विधानसभा के गेट के बाहर अलवर नगर निगम का राजस्व अधिकारी युवराज मीणा 3 लाख रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार
एनसीआई@जयपुर/अलवर
एसीबी की टीम ने मंगलवार रात बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए अलवर नगर निगम के राजस्व अधिकारी युवराज मीणा को जयपुर में विधानसभा के गेट के बाहर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। एसीबी टीम ने रुपए बरामद करने के बाद मीणा के जयपुर स्थित घर और अलवर ऑफिस में भी कागजों को खंगाला। कार्रवाई आज बुधवार तड़के 4 बजे तक चली।
जानकारी के अनुसार युवराज मीणा शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करने वाली ईडी टीम में शामिल एक अधिकारी का छोटा भाई है। एसीबी एएसपी जयपुर नगर द्वितीय ओमप्रकाश किलानिय ने बताया- अलवर में यूडी टेक्स वसूलने वाली कम्पनी ने अक्टूबर-नवम्बर महीने में टेंडर लिया था। मगर कम्पनी के किए गए कामों की फाइल को आरओ युवराज मीणा (35) आगे नहीं बढ़ा रहा था। इसके लिए उसने कम्पनी से 3 लाख रुपए की मांग की थी। इस पर कम्पनी ने एसीबी में इस बात की शिकायत कर दी। इस शिकायत के आधार पर ही यह ट्रेप की कार्रवाई की गई।
खुद कार में बैठा रहा, साथी को रिश्वत लेने भेजा
एएसपी ने बताया- आरओ युवराज मीणा जयपुर के आमेर का रहने वाला है। उसने जयपुर में ही रिश्वत के रुपए लाने को कहा। एसीबी ने भी इस पर उसे रंगे हाथों पकड़ने के लिए अपना जाल पूरी तरह तैयार कर लिया था। व्यूह रचना के तहत कम्पनी के प्रतिनिधि मंगलवार रात करीब 8 बजे जयपुर में विधानसभा के गेट के बाहर 3 लाख रुपए लेकर पहुंच गए। यहां आरओ मीणा अपनी कार से एक व्यक्ति के साथ पहुंचा। यहां वह तो कार में ही बैठा रहा, दूसरे व्यक्ति को कम्पनी के प्रतिनिधि से रुपए लेने भेजा। रुपए लेते ही एसीबी की टीम ने आरओ युवराज मीणा को गिरफ्तार कर लिया।
घर और अलवर ऑफिस में फाइलें खंगाली
एएसपी ने आगे बताया- युवराज मीणा को पकड़ने के बाद टीम उसके आमेर स्थित घर पहुंची। वहां प्रॉपर्टी के कागजों व अन्य सामान को देखा गया। उन्होंने बताया कि प्रॉपर्टी दस्तावेजों का विवरण बाद में बताया जा सकेगा। इसी के साथ टीम देर रात अलवर नगर निगम के ऑफिस पहुंची और फाइलों को खंगाला। पूरी कार्रवाई में तड़के करीब 4 बज गए।
हॉर्डिंग के विज्ञापन तक रोके, निगम को करोड़ों का नुकसान
अलवर में नगर निगम के हॉर्डिंग का टेंडर अटका हुआ है। कई बार हॉर्डिंग का टेंडर जारी नहीं होने के पीछे मिलीभगत की शिकायत पहुंची है। केवल टेंडर नहीं होने से निगम को हर साल कई करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। अधिकारी आगे इसकी भी जांच करेंगे।
