का मान बढ़ाया।’ अंजू से बातचीत के अंश…

अंजू बोलीं- डॉक्टर ने 6 महीने बेड रेस्ट कहा, मैंने 20 दिन में खुद को रिकवर किया, एथलीट कोरोना से डरें नहीं

आज एथलीट कोरोना के कारण डरे हुए हैं। जूनियर एथलीट के पैरेंट्स उन्हें ट्रेनिंग कैंप भेजने से डर रहे हैं। लेकिन हमें कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि सावधानी बरतने और फिटनेस पर ध्यान देने की जरूरत है। यह ऐसा समय है, जब हमें खुद को मानसिक रूप से मजबूत करना है। मैं नेशनल जीतकर 2002 के कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चयनित हुई। गेम्स से पहले तबियत खराब होने पर चेकअप करवाया तो पता चला कि मेरी जन्म से एक ही किडनी है।

मैं बहुत डर गई, लेकिन मैं देश के लिए मेडल जीतना चाहती थी। इसलिए मौका नहीं गंवाना चाहती थी। मैंने खुद को समझाया कि इतनी ट्रेनिंग की है। अब हार नहीं मानूंगी। कोच और पैरेंट्स ने मेरा हौसला बढ़ाया। कॉमनवेल्थ गेम्स में हाई जंप में ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रही। इसके बाद मेरा आत्मविश्वास बढ़ा। सरकार और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया का भी सहयोग मिला।

कैंप से स्पर्धा तक मेरे लिए अलग इंतजाम होते थे। उसी साल बुसान एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीतने में सफल रही। 2003 में पेरिस वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप से 20 दिन पहले मैं बीमार पड़ गई। डॉक्टर ने 6 महीने बेड रेस्ट को कहा। लेकिन वर्ल्ड एथलेटिक्स में देश का प्रतिनिधित्व करना हर एथलीट का सपना होता है। मेरा भी था। मैंने 20 दिन में खुद को रिकवर किया। ब्रॉन्ज जीतने में सफल रही। हालांकि एक किडनी के कारण ज्यादा केयर करनी पड़ती थी। ज्यादा तरल पदार्थ लेना पड़ता था। कई बार सूजन हो जाती थी।

मैं अब भी सावधानी बरतती हूं। फिटनेस पर ध्यान देती हूं। रोज एकेडमी जाकर एथलीट का मार्गदर्शन करती हूं। मेरा मानना है कि हमें किसी चीज से डरने नहीं, सावधानी बरतने की जरूरत है। हमारा शरीर भी एडजस्ट हो जाता है। कोरोना महामारी से डरें नहीं, बल्कि इसका मुकाबला करें और सावधानी बरतें।

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