July 13, 2026

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विधानसभा घेरने जा रहे डॉक्टर्स को पुलिस ने पीटा, कपड़े फाड़े, रास्ते में रोक दिया

विधानसभा घेरने जा रहे डॉक्टर्स को पुलिस ने पीटा, कपड़े फाड़े, रास्ते में रोक दिया

एनसीआई@जयपुर

राज्य सरकार के ‘राइट टू हेल्थ’ बिल का विरोध कर रहे डॉक्टर्स को जयपुर में पुलिस ने जमकर पीटा। विधानसभा का घेराव करने निकले डॉक्टर्स को पुलिस ने पहले तो रोकने की कोशिश की। डॉक्टर्स बेकाबू हुए तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। कई प्रदर्शनकारियों के कपड़े तक फाड़ दिए। इसमें कई डॉक्टर्स लहूलुहान हो गए। पुलिस ने महिला डॉक्टर्स से भी बदसलूकी की।

रेजीडेंट्स ने भी कल से काम बंद करने की दी चेतावनी

जयपुर एसोसिएशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स (जार्ड) ने भी इस आंदोलन के समर्थन में कल से काम बंद करने का ऐलान किया है। जयपुर जार्ड अध्यक्ष डॉ. नीरज दामोर ने बताया कि जिस तरह आंदोलन के दौरान डॉक्टर्स पर लाठियां चलाकर उन्हे घायल किया उसका हम विरोध करते हैं। दामोर ने कहा कि अगर सरकार आज रात तक दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं करेगी तो 21 मार्च से हम भी अपना सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार करके इस आंदोलन को समर्थन देंगे।

2400 से ज्यादा प्राइवेट हॉस्पिटल वाले आंदोलन में शामिल
सोमवार को प्रदेशभर के 2400 से ज्यादा प्राइवेट हॉस्पिटल संचालक सड़कों पर उतरे। सबसे पहले डॉक्टर्स और हॉस्पिटल संचालक जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल परिसर में बने जयपुर मेडिकल एसोसिएशन के सभागार में जुटे। यहां उन्होंने बिल के विरोध में अपना-अपना तर्क रखा। डॉक्टर्स दोपहर करीब 12 बजे एसएमएस हॉस्पिटल से निकले। जेएलएन मार्ग होते हुए त्रिमूर्ति सर्किल गए। यहां से नारायण सिंह सर्किल होते हुए सेन्ट्रल पार्क के सामने से स्टेच्यू सर्किल पहुंचे।

स्टेच्यू सर्किल पर पुलिस से झड़प

पुलिस ने सभी को करीब 1 बजे स्टेच्यू सर्किल के पास रोक लिया। डॉक्टर और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की होने लगी। सभी डॉक्टर्स स्टेच्यू सर्किल पर ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और पुलिस से झड़प हो गई। आरोप है कि पुलिस ने पुरुष डॉक्टर्स के साथ ही महिला डॉक्टर्स के साथ मारपीट की और उनके कपड़े फाड़ दिए।

इधर, कुछ दिन पहले इस बिल का समर्थन करने वाली जॉइंट एक्शन कमेटी भी अब वापस बिल के विरोध में उतर गई है। इस कमेटी का गठन डॉक्टरों की यूनियन ने ही किया था।

सेक्रेटरी का आरोप- पुलिस वालों ने खींचकर नीचे गिरा दिया

 

प्राइवेट हॉस्पिटल और नर्सिग सोसायटी के सेक्रेटरी डॉक्टर विजय कपूर ने बताया- हम सभी आगे थे। पुलिस वालों ने अचानक खींचकर नीचे गिरा दिया। दो तीन लाठियां मारने के बाद भगदड़ मच गई। हम नीचे गिर गए। उसके बाद का कुछ पता नहीं चला। सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो जो करना पड़ेगा करेंगे।

एक दूसरे डॉक्टर ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान सेक्रेटरी सबसे आगे चल रहे थे। अचानक कुछ पुलिस वालों ने सेक्रेटरी पर डंडे बरसाने शुरू कर दिए। किसी ने ध्यान नहीं दिया कि ये नीचे गिरे हुए हैं। हमारी ही भीड़ आगे बढ़ रही थी। पुलिस ने हमारी कोई मदद नहीं की।

