केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे को आधी रात मिली जमानत
एनसीआई@मुम्बई
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को ‘थप्पड़’ मारने की बात कहने पर गिरफ्तार किए गए केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे (Narayan Rane) को कोर्ट से जमानत मिल गई है। उन्हें अगले हफ्ते 30 अगस्त और 6 सितम्बर को रायगढ़ में पेश होने को कहा गया है। पहले कोर्ट ने राणे को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।
रत्नागिरी कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने और बॉम्बे हाईकोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिलने के बाद पुलिस ने नारायण राणे को मंगलवार को हिरासत में ले लिया और फिर कुछ देर बाद शाम 5 बजे के करीब उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया था।
इसके बाद नारायण राणे को महाड मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया और रात करीब साढ़े 11 बजे उन्हें जमानत दे दी गई। राणे को 15,000 रुपए का जमानती मुचलका भरने और 30 अगस्त तथा 6 सितम्बर को रायगढ़ में पेश होने को कहा गया है।
मामले की सुनवाई जज शेखबाबासो एस पाटिल ने की। अदालत ने नारायण राणे को ऐसा कोई अपराध नहीं करने का निर्देश देते हुए पुलिस को केन्द्रीय मंत्री की आवाज के नमूने एकत्र करने से पहले सात दिन का नोटिस देने को भी कहा।
14 दिन की न्यायिक हिरासत
पुलिस ने शुरुआत में पुलिस हिरासत की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद अदालत ने राणे को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया, लेकिन केन्द्रीय मंत्री के वकील ने जमानत याचिका लगा दी, जिसे बाद में मंजूर कर लिया गया।
नारायण राणे को मंगलवार को गोलवाली में हिरासत में लेकर रत्नागिरी जिले के संगमेश्वर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। बाद में उन्हें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के खिलाफ उनकी विवादास्पद टिप्पणी के मामले में महाड़ एमआईडीसी पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के सम्बन्ध में रायगढ़ पुलिस को सौंप दिया गया था।
नारायण राणे की सफाई
इससे पहले दिनभर चर्चा के केन्द्र में रहे केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘वे मुझसे डरते हैं, इसलिए ऐसा कर रहे हैं। मैंने कुछ गलत नहीं कहा।’ उन्होंने अपने थप्पड़ वाले बयान को दोहराते हुए कहा, ‘अगर मैं वहां होता तो मैं उसे थप्पड़ मार देता।’ उन्होंने कहा कि उस दिन होता तो, ऐसा करता। ऐसा मैंने आज के लिए नहीं कहा था।
उल्लेखनीय है कि, उनके खिलाफ महाड एमआईडीसी थाने में आईपीसी की धारा 153/ए (1), 505 (2), 504, 506, 189 के तहत मामला दर्ज किया गया है। महाड़ में एहतियातन SRPF की 1 कम्पनी, दंगा रोधी 2 पलटन, 4 डिप्टी एसपी, 6 PI और 120 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जरूरत: डॉक्टर
सीएम उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) पर विवादित बयान देने के बाद नारायण राणे के खिलाफ महाराष्ट्र के नासिक, पुणे और महाड़ में FIR दर्ज कराई गई थी। उनके खिलाफ नासिक में आईपीसी की धारा 500, 505 (2) और 153-B के तहत केस दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ चौथा मामला भी दर्ज हो गया है। मुम्बई से सटे ठाणे जिला के नौपाडा पुलिस थाने में यह मामला दर्ज हुआ। महापौर नरेश म्हस्के ने यह मामला दर्ज कराया है। यह धारा 500, 505 (2), 153-B (1)(c) के तहत मामला दर्ज हुआ है।
इससे पहले रत्नागिरी जिले के संगमेश्वर थाने में हिरासत में रखे गए नारायण राणे के स्वास्थ्य की जांच करने आए डॉक्टर का कहना है कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया है। उनकी उम्र और शुगर के रोगी होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जरुरत है और ईसीजी करने की आवश्यकता है, हालांकि उनका शुगर लेवल की जांच नहीं हो सकी है।
गिरफ्तारी पर भड़की बीजेपी
केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे की गिरफ्तारी पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर आलोचना की है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा केंद्रीय मंत्री नारायण राणे जी की गिरफ़्तारी संवैधानिक मूल्यों का हनन है। इस तरह की कार्यवाही से ना तो हम डरेंगे, ना दबेंगे। भाजपा को जन-आशीर्वाद यात्रा में मिल रहे अपार समर्थन से ये लोग परेशान हैं। हम लोकतांत्रिक ढंग से लड़ते रहेंगे, यात्रा जारी रहेंगी।
महाराष्ट्र सरकार द्वारा केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे जी की गिरफ़्तारी संवैधानिक मूल्यों का हनन है। इस तरह की कार्यवाही से ना तो हम डरेंगे, ना दबेंगे। भाजपा को जन-आशीर्वाद यात्रा में मिल रहे अपार समर्थन से ये लोग परेशान है। हम लोकतांत्रिक ढंग से लड़ते रहेंगे, यात्रा जारी रहेंगी।
बॉम्बे हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
गिरफ्तारी से बचने के लिए नारायण राणे ने पहले रत्नागिरी की एक अदालत में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए याचिका दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद राणे ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था और अपने खिलाफ दर्ज तीनों FIR को रद्द करने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
नारायण राणे के वकील अनिकेत निकम ने हाईकोर्ट से इस मामले में तुरंत सुनवाई की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने प्रीसिप फाइल करने को कहा, जो तत्काल सुनवाई करने के लिए जरूरत होती है। इस पर उन्होंने कहा कि ‘उनके पास याचिका की स्केन कॉपी है। रजिस्ट्री को इसे एक्सेप्ट करने का आदेश दें।’ इस पर जस्टिस शिंदे ने कहा, ‘प्रक्रिया सभी के लिए एक हैं। आप हमसे उम्मीद मत करिए कि हम रजिस्ट्री का काम करेंगे।’
उन्होंने ये भी कहा कि पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 41A का पालन नहीं किया है। नारायण के खिलाफ जो धाराएं लगाई गई हैं, उसमें 7 साल तक की सजा का प्रावधान है, इसलिए पुलिस को उन्हें हिरासत में लेने से पहले 41A के तहत नोटिस जारी करना चाहिए था। हालांकि, कोर्ट ने उनकी दलीलों को सुनने से इनकार कर दिया।
समर्थक बोले- ये गुंडा राज है
नारायण राणे को हिरासत में लिए जाने से उनके समर्थकों में आक्रोश है। उनके समर्थकों ने इसे ‘गुंडा राज’ बताया है। उनके समर्थकों ने ये भी दावा किया है कि पुलिस के पास अरेस्ट वॉरंट भी नहीं था। समर्थकों का कहना है कि पुलिस से जब अरेस्ट वॉरंट मांगा गया तो उनके पास वो नहीं था। एक समर्थक ने कहा, ‘इतनी जल्दी तो बलात्कारियों को भी गिरफ्तार नहीं किया जाता। वो कोई हत्या के आरोपी नहीं हैं। वो केन्द्रीय मंत्री हैं। उन्होंने ऐसा कौन सा अपराध किया है।’
बस का समर्थन नहीं, लेकिन हैं साथ: फडणवीस
वहीं, इस पूरे विवाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं बीजेपी नेता देवेन्द्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) का कहना है कि उन्हें संयम रखना चाहिए था। फडणवीस ने कहा, ‘सीएम को लेकर बोलते समय नारायण राणे को संयम बरतना चाहिए था। गुस्सा नहीं दिखाना चाहिए था। जैसे को तैसा नहीं करना चाहिए था।’
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हम उनके बयान का समर्थन नहीं करते, लेकिन हम उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि उन लोगों के खिलाफ केस दर्ज क्यों नहीं किया जा रहा जो कुछ नेताओं को ‘बेशर्म’ और ‘चौकीदार चोर है’ कहकर बुलाते हैं। फडणवीस ने कहा कि सरकार ने शरजील उस्मानी के खिलाफ कुछ नहीं किया, जिसने हिन्दुओं को आतंकवादी बुलाया था और राणे के खिलाफ मुस्तैदी दिखा रही है।
यह कहा था राणे ने
केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे (Union Minister Narayan Rane) ने जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान दावा किया था कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ये भूल गए थे कि देश कब आजाद हुआ था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि साल भूलने के बाद उन्होंने अपने सहयोगी से पूछा था।
इस पर राणे ने कहा था, ‘ये शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को ये नहीं पता कि हमें आजाद हुए कितने साल हो गए. अपने भाषण के दौरान उन्होंने पीछे मुड़कर अपने सहयोगी से पूछा था। अगर मैं वहा होता तो उन्हें जोरदार थप्पड़ मारता।’
