टिकट नहीं मिलने से नाराज प्रह्लाद गुंजल ने छोड़ा ‘मोदी का परिवार’, लिखा-‘याचना नहीं, अब रण होगा’, कांग्रेस में होंगे शामिल
एनसीआई@कोटा
कोटा उत्तर से विधायक रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रहलाद गुंजल एक-दो दिन में ही कांग्रेस जॉइन कर सकते हैं। बुधवार को उनके इस बात की घोषणा कर देने की सम्भावना है। कयास है कि 63 वर्षीय गुंजल कोटा लोकसभा सीट पर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। वह इसे लेकर कांग्रेस के बड़े नेताओं के सम्पर्क में हैं। उनके साथ कोटा के ही कुछ अन्य भाजपा नेता और कार्यकर्ता भी कांग्रेस जॉइन कर सकते हैं।
इधर कांग्रेस में जाने की अटकलों के बीच गुंजल ने अपने X अकाउंट से ‘मोदी का परिवार’ को हटा दिया। साथ ही प्रख्यात कवि रामधारी सिंह दिनकर की एक प्रसिद्ध कविता….’याचना नहीं अब रण होगा…को पूरा लिखा। इस कविता के तेवर भी गुंजल के बगावती होने के संकेत दे रहे।

ऐसे शुरू हुई थी नाराजगी
लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की जारी हुई पहली लिस्ट के बाद से ही प्रहलाद गुंजल अपनी पार्टी से नाराज चल रहे थे। इसके बाद से ही उनके कांग्रेस में जाने की अटकलें लगना शुरू हो गईं थीं। हालांकि जब यह चर्चाएं गर्म हुईं तो गुंजल ने कुछ दिन पहले इस बात का गोलमोल भाषा में खंडन किया था। उन्होंने अभी कहीं नहीं जाने की बात कहते हुए कहा था कि ‘अभी तो’ मैं भाजपा में ही हूं। आगे क्या होगा, कह नहीं सकता। साथ ही यह भी कहा था कि अगर ऐसा होगा, तो सबको पता चल जाएगा। अब गुंजल के खास व्यक्तियों ने ही दावा किया है कि उनकी कांग्रेस के उच्च स्तरीय नेताओं से बात हो चुकी है।
धारीवाल के सामने लड़ा था चुनाव
विधानसभा चुनाव में गुंजल ने कोटा उत्तर से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उनके सामने कांग्रेस के शांति धारीवाल थे। हालांकि, गुंजल 2000 से ज्यादा वोटों से चुनाव हार गए थे। विधानसभा चुनाव के दौरान जब बीजेपी की टिकट की घोषणा हुई थी तो शुरुआती लिस्ट में प्रहलाद गुंजल का नाम नहीं आया था। इस मामले में आलाकमान की समझाइश पर प्रहलाद गुंजल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिले थे। इसके बाद भाजपा की लिस्ट में उनका नाम आया था, अर्थात उन्हें टिकट मिल गया था। हालांकि, जब वह चुनाव हारे तो इसके बाद कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के नेताओं पर ही चुनाव हरवाने का आरोप लगाया था।
गुंजल पर एक नजर
63 वर्षीय प्रहलाद गुंजल ग्रेजुएट हैं। ओमकार राजनीतिक सफर कॉलेज से ही शुरू हो गया था। 1989-1991 के दौरान वह कोटा राजकीय महाविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। शुरू से ही वह बीजेपी में शामिल रहे। उन्होंने वर्ष 2013 में कोटा उत्तर से चुनाव लड़ा। यहां कांग्रेस के दिग्गज नेता शांति धारीवाल को हराकर विधायक बने। मगर अगली बार वर्ष 2018 के विधान सभा चुनाव में गुंजल शांति धारीवाल से हार गए । गुंजल ने गुर्जर आंदोलन के समय वसुंधरा राजे की पहली सरकार से नाराज होकर 2003 में बीजेपी छोड़ दी थी।ववे लम्बे समय तक भाजपा से नाराज रहे। इस दौरान लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी से चुनाव भी लड़ा। बाद में वसुंधरा से सुलह के बाद वे वर्ष 2013 में वापस बीजेपी में आ गए। इसके बाद एक जमाने में राजे के धुर विरोधी रहे गुंजल उनके कट्टर समर्थक बन गए थे।
गुर्जर समाज पर अच्छा खासा प्रभाव
उल्लेखनीय है कि प्रहलाद गुंजल गुर्जर समाज से हैं। इसके चलते उनका गुर्जर समाज के मतदाताओं पर अच्छा खासा प्रभाव है। गुर्जर समाज के लोग इनको काफी मानते हैं। कोटा संसदीय क्षेत्र में गुर्जर मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है। इसलिए अगर प्रहलाद गुंजल को कांग्रेस टिकट दे देती है तो बीजेपी को इसका काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। यही नहीं राजस्थान की अन्य गुर्जर बहुत सीटों पर भी इसका असर पड़ना तय है। कोटा लोकसभा सीट से वर्तमान सांसद एवं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ही इस बार फिर उम्मीदवार हैं।
यह भी है खास बात
यह अलग बात है कि कोटा की राजनीति में वे अपनी ही पार्टी बीजेपी के दिग्गज नेता, वर्तमान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अलावा कांग्रेस के दिग्गज शांति धारीवाल के विरोधी रहे हैं।