सरकार पर शर्ते और सुझाव न मानने का आरोप

15 मार्च को विधानसभा में प्रवर समिति के साथ हुई बैठक के बाद जॉइंट एक्शन कमेटी ने बिल को पास किए जाने का समर्थन किया था। समिति के चेयरमैन डॉक्टर सुनील चुघ का कहना था कि सरकार ने कमेटी के सभी आपत्तियों और सुझावों को मानते हुए बिल में इसे शामिल कर लिया है। इसका विरोध करने का अब कोई औचित्य नहीं है। एक गुट इस बिल का लगातार विरोध कर रहा था। आंदोलन वापस बड़ा हो गया तो कमेटी के दूसरे सदस्य भी बिल के विरोध में आ गए। उनका आरोप है कि सरकार ने उनकी शर्तों और सुझावों को बिल में शामिल नहीं किया। वे इसे अब पास करने जा रही है।

उधर, विधानसभा में डॉक्टरों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार शाम करीब 4 बजे स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा से मिला। इसमें डॉ. विजय कपूर, डॉ. राकेश कालरा, डॉ. विजय पाल यादव, डॉ. कमल सैनी, डॉ. सुनील गर्सा शामिल थे। डॉक्टर्स बिल वापस लेने की बात कहकर लौट आए। अब सभी ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। स्टेच्यू सर्किल पर डॉक्टर्स अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं।

राइट टू हेल्थ में यह सब कवर होगा

•राइट टू हेल्थ में बायो-टेरोरिज्म (जैव आतंकवाद), बायो टेक्नोलॉजी, नेचुरल बायोलॉजिकल खराबी पैदा करने वाले या बायोलॉजिकल वेपन, बेक्टीरिया, वायरस, जहरीले तत्व, बायो प्रोडक्ट्स से होने वाले नुकसान भी कवर होंगे।

•केमिकल अटेक, नेचुरल हॉरर (प्राकृतिक विभीषिका), परमाणु हमला या दुर्घटना, प्रभावित आबादी की बड़ी तादाद में मौत, जनहानि, प्रभावित आबादी पर लम्बे समय के लिए प्रभाव या गम्भीर रूप से अक्षम होने, वायरल या जहरीले तत्वों, गैसों का फैलना और उससे होने वाले जोखिम शामिल किए गए हैं।

•एपिडेमिक यानी महामारी के दौरान राइट टू हेल्थ प्रदेश के लोगों के स्वास्थ्य को इलाज का सुरक्षा कवच देगा।

•मेडिकल एंड हेल्थ के किसी भी मेथड (पद्धति) में रिप्रोडक्टिव हेल्थ, इमरजेंसी मेडिकल ट्रीटमेंट, डायग्नोसिस, नर्सिंग, रिहेबिलिटेशन, हेल्थ रिकवरी, रिसर्च, जांच, उपचार, प्रोसीजर्स और अन्य सर्विसेज इसमें शामिल हैं।

•सभी तरह के गवर्नमेंट और प्राइवेट इंस्टीट्यूट, फेसिलिटी, बिल्डिंग, जगह या उसका पार्ट इसमें शामिल हैं।

•इनडोर, आउटडोर यूनिट्स, सरकारी या प्राइवेट स्वामित्व से चलाए जा रहे संस्थान, फंडेड और कंट्रोल्ड इंस्टीट्यूट्स इसमें शामिल होंगे।

•हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर में हेल्थ साइंस डॉक्टर्स, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ, सोशल वर्कर्स, स्पेशियलाइज्ड हेल्थ प्रोवाइडर, नर्सिंग, रिहेब, हेल्थ रिकवरी, ट्रीटमेंट और दूसरी स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।

•लॉ, पॉलिसी, प्रोग्राम, प्रोजेक्ट, टेक्नोलॉजी, नुकसान पहुंचाने वाली एक्टिविटीज की पहचान करने, प्रीडिक्शन करने, एनालिसिस और इवेल्यूएशन (मूल्यांकन) करना, संभावित प्रभावों को कम करने के लिए प्रोसीजर, मेथड्स और साधनों का कॉर्डिनेशन इसमें शामिल रहेगा।

