राजस्थान के कांग्रेस सांसद का बयान: ‘धर्म पूछकर मारा और मोदी को बता देना, इस बात की कहीं पुष्टि नहीं, ये प्रचार-प्रसार का तरीका’
एनसीआई@बाड़मेर
पहलगाम आतंकी हमले के मामले में सरकार ने खुद माना है कि सुरक्षा में चूक हुई है। उन्हें इनपुट मिले थे, इसके बाद उन्हें सतर्कता बरतनी चाहिए थी। लेकिन धर्म पूछकर मारा है, इस बात की कहीं पुष्टि नहीं हुई है या मोदी को बता देना इस बात का भी कहीं कोई पुख्ता सबूत नही है।
सोमवार को बाड़मेर में मीडिया से बातचीत करते हुए बाड़मेर-जैसलमेर से कांग्रेस सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने पहलगाम आतंकी हमले पर बोलते हुए यह प्रतिक्रिया देकर भारी विवाद खड़ा कर दिया। इसके अलावा उन्होंने इस मुद्दे पर एक बार फिर अपनी पार्टी कांग्रेस को बेकफुट पर ला दिया।
पहलगाम आतंकवादी हमले पर बोलते हुए सांसद बेनीवाल ने पहले तो भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई कार्रवाई की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि देश की सेना पर फक्र और गर्व है। हालांकि इसी दौरान उन्होंने बवाल खड़ा करने वाली बात भी कह दी।
धर्म पूछकर मारा, इसकी पुष्टि नहीं
दरअसल, आंतकवादियों द्वारा ‘धर्म पूछकर मारने और एक महिला पर्यटक से मोदी को बता देना’ कहने वाले सवाल पर सांसद बेनीवाल ने कहा कि सरकार ने खुद माना है कि सुरक्षा में चूक हुई है। उन्हें इनपुट मिले थे, इसके बाद उन्हें सतर्कता बरतनी चाहिए थी। लेकिन धर्म पूछकर मारा है, इस बात की कहीं पुष्टि नहीं हुई है या मोदी को बता देना इस बात का कहीं भी कोई पुख्ता सबूत नहीं है। ये एक प्रचार-प्रसार अलग तरीके से हो रहा है, ये नहीं होना चाहिए। ये एक चिंताजनक विषय है कि निहत्थे-निर्दोष लोगों पर कायराना हमला हुआ है, इससे पूरे देश में लोगों के अंदर गुस्से का माहौल है।
हालांकि उन्होंने आगे कहा कि भारत हमेशा शांतिप्रिय देश रहा है और शांति को प्राथमिकता दी है। लेकिन दुश्मन ने निर्दोष और बेगुनाह लोगों पर हमला किया है। दुश्मन देश की इस कायराना हरकत के बाद से पूरे देश में असंतोष था। बेनीवाल ने कहा भारतीय सेना द्वारा जवाबी कार्रवाई काबिले तारीफ है। पूरे देश को भारतीय सेना पर गर्व और फक्र है। उनके इस पराक्रम और शौर्य पर देश को नाज है। सीजफायर से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि सीजफायर होना ही चाहिए। क्योंकि भारत ने हमेशा शांति पर विश्वास रखा है। भारतीय सेना या भारत ने पहल नहीं की है। उनके उकसावे के जवाब में हमनें कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का सफाया होना जरूरी था, लेकिन मामले में तीसरे देश की मध्यस्थता लोगों को पसंद नहीं आई।
