April 17, 2026

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कोटा दक्षिण नगर निगम में मेयर और नेता प्रतिपक्ष एक ही पार्टी के, मेयर के बीजेपी ज्वॉइन करने से बने यह हालत, डीएलबी से मांगी सलाह

कोटा दक्षिण नगर निगम में  मेयर और नेता प्रतिपक्ष एक ही पार्टी के, मेयर के बीजेपी ज्वॉइन करने से बने यह हालत, डीएलबी से मांगी सलाह

एनसीआई@कोटा

कोटा दक्षिण नगर निगम में वर्तमान में बेहद असमंजस के हालात बने हुए हैं। वह इसलिए कि यहां मेयर और नेता प्रतिपक्ष दोनों बीजेपी के ही हैं, जबकि ऐसा नहीं हो सकता है। नेता प्रतिपक्ष सत्ताधारी पार्टी की विरोधी पार्टी का सदस्य ही बन सकता है। इस प्रकार कोटा दक्षिण नगर निगम ही प्रदेश में एक मात्र ऐसी नगर निगम बन गई है, जहां नेता प्रतिपक्ष भी निगम की वर्तमान सत्ताधारी पार्टी का है। ‌

दरअसल, कोटा दक्षिण नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड था। मेयर तत्कालीन स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल खेमे के राजीव अग्रवाल चुने गए थे। मगर हाल में बदले राजनीतिक परिदृश्य के बाद राजीव अग्रवाल ने बीजेपी ज्वॉइन कर ली। यहां पहले से ही भाजपा नेता विवेक राजवंशी नेता प्रतिपक्ष हैं।

ऐसे में निगम के बोर्ड की वैधानिकता के सम्बन्ध में अब निगम के अधिकारी डीएलबी से मार्गदर्शन मांग रहे हैं। इस सम्बन्ध में दक्षिण नगर निगम की आयुक्त सरिता ने डीएलबी डायरेक्टर को पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि दक्षिण नगर निगम में कांग्रेस का निर्वाचित बोर्ड है। वहीं मेयर राजीव अग्रवाल, उप महापौर पवन मीणा व नेता प्रतिपक्ष विवेक राजवंशी बीजेपी के हैं। बोर्ड गठन के समय कांग्रेस के अभ्यर्थी राजीव अग्रवाल को 41 एवं भारतीय जनता पार्टी के अभ्यर्थी विवेक राजवंशी को 39 मत मिले थे। बहुमत के आधार पर नगर निगम कोटा दक्षिण में कांग्रेस का बोर्ड बना। 30 मार्च 2024 को महापौर राजीव अग्रवाल कांग्रेस पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। इससे पहले कुछ कांग्रेस पार्टी के पार्षदों ने भी भाजपा ज्वॉइन की थी। अब दल-बदल के बाद निगम दक्षिण में बीजेपी के पार्षद 44, कांग्रेस के 35 और एक निर्दलीय पार्षद हो गए हैं।

पत्र में आगे कहा गया है कि, राजीव अग्रवाल ने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। इस मामले में निगम अधिकारियों ने डीएलबी से इस मामले में राय मांगी है। पूछा है कि अब आगे किस तरह से प्रक्रिया की जाए। गौरतलब है कि मेयर अग्रवाल भाजपा में शामिल हुए थे, उसी दिन से सवाल उठ रहा है कि अब दक्षिण नगर निगम में बोर्ड किसका कहलाएगा? निगम के कानूनी जानकारों ने भी इस पर सवाल उठाए थे। ऐसे में अब मेयर के चुनाव फिर से हों या फिर बोर्ड गिराकर नया बोर्ड बनाया जाए। हालांकि, निगम सूत्रों के अनुसार वर्तमान में लोकसभा चुनाव से पहले निगम में कोई फेरबदल नहीं होने वाला है। चुनाव के तुरंत बाद निगम में बड़ा बदलाव होगा।

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