•इलाज के खर्चे, जोखिम, फायदों, विकल्पों को भी इसमें शामिल किया गया है।

राइट टू हेल्थ में लोगों को यह मिलेगा

•राइट टू हेल्थ में राजस्थान के हर व्यक्ति को बीमारी का डायग्नोसिस, जांच, इलाज, भावी रिजल्ट और सम्भावित जटिलताओं और एक्सपेक्टेड खर्चों के बारे में अच्छी तरह जानकारी मिल सकेगी।

•एक्ट के तहत बनाए गए रूल्स के जरिए आउट डोर पेशेंट्स (OPD), इनडोर भर्ती पेशेंट्स, डॉक्टर को दिखाना और परामर्श, दवाइयां, डायग्नोसिस, इमरजेंसी ट्रांसपोर्टेशन यानी एम्बुलेंस सुविधा, प्रोसीजर और सर्विसेज, इमरजेंसी ट्रीटमेंट मिलेगा।

•मरीज को बीमारी की नेचर, कारण, वास्तविक जांच, केयर, इलाज और रिजल्ट, सम्भावित जटिलताओं और एक्सपेक्टेड खर्चों के बारे में पूरी जानकारी मिल सकेगी।

•मरीजों को सभी पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूट्स की ओर से उनके मेडिकल केयर लेवल के अनुसार फ्री ट्रीटमेंट दिया जाएगा।

•फीस या चार्ज के एडवांस पेमेंट के बिना इमरजेंसी कंडीशन के दौरान बिना देरी किए प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर जरूरी इमरजेंसी ट्रीटमेंट फैसिलिटी और इंटेंसिव केयर, इमरजेंसी डिलीवरी और ट्रीटमेंट देंगे।

•कोई मेडिको-लीगल मामला है, तो हेल्थ केयर प्रोवाइ़डर केवल पुलिस की एनओसी या पुलिस रिपोर्ट मिलने के आधार पर इलाज में देरी नहीं करेगा।

•मरीज को डॉक्यूमेंट, जांच रिपोर्ट, इलाज के डिटेल और पार्टिकुलर वाइज बिलों तक पहुंच होगी।

•सर्जरी, कीमोथैरेपी की पहले से ही सूचना देकर मरीज या उसके परिजनों से सहमति लेनी होगी।

•इलाज के दौरान सीक्रेसी, मानव गरिमा और गोपनीयता का ख्याल रखा जाएगा।

•किसी मेल वर्कर की ओर से महिला पेशेंट के फिजिकल टेस्ट के दौरान महिला की उपस्थिति जरूरी होगी।

•उपलब्ध ऑप्शनल ट्रीटमेंट मेथड का सलेक्शन मरीज कर सकेगा।

•हर तरह की सर्विस और फेसिलिटी की रेट और टेक्स के बारे में सूचना पाने का हक मिलेगा।

•ट्रीटमेंट के दौरान दवा लेने और जांच के सोर्सेस का सलेक्शन किया जा सकेगा।

•हेल्थ की कंडीशन के बारे में मरीज को एजुकेट किया जाएगा।

•सभी गवर्नमेंट और प्राइवेट मेडिकल इंस्टीट्यूट से रेफरल ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा मिलेगी।

•डॉक्टर की सलाह के खिलाफ जाकर हॉस्पिटल या ट्रीटमेंट सेंटर छोड़ने वाले मरीज के मामले में इलाज का ब्योरा प्राप्त किया जा सकेगा।

•रोड एक्सीडेंट्स में फ्री ट्रांसपोर्टेशन, फ्री ट्रीटमेंट औरर फ्री इंश्योरेंस कवर इस्तेमाल होगा।

•सेकेंड ओपिनियन लेने के लिए पहले से ट्रीटमेंट करने वाले हेल्थ प्रोवाइडर से ट्रीटमेंट डिटेल और इन्फॉर्मेशन लेने का अधिकार मिलेगा।

