महाराणा प्रताप पर विवादित बयान देकर घिरे कटारिया: राजपूतों का भाजपा मुख्यालय पर प्रदर्शन, मुंह पर कालिख पोतने की चेतावनी
एनसीआई@जयपुर
राजसमंद में चुनाव प्रचार के दौरान महाराणा प्रताप पर विवादित बयान देकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया बुरी तरह घिर गए हैं। इससे भाजपा भी भारी परेशानी में आ गई है। कटारिया के खिलाफ करणी सेना सहित कई राजपूत संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। करणी सेना से जुड़े युवाओं ने भाजपा मुख्यालय पर पहुंचकर जमकर नारेबाजी करते हुए गुलाबचंद कटारिया के होर्डिंग पर स्याही पोत दी। करणीा सेना ने कटारिया के मुंह पर कालिख पोतने की चेतावनी भी दी है।
राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष नारायणसिंह दिवराला की अगुवाई में दोपहर बाद युवाओं ने भाजपा मुख्यालय पहुंचकर नारेबाजी की। भाजपा मुख्यालय के बाहर लगे होर्डिंग पर कटारिया की तस्वीर पर स्याही पोत दी। इसके बाद कटारिया और सतीश पूनिया के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महाराणा प्रताप पर की गई टिप्पणियों के विरोध में कटारिया के खिलाफ आक्रोश जाहिर किया। विरोध प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ता चले गए।
कटारिया के मुंह पर कालिख पोतने की चेतावनी
करणी सेना जिलाध्यक्ष नारायणसिंह दिवराला ने कहा कि करणी सेना प्रदेश भर में कटारिया का विरोध करेगी। कटारिया जहां भी जांएगे उनका विरोध होगा। कटारिया का मुंह काला किया जाएगा। अगर आज कटारिया मिल जाते तो मुंह पर स्याही पोत देते। महाराणा प्रताप जैसे महापुरुषों के खिलाफ टिप्प्णियां करने से पहले इन्हें सोचना चाहिए। जिस तरह की निम्न भाषा कटारिया ने महाराणा प्रताप के लिए इस्तेमाल की है, उसे कोई बर्दाश्त नहीं करेगा। सतीश पूनिया ने पिछले दिनों महाराणा प्रताप के मोमेंटो को पैरों में रख दिया था, इसकी वजह से उनका विरोध किया है।
कटारिया ने दो बार माफी मांगी, लेकिन नाराजगी बरकरार
गुलाबंचद कटारिया महाराणा प्रताप पर दिए बयान को लेकर दो बार माफी मांग चुके हैं। इसके बावजूद कई संगठन उन्हें माफ करने को तैयार नहीं हैं।। कटारिया का यह विवादित बयान उपचुनावों की वोटिंग से ठीक पहले आया है। इस बयान से भाजपा की उम्मीदवारों को राजपूत मतदाताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा डेमेज कंट्रोल में जुट गई है।
भाजपा प्रवक्ता बोले- कांग्रेस दफ्तर जाकर करें प्रदर्शन, डोटासरा ने हटाया महाराणा का पाठ
करणी सेना के प्रदर्शन के बाद भाजपा प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने कहा, विरोध प्रदर्शन तो कांग्रेस दफ्तर पर करना चाहिए। हमारी सरकार के समय हम महाराणा प्रताप को पाठ्यक्रम में पढ़ाते थे, जिसे शिक्षा मंत्री डोटासरा ने आकर अकबर को शामिल करवा दिया। महाराणा प्रताप का अपमान तो कांग्रेस की सरकार और डोटासरा ने किया है।
