रंधावा ने कहा-पायलट की ज्यादातर मांगें मान लीं, बिना पद भी बड़ा नाम है, गुढ़ा के बयान पर प्रतिक्रिया दी-उन्हें खुलासा कर देना चाहिए
एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क
राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि राजेन्द्र सिंह गुढ़ा ने बड़ा खुलासा आज तक क्यों नहीं किया? उन्हें खुलासा कर देना चाहिए, मन में नहीं रखना चाहिए। जो मन में बात रखता है। वह सेहत के लिए भी खराब होती है। कांग्रेस पार्टी बीजेपी जैसी नहीं है कि किसी को बोलने ही नहीं दे।
एक अखबार को दिए इंटरव्यू में रंधावा ने यह प्रतिक्रिया व्यक्त की। इसमें उन्होंने कहा- सचिन पायलट का बिना पद के भी उससे ज्यादा नाम है। इनके पिताजी कांग्रेस के बड़े लीडर रहे। सचिन पायलट की स्वीकार्यता है। उनका जनाधार है। आज तक सचिन पायलट ने कभी नहीं कहा कि मैं पार्टी छोडूंगा। पार्टी लाइन से परे जाकर कभी ऐसी बात नहीं कही।

अखबार के रिपोर्टर ने जब सवाल उठाया कि राजेन्द्र सिंह गुढ़ा सवाल तो लम्बे समय से उठा रहे थे, मगर विधानसभा में दिए बयान के बाद ही कार्रवाई क्यों की गई? इस पर रंधावा बोले-मणिपुर जैसी शर्मनाक घटना पर उनका रुख पार्टी के स्टेंड के खिलाफ था। ऐसे गम्भीर मुद्दे पर अगर मंत्री उठ कर यह कहे कि मणिपुर की जगह सरकार गिरेबां में झांके तो उस पर एक्शन लेना ही था। मणिपुर की घटना पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी के स्टेंड के खिलाफ बात की। दूसरी-तीसरी पार्टी से जो आए हैं वे ही यह बात कह सकते हैं। कांग्रेसी ऐसी बात नहीं करता जो देश के हित में ना हो। जिस घटना से पूरा देश शर्मसार हो रहा हो उस बात पर कोई मंत्री उसे डायवर्ट करने का प्रयास करे तो सहन नहीं किया जा सकता।
दिव्या मदेरणा के बारे में पूछे गए इस सवाल पर कि विपक्ष कह रहा है अब अगला नंबर उनका है। उन्होंने भी कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाया था। वे आपसे मिली भी हैं, क्या उनके खिलाफ भी एक्शन लेंगे? इस पर रंधावा ने कहा- दिव्या मदेरणा ने पार्टी के खिलाफ बात नहीं की। उनके इलाके में कुछ लोगों के मर्डर हो गए थे। उसके बारे में बात की थी। मर्डर के आरोपियों को पकड़ भी लिया। मेरे एरिया में भी ऐसा होता है तो हम भी खड़े होते हैं। दिव्या ने कभी पार्टी के खिलाफ बात नहीं की। नुकसान वाली बात नहीं की। उन्होंने कहा- मैं पार्टी के साथ हूं और पार्टी के साथ ही रहूंगी। मदेरणा परिवार हमेशा कांग्रेस के साथ रहा है।
अगले सवाल में जब रंधावा से पूछा गया कि राजेन्द्र गुढ़ा को मंत्री पद से बर्खास्त करने के बाद अब आगे क्या होगा, क्या बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक उनके समर्थन में आ सकते हैं, क्या उनके टिकट कट सकते हैं? इस पर वे बोले- बसपा से आने वाले सभी विधायक कांग्रेस के विधायक हैं। मैं नहीं समझता कि एक आदमी ऐसी बात करता है तो बाकी उसके पीछे जाएंगे, बिल्कुल ऐसा नहीं करेंगे। बसपा मूल के विधायक मुझसे मिलते हैं, अपनी डिमांड रखते हैं, कांग्रेस की बात करते हैं। दो दिन पहले ही कुछ विधायक मुझसे मिलकर गए थे। सभी मेरे सम्पर्क में हैं और कांग्रेस के साथ हैं।
राजेन्द्र गुढ़ा मामले में अब आगे क्या होगा, उन्होंने सोमवार को विधानसभा में बड़ा खुलासा करने की घोषणा की है? इस प्रश्न पर रंधावा का कहना था कि- खुलासा करने का सवाल है तो वह खुलासा आज तक क्यों नहीं किया? खुलासा कर देना चाहिए, मन में नहीं रखना चाहिए। जो मन में बात रखता है वह सेहत के लिए भी खराब होती है।
कांग्रेस पार्टी बीजेपी जैसी नहीं है कि किसी को बोलने ही नहीं दे। कांग्रेस पार्टी में रहकर पार्टी प्लेटफार्म पर राजेन्द्र जी को भी चाहिए था कि सीएम के साथ बात करते। उन्हें पहले सीएम से बात कहनी चाहिए थी। सीएम नहीं सुनते तो मुझसे कहते। मुझसे आकर बात करते। अगर मैं बात नहीं करता तो फिर वह असेम्बली में बोलते, वार रूम के बाहर खड़े होकर बोलना चाहिए था।
यह पूछने पर कि राजेंद्र गुढ़ा के साथ सचिन पायलट को लेकर भी चर्चाएं हैं, पायलट को अब तक कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली है, उनके समर्थक कह रहे हैं कि बिना पद उनसे कितना काम और करवाएंगे?