•राजस्थान सरकार बाउंड होगी कि राइट टू हेल्थ के लिए बजट में उचित प्रोविजन करे।

•सरकार ट्रीटमेंट क्वालिटी और सेफ्टी मेजरमेंट्स और नॉर्म्स शामिल करेगी।

•गारंटीड सर्विसेज से कोई भी डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तौर पर इनकार नहीं किया जा सकेगा।

•पोषण (न्यूट्रिशियन) के लिए पर्याप्त और सुरक्षित खाना देने, सेफ पीने के पानी की व्यवस्था, हाईजीन के लिए सरकारी डिपार्टमेंट्स के बीच कॉर्डिनेशन किया जाएगा।

शिकायत निवारण सिस्टम डेवलप होगा

•एक्ट शुरू होने की तारीख से 6 महीने के अंदर सरकार कम्प्लेंट रिड्रेसल सिस्टम क्रिएट करेगी।

•वेब पोर्टल, सहायता केंद्र शिकायतों को 24 घंटे के अंदर सम्बन्धित अधिकारी या ऑब्जर्वर को भेजेगा।

•सम्बन्धित अधिकारी अगले 24 घंटे के अंदर शिकायत करने वाले को जवाब देगा।

•अगर 24 घंटे में शिकायत का सॉल्यूशन अधिकारी नहीं करता है तो वह शिकायत डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी को तुरंत फॉरवर्ड की जाएगी।

•डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी शिकायत मिलने के 30 दिन में उचित कार्रवाई करेगी और उसकी रिपोर्ट वेब पोर्टल पर अपलोड करेगी। शिकायतकर्ता को भी सूचना दी जाएगी। शिकायतकर्ता को बुलाकर सॉल्यूशन की कोशिश भी की जाएगी।

•डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी की ओर से 30 दिन में सॉल्यूशन नहीं होने पर शिकायत को स्टेट हेल्थ अथॉरिटी को फॉरवर्ड किया जाएगा।

स्टेट हेल्थ अथॉरिटी बनेगी

•राजस्थान में स्टेट हेल्थ अथॉरिटी बनेगी। जिसमें जॉइंट सेक्रेटरी या उससे ऊपर रेंक का आईएएस अधिकारी अध्यक्ष होगा। हेल्थ डायरेक्टर मेम्बर्स सेक्रेटरी होंगे, जबकि मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर, राजस्थान स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस एजेंसी के जॉइंट सीईओ, आयुर्वेद डायरेक्टर, होम्योपैथी डायरेक्टर व यूनानी डायरेक्टर पदेन सदस्य होंगे। सरकार की ओर से नॉमिनेटेड दो लोग जिन्हें पब्लिक हेल्थ और हॉस्पिटल मैनेजमेंट की नॉलेज हो, वह मेम्बर होंगे। पदेन सदस्य के अलावा सभी मेम्बर्स की नियुक्ति 3 साल के लिए होगी। 6 महीने में कम से कम एक बार हेल्थ अथॉरिटी की बैठक होगी। साल में 2 बार बैठक करनी होगी।

हर जिले में डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी बनेगी

राजस्थान के सभी जिलों में डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी भी बनाई जाएगी। स्टेट हेल्थ अथॉरिटी बनने की तारीख से 1 महीने के अंदर डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अथॉरिटी की ऑटोनॉमस बॉडी बनाई जाएगी। इसमें जिला कलक्टर पदेन अध्यक्ष होगा। जिला परिषद सीईओ पदेन सह अध्यक्ष होगा। डिप्टी सीएमएचओ पदेन सदस्य, जिला आयुर्वेद अधिकारी और पीएचईडी के एसई पदेन सदस्य होंगे। राज्य सरकार करी ओर से नॉमिनेटेड दो मेंबर सदस्य होंगे। जिला परिषद का प्रमुख इसका सदस्य होगा। साथ ही पंचायत समितियों के 3 प्रधान सदस्य होंगे। पदेन मेंबर्स के अलावा सभी सदस्यों की नियुक्ति 3 महीने के लिए होगी।

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