July 13, 2026

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गहलोत ने कहा-हमारे एमएलए खुद ही कह रहे हैं कि वह नहीं जीत पा रहे हैं

गहलोत ने कहा-हमारे एमएलए खुद ही कह रहे हैं कि वह नहीं जीत पा रहे हैं

जयपुर में यूथ कांग्रेस की बैठक को सम्बोधित करते हुए सीएम अशोक गहलोत ने विधानसभा चुनाव के दो महीने पहले टिकट फाइनल कर देने की आवश्यकता जताई।

एनसीआई@जयपुर

अब राजस्थान की राजनीति में विधानसभा चुनाव ही सबसे बड़ा मुद्दा है। कांग्रेस पार्टी वाली सरकार की कमान सीएम अशोक गहलोत के हाथों में है। वह आज गुरुवार (15 जून) को यूथ कांग्रेस की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। इसमें उन्होंने यह बड़ी बात कही कि, हमारे एमएलए खुद ही कर रहे हैं कि मैं नहीं जीत पा रहा हूं। टिकट का बंटवारा चुनाव से दो महीने पहले फाइनल हो जाना चाहिए।

सीएम ने आगे कहा, चुनावी साल में टिकट में देरी होने पर नेता और कार्यकर्ताओं को दिल्ली का चक्कर लगाना पड़ता है, इससे यह थक जाता है। नेता भी थक जाते हैं और कार्यकर्ता भी थक जाते हैं। तब जाकर टिकट मिलता है। अब थका हुआ क्या काम करेगा। दो महीने पहले टिकट मिलना तय हो जाए। सीएम गहलोत की इस बात पर खूब तालियां बजीं।

विधायकों के बारे में कही यह बात…

सीएम अशोक गहलोत ने यहां अपने सम्बोधन में आगे कहा कि, 100 सीटें तो वैसे ही हम लोग हारे हुए हैं, वो खाली पड़ी हैं। ऐसी स्थिति कभी-कभी आ जाती है कि हमारे एमएलए खुद ही कर रहे हैं कि मैं नहीं जीत पा रहा हूं। ऐसी स्थिति में हम उनसे पूछेंगे कि बताओ किसको मौका देना चाहते हो।

गहलोत ने कहा- यूथ कांग्रेस के नेताओं को चाहिए कि अभी से प्रयास शुरू कर दें। मैं इसके खिलाफ हूं कि चुनाव में जब टिकट तय करने बोर्ड बैठता है तो अध्यक्ष भी पर्ची भेजते हैं। कोशिश करते हैं कि यूथ कांग्रेस को 10-12 टिकट मिलें, उसमें दो चार को मिलता है या नहीं मिलता है, वह नहीं होना चाहिए। हमने प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा को भी कहा है, दो महीने पहले टिकट तय हो जाएं। जिन्हें टिकट मिलना है, वह दो महीने पहले ही तय हो जाएं।

जो कुछ भी आपको फीडबैक मिले, जो एजेंसियां बनी हैं, सुनील करके कोई हैं जो एआईसीसी की तरफ से सर्वे कर रहे हैं, उनसे आप बात कर लीजिए। हम भी बात करेंगे।

राहुल गांधी ने मुझसे कहा कि…’

अपने इस सम्बोधन में गहलोत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “दिल्ली में राहुल गांधी ने मुझसे कहा कि सिर्फ अच्छा काम करने से नहीं होगा, हमारा कैसा व्यवहार है और क्या जीतने की क्षमता हमारी वहां है?”

‘जो दिल पर पत्थर रखकर राजनीति कर लेगा वो…’

इसके साथ ही सीएम ने वहां मौजूद यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को भविष्य के लिए एक नसीहत भी दे डाली। सीएम ने कहा, “जिंदगी में अगर आगे बढ़ना है तो एक बात याद रखना…जब हाईकमान का फैसला हो जाता है तो दुख तो होता है कि टिकट नहीं मिला या इच्छा पूरी नहीं हुई। उस वक्त अगर दिल पर पत्थर रखकर…दिल बहुत कोमल होता है…जो उस पर पत्थर रखकर राजनीति कर लेगा वह कामयाब होगा।”

कांग्रेस और यूथ कांग्रेस के बीच दूरी बना दी गई थी

यूथ कांग्रेस की बैठक में गहलोत ने कहा कि एक वक्त ऐसा आया जब कांग्रेस और यूथ कांग्रेस के बीच दूरी बन गई। दूरी बन गई या बना दी गई, लेकिन वह प्रयोग बहुत गलत साबित हुआ। हम जब यूथ कांग्रेस में थे तो केंद्रीय मंत्री हमारी मीटिंग में आते थे। शाम को वह डिनर देते थे। कभी-कभी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी आती थीं। यह एक तरह का मोटिवेशन होता था। आप तो राहुल गांधी से बात करें, आप दिमाग में रखें बड़े नेताओं को बैठक में बुलाएं। एक वक्त ऐसा आया था कि दूरियां बढ़ गईं। आज मैं देखता हूं कि वापस सम्बन्ध बने हैं।

हमारे नेतृत्व के सामने बीजेपी का नेतृत्व नहीं टिक रहा

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा- हमारे नेतृत्व के सामने प्रदेश में बीजेपी का नेतृत्व कहीं टिक ही नहीं रहा है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष के पास विधायक बनने के लिए सीट नहीं है। नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ चूरू से हमारी गलती की वजह से जीतकर आ गए, इस बार वे चूरू से दूसरी सीट तलाश रहे हैं। चार महीने का मौका है। हमारी सरकार की योजनाएं शानदार हैं। इस बार सरकार रिपीट होगी।

उन्होंने कहा- मनोनीत होने और चुनाव जीतने में बहुत फर्क होता है। एमएलए-एमपी जीतकर आते हैं तो आप उनके तेवर देखो, आपके भी कम नहीं है। चुनाव जीतकर आने वाले नेता की अलग फीलिंग होती हैं। युवाओं को एडजस्ट करने का बहुत प्रयास किया है। आगे हम और युवाओं को भी पद देंगे।

कई नेता रास्ता भटक गए, बीजेपी के चरण छूने लगे

डोटासरा ने कहा- मेरे जिले से तो यूथ कांग्रेस के कई जिलाध्यक्ष और पदाधिकारी बने हैं, उनमें अलग ही फीलिंग होती थी कि हम जीतकर आए हैं। यह अलग बात है कि कुछ लोग कुर्सी के लिए इधर-उधर भटक गए। कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी ने मौका दिया था आगे बढ़ने का, आप चुनाव लड़कर जिलाध्यक्ष से लेकर प्रदेशाध्यक्ष बने। इसके बावजूद भी आदमी संतुष्ट नहीं हो और बीजेपी में जाकर चरण छूने लग जाए तो अलग बात है। कांग्रेस ने मेरे जैसे व्यक्ति को जिसका कोई सियासी बैकग्राउंड नहीं था, मेरे पिताजी शिक्षक थे, मुझे प्रदेशाध्यक्ष जैसे पद पर बैठाया।

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