अवैध धर्मांतरण मामला: मौलाना कलीम सिद्दीकी व उमर गौतम सहित 12 दोषियों को उम्रकैद, 4 को 10 साल का कारावास
एनसीआई@लखनऊ
अवैध धर्मांतरण मामले में एनआईए एटीएस कोर्ट ने मौलाना उमर गौतम, मौलाना कलीम सिद्दीकी समेत 16 आरोपियों को दोषी माना है। अदालत ने इनमें से 12 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि 4 को 10 साल के कारावास की सजा दी है। इन 4 आरोपियों में राहुल भोला, मन्नू यादव, कुणाल अशोक चौधरी और सलीम शामिल है। इन पर जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने इन सभी को कल मंगलवार को दोषी करार दिया था। सजा का ऐलान आज बुधवार को किया।
एनआईए एटीएस कोर्ट के जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने इन सभी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 417, 120b, 153a, 153b, 295a, 121a, 123 और अवैध धर्मांतरण कानून की धारा 3, 4, और 5 के तहत दोषी करार दिया। इन धाराओं के तहत आरोपियों को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। अवैध धर्मांतरण के इस मामले में कुल 17 आरोपी थे, जिनमें से 16 दोषी करार दिए गए। 17 वें आरोपी इदरीस कुरैशी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्टे मिल गया है।
मौलाना कलीम को एटीएस ने 2021 में किया था गिरफ्तार
मुजफ्फरनगर के रतनपुरी थाना क्षेत्र स्थित गांव फुलत निवासी मौलाना कलीम सिद्दीकी ने पिकेट इंटर कॉलेज से 12वीं करने के बाद मेरठ कॉलेज से बीएससी की शिक्षा ली। इसके बाद दिल्ली के एक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने लगा। एमबीबीएस की पढ़ाई छोड़कर इस्लामिक स्कॉलर बना। दिल्ली के शाहीन बाग में मौलाना ने 18 साल से अपना ठिकाना बना रखा था। मौलाना कलीम सिद्दीकी को 22 सितम्बर, 2021 की रात उत्तर प्रदेश एटीएस ने दिल्ली-देहरादून हाईवे पर दौराला-मटौर के बीच गिरफ्तार किया था।
कलीम को 562 दिन तक जेल में रहने के बाद मिली बेल
मौलाना कलीम और उसके साथियों को बड़े पैमाने पर अवैध धर्मांतरण सिंडीकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। कलीम को 562 दिन तक जेल में रहने के बाद, अप्रेल 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। शीर्ष अदालत में आगे की सुनवाई शुरू हुई, जिसमें कलीम सिद्दीकी की जमानत पर शर्तें लगाई गईं। सुप्रीम कोर्ट ने सिद्दीकी की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया। उसके एनसीआर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई और जांच अधिकारी ट्रेक कर सकें, इसके लिए अदालत ने उसे अपने फोन का लोकेशन हमेशा ऑन रखने का भी निर्देश दिया।
फॉरेन फंडिंग की मदद से चलाते थे धर्मांतरण सिंडिकेट
मौलाना कलीम सिद्दीकी ने वर्ष 1991 में अपना जामिया इमाम वलीउल्लाह इस्लामिया मदरसा बनाया। गांव में कोर्स संचालित करने के लिए स्कूल की स्थापना की, लेकिन बाद में इसे केरल की एक संस्था के हवाले कर दिया। वह ग्लोबल पीस फाउंडेशन के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहा था। इस मामले में मौलाना उमर गौतम और मुफ्ती काजी सहित कलीम सिद्दीकी के अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारियां भी हुईं। उत्तर प्रदेश एटीएस ने आरोप लगाया था कि ये सभी धर्मांतरण की साजिश रचने में शामिल थे और फॉरेन फंडिंग की मदद से अपनी गतिविधियों को अंजाम देते थे।
ये सभी दोषी उत्तर प्रदेश एवं अन्य जगहों पर धर्मांतरण का रैकेट चलाते थे। ये लोगों को लालच देकर उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित करते थे। ये दोषी लोगों को उनके मूल धर्म के बारे में भ्रम, नफरत और भय पैदा करके उनका ब्रेनवॉश करते थे। इसके बाद उन्हें इस्लाम की खूबियां बताते थे और मुस्लिम बनाते थे। इन सबको राज्य के अलग-अलग जिलों से गिरफ्तार किया गया था।
इस वर्ग के लोगों को बनाते थे अपना शिकार
यह गिरोह उन लोगों को अपना टारगेट बनाता था, जो आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग होते थे। इसके अलावा महिलाएं भी इनके निशाने पर होती थीं। इनके रैकेट को चलाने के लिए इन्हें खाड़ी सहित दुनिया भर से पैसे आते थे। बहला-फुसलाकर, डरा धमकाकर और दबाव बनाकर धर्मांतरण कराते थे। धर्मांतरण करने के बाद उन पर दबाव बनाया जाता था कि वो और हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कराएं।
यह गिरोह इस बात का भी ख्याल रखता था कि धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बने लोग फिर से अपने धर्म में वापसी ना कर लें। इसके लिए उन्हें विशेष तौर पर ट्रेनिंग दी जाती थी। उन्हें देश के अलग-अलग मस्जिदों एवं मदरसों में रखा जाता था। जो इस्लाम छोड़ने की कोशिश करते, उन्हें धमकी भी दी जाती थी।
