July 13, 2026

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बागी विधायकों का अल्टीमेटम: गहलोत के सीएम बने रहने की घोषणा के बाद ही वापस लेंगे इस्तीफा, इस पर गहलोत की फिर चुप्पी से उठ रहे सवाल

बागी विधायकों का अल्टीमेटम: गहलोत के सीएम बने रहने की घोषणा के बाद ही वापस लेंगे इस्तीफा, इस पर गहलोत की फिर चुप्पी से उठ रहे सवाल

एनसीआई@जयपुर

राजस्थान में अशोक गहलोत गुट के बागी विधायकों ने एक बार फिर हाईकमान को चुनौती दी है। इन विधायकों की तरफ से एक अल्टीमेटम जारी किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इन विधायकों ने कहा है कि दिल्ली से जब तक अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री पद पर रहने का ऐलान नहीं होगा, तब तक वे अपने इस्तीफे वापस नहीं लेंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर कांग्रेस हाईकमान गहलोत के खिलाफ फैसला लेता है तो सरकार अल्पमत में आ जाएगी।

गहलोत गुट के विधायकों का कहना है कि बिना भरोसे में लिए पार्टी सचिन पायलट को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाने जा रही है, जबकि पायलट गुट ने दो साल पहले 18 विधायकों के साथ बगावत की थी‌। ऐसे में पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाना स्वीकार नहीं होगा। ये विधायक गहलोत केम्प के किसी भी विधायक को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी हाईकमान अशोक गहलोत के नाम पर विचार कर रहा था। ऐसे में उनकी जगह राजस्थान के सीएम पद पर सचिन पायलट की ताजपोशी किए जाने की चर्चाएं तेज हुईं। इस सम्बन्ध में पार्टी की तरफ से मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को जयपुर भेजा गया था। दोनों ऑब्जर्वर को विधायक दल की बैठक लेना था। मगर इससे पहले ही गहलोत समर्थक विधायकों ने मंत्री शांति धारीवाल के घर एकत्रित होकर सामूहिक इस्तीफे पर हस्ताक्षर कर दिए।

अजय माकन पर लगाए थे गम्भीर आरोप

इतना ही नहीं, इन विधायकों ने प्रदेश प्रभारी अजय माकन पर खुलकर हमला बोला था। इन्होंने कहा था कि माकन यहां पक्षपात पूर्ण रवैये से काम कर रहे हैं। वे जयपुर में एक एजेंडे के साथ आए हैं और पायलट को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। माकन विधायकों को कन्वेंस भी करने में जुटे हैं। हालांकि, बाद में कांग्रेस हाईकमान ने इस पूरे मामले में पर्यवेक्षकों से रिपोर्ट तलब की और तीन विधायकों को नोटिस जारी किया था, जबकि गहलोत को क्लीन चिट दे दी गई थी।

गहलोत ने सोनिया गांधी से मांगी थी माफी

बाद में बुधवार रात गहलोत दिल्ली पहुंचे और गुरुवार दोपहर दस जनपथ पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। इस दौरान गहलोत ने रविवार को जयपुर में हुए घटनाक्रम पर माफी मांगी और कहा कि इस घटनाक्रम ने उनको पूरी तरह हिलाकर रख दिया है। उन्होंने घटना की खुद जिम्मेदारी ली और पार्टी के एक लाइन के प्रस्ताव को पास नहीं करा पाने के लिए खुद को सीधे जिम्मेदार बताया। गहलोत का कहना था कि वे सोनिया गांधी के आशीर्वाद से ही तीसरी बार मुख्यमंत्री बने थे।

तो क्या गहलोत जैसा दिखा रहे हैं वैसा है नहीं?

मगर ताजे हालात पर यह कहना ग़लत नहीं होगा कि रविवार को जयपुर में हुए घटनाक्रम पर अशोक‌ गहलोत चाहे कितना भी दुख प्रकट कर रहे हों , माफी मांग रहे हों, मगर सच्चाई इसके उलट लग रही है। इसका कारण यह है कि पहले भी यही माना गया था कि अशोक गहलोत के इशारे के बिना रविवार का घटनाक्रम हो ही नहीं सकता था। इस दौरान उनके तनोट माता जी के दर्शन करने चले जाना इस एपिसोड का एक प्री डिसाइडेड पार्ट था। अगर गहलोत को वास्तव में खुद की और अपनी पार्टी की इज्जत की चिंता है तो वह उनके समर्थक विधायकों और मंत्रियों पर इस्तीफे वापस लेने का दबाव क्यों नहीं डाल रहे हैं?

राजस्थान के सीएम पर सोनिया का फैसला आना बाकी

गहलोत के बाहर निकलने पर पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा था कि राजस्थान के मसले पर कांग्रेस अध्यक्ष एक-दो दिन बाद फैसला लेंगी। यानी अशोक गहलोत सीएम रहेंगे या नहीं, इस पर सोनिया गांधी का अंतिम निर्णय आज शनिवार को आ जाना चाहिए। गुरुवार शाम ही सचिन पायलट ने भी सोनिया गांधी से मुलाकात की थी और राजस्थान के घटनाक्रम से अवगत कराया था।

खड़गे के नॉमिनेशन के बाद जयपुर पहुंचे गहलोत

गहलोत शुक्रवार को भी दिल्ली में रहे और कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ नामांकन प्रक्रिया में शामिल हुए। शाम को वे वापस जयपुर लौट आए।

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