राजस्थान: ई-मित्र पर मिली 20 यूनिवर्सिटीज की 700 डिग्रियां व मार्कशीट, बिना परीक्षा के दे रहे बीए, बीकॉम, एमए, एमसीए, एमबीए आदि की डिग्रियां, 3 गिरफ्तार
एनसीआई@जयपुर
प्रताप नगर स्थित दो ई-मित्र सेंटर से 20 यूनिवर्सिटीज की 700 से ज्यादा मार्कशीट और डिग्रियां जब्त की गई हैं। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी डिग्रियां नामी यूनिवर्सिटीज की हैं। सबसे बड़ी बड़ी बात यह है कि ये डिग्रियां सम्बन्धित यूनिवर्सिटीज की मिली भगत से दलालों के माध्यम से बेची जा रहीं थीं।
पुलिस ने बताया कि ये डिग्रियां बिना परीक्षा लिए और बिना क्लास अटेंड किए फर्जी तरीके से यूनिवर्सिटीज की मिलीभगत से दलालों के जरिए बेची जा रहीं थीं। इस केस की गम्भीरता को देखते हुए एसीपी बस्सी के सुपरविजन में एक एसआईटी का भी गठन किया गया है।
डीसीपी ईस्ट तेजस्वनी गौतम ने बताया- कुछ ई-मित्र संचालकों द्वारा कई यूनिवर्सिटीज और शिक्षण संस्थानों की मार्कशीट, सर्टिफिकेट, डिग्री, माइग्रेशन सर्टिफिकेट बनाने और बेचने की जानकारी मिली थी। इस पर हमने टीम बनाकर प्रताप नगर में 2 जगह दबिश दी। पुलिस टीम को मौके से डिग्रियां मिलने के साथ कई फर्जी स्टाम्प भी मिले हैं। इनमें बच्चों के नाम से किराया नामा भी बने हुए थे।
चेक बुक, क्रेडिट और डेबिट कार्ड भी मिले
तेजस्वनी गौतम ने बताया- बुधवार शाम 7 बजे पहली कार्रवाई प्रताप नगर में सेक्टर 8 स्थित यूनिक एजुकेशन कंसल्टेंट में की गई। यहां पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विकास मिश्रा को गिरफ्तार किया। यहां से पुलिस को 18 यूनिवर्सिटी के दस्तावेज मिले। आरोपी विकास ने बताया- उसका एक और ऑफिस सेक्टर-8 एसएसआईटी सेंटर मैन मार्केट प्रताप नगर में है। यहां से पुलिस ने सत्यनारायण और विकास अग्रवाल को गिरफ्तार किया। दोनों जगह तलाशी के दौरान भारी मात्रा में डिग्रियां, मार्कशीट, सर्टिफिकेट, किराया नामा, चेक बुक, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड मिलने पर दो एफआईआर दर्ज की गईं।
दलालों के माध्यम से दी जा रहीं डिग्रियां
डीसीपी ईस्ट तेजस्वनी गौतम ने बताया- ई-मित्र की आड़ में बेरोजगार युवाओं को प्रलोभन देकर बिना परीक्षा लिए और बिना क्लास अटेंड किए फर्जी तरीके से दलालों के माध्यम से डिग्रियां दी जा रहीं थीं। इसमें यूनिवर्सिटी प्रशासन की भी मिलीभगत है। इन डिग्रियों की एवज में मोटा पैसा लिया जा रहा था।
अन्य दस्तावेज भी जब्त किए
इन ई-मित्रों से डिग्रियों के अलावा 29 किराया नामा, 12 चेक बुक, 97 शपथ पत्र, 14 बैंक पास बुक, 13 डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड, 9 नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग के आईडी कार्ड, 7 मोबाइल, 1 पेटीएम मशीन, 2 डीवीआर, 1 पावर सप्लाई केस, 1 कैमरा डिजिटल, 1 राउटर, 1 सीपीयू इंटेल कम्पनी, 1 मोनिटर लेनोवो कम्पनी, 2 लेपटॉप, 2 पेन ड्राइव और 1 प्रिंटर जब्त किया गया।
इन यूनिवर्सिटीज के मिले संदिग्ध दस्तावेज
जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी, सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलोजी, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री, अंकतालिका और माइग्रेशन सर्टिफिकेट मिले हैं। इसके साथ ही बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड, स्वामी विकेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी, मोनाद यूनिवर्सिटी, खुशालदास यूनिवर्सिटी, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना, वाईबीएन यूनिवर्सिटी, रांची, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण संस्थान, माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान, चौधरी चरण सिंह विद्यालय, मेरठ, अर्नी विश्ववद्यालय, तेलंगाना माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, हैदराबाद, मंगलम आईटी एजुकेशन, मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन के संदिग्ध डिग्री-डिप्लोमा, अंकतालिका और माइग्रेशन सर्टिफिकेट मिले हैं।
पुलिस ने इन्हें किया गिरफ्तार
पुलिस ने विकास मिश्रा (39) पुत्र कपिल देव मिश्रा निवासी प्रतापनगर स्थित सेक्टर 8 के 80/419, सत्यनारायण शर्मा (32) पुत्र रमेशचंद निवासी सांगानेर स्थित मैन वाटिका विहार और विकास अग्रवाल (35) पुत्र राजकुमार अग्रवाल निवासी कोटपूतली बहरोड़ मिडवे के सामने को गिरफ्तार किया है। पुलिस इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर आगे कार्रवाई कर रही है।