रंधावा ने जवाब दिया-सचिन पायलट का बिना पद के भी उससे ज्यादा नाम है। इनके पिताजी कांग्रेस के बड़े लीडर रहे। सचिन पायलट की स्वीकार्यता है, उनका जनाधार है। आज तक सचिन पायलट ने कभी नहीं कहा कि मैं पार्टी छोडूंगा, पार्टी लाइन से परे जाकर कभी ऐसी बात नहीं की। उन्होंने हमेशा पार्टी का हित सोचा है।
रंधावा से पूछा गया-पायलट को क्या पद देने की पेशकश हुई है, कोई तो आश्वासन दिया ही होगा, इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस पर जवाब मिला-सचिन पायलट की ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं। पेपर लीक करने वालों को उम्रकैद की सजा का बिल भी आ गया है। उसमें मेक्सिमम सजा उम्रकैद कर दी है और उनकी जो बातें थीं, उन्हें काफी हद तक हमने पूरा कर दिया है। जो रह गईं, वह भी करेंगे। पायलट सात साल तक पीसीसी के प्रेसिडेंट रहे हैं। वे राहुल गांधी के नजदीक हैं, मेरे भी नजदीक हैं, सीएम साहब के भी नजदीक हैं। दोनों ने साथ चुनाव लड़ा था। मनमुटाव तो आ जाते हैं। दो आदमी साथ हैं तो सगे भाइयों में भी मनमुटाव हो जाता है। छोटी-मोटी बातें हम सॉल्व कर लेंगे। जिस तरीके से सचिन जी ने बात की कि पास्ट भूल जाओ, प्रजेंट भी भूल जाओ, फ्यूचर की बात कहो। इससे ज्यादा क्लेरिफिकेशन न मैं दे सकता हूं न वह दे सकते हैं।
विधानसभा चुनाव के लिए टिकट बांटने के पैरामीटर्स के बारे में पूछे गए सवाल पर रंधावा ने कहा- सितम्बर तक टिकट फाइनल कर देने चाहिए। इस मामले में राहुल गांधी और खड़गे साहब के साथ बैठक के दौरान भी चर्चाएं हुई थीं। यह जल्द हो जाना चाहिए, हम करेंगे और मेक्सिमम कर देंगे। टिकट बांटने का फॉर्मूला विनेबिलिटी होगा। यह नहीं होगा इसे दे दो, उसको दे दो। टिकट देते वक्त विनेबिलिटी का ध्यान रखा जाएगा, यही सबसे बड़ा चैलेंज है।
सवाल: तीन और दो बार हारने वाली सीटों पर क्या रणनीति है? क्या दो से तीन बार हारे हुए नेताओं को भी टिकट मिलेंगे?
राजस्थान में सत्ता रिपीट नहीं होने की परिपाटी पर रंधावा ने कहा-हमारी सरकार ने जो काम किए हैं उन काम को लेकर हम जनता के बीच में जाएंगे। हमारी शानदार योजनाएं ही हमारी जीत का आधार बनेंगी। विपक्ष बात करता है, उनकी 5 साल सरकार थी, उन्होंने क्यों नहीं ऐसी योजनाएं बनाईं? वह कर देना चाहिए था, उनको नहीं मालूम था कि हम करते हैं, हमने काम तो किया है।
जब पूछा गया कि विधानसभा चुनावों में चेहरा कौन होगा, कांग्रेस अगर जीत जाती है तो सीएम कौन बनेगा? इस पर रंधावा ने कहा-यह तो हाईकमान तय करेगा। कांग्रेस कभी चेहरा घोषित करके चुनाव नहीं लड़ती। सामूहिक नेतृत्व में हमेशा से ही चुनाव लड़ती आई है। हमने पहले कभी कहा ही नहीं कि कौन सीएम बनेगा। विधायक मिलकर ही अपना नेता तय करते हैं।
