‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ मुहिम के तहत सीकर का विक्रम जाट पहुंचा बूंदी, निकला है देशभर की पैदल यात्रा पर
एनसीआई@बूंदी
राजस्थान के सीकर का निवासी 23 वर्षीय विक्रम जाट ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत जारी अपनी पैदल यात्रा में आज बुधवार को बूंदी पहुंचा। कश्मीर से कन्याकुमारी के लिए 7 मई को शुरू की गई उसकी इस यात्रा को आज 60 दिन हो चुके हैं। कन्याकुमारी पहुंचने में उसे अभी 4 महीने और लगेंगे। इस प्रकार उसकी 4 हजार किलोमीटर की यह यात्रा कुल 6 महीने की है।
विक्रम जाट का कहना है कि बालिकाओं व लड़कियों के साथ लगातार बढ़ते जा रहे अपराधों से वह बुरी तरह व्यथित है। साथ ही अपनी इस पैदल यात्रा के माध्यम से वह देशभर में बालिका शिक्षा को और बढ़ावा देने का संदेश देना चाहता है।
राजनीति से दूरी
विक्रम ने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक लोग चाहते हैं कि वह अपनी इस यात्रा के दौरान उनकी पार्टी के नाम का उपयोग करे, मगर वह इन सब से दूर रहना चाहता है।
पूरा जीवन जागरूकता अभियान के लिए
श्रीनगर जम्मू पंजाब-हरियाणा होते हुए वह राजस्थान पहुंचा है। विक्रम ने गत वर्ष बीए कम्प्लीट की है। उसका कहना है कि वह किसी नौकरी की बजाए अपना जीवन ऐसे ही जागरूकता के काम में समर्पित करना चाहता है।
विक्रम के पिता कान्हा रामजी बागिया दसवीं तक शिक्षित हैं तथा खेती करते हैं। वहीं माता जुम्मा देवी अशिक्षित हैं। अपनी इस यात्रा के लिए उसने पिता से बात की तो उन्होंने सड़क के एक किनारे चलने को कहा था। माता-पिता दोनों को उसके इस अभियान पर गर्व है। रास्ते में जम्मू के कलक्टर, पंजाब के गवर्नर आदि ने भरपूर साथ देने का वादा किया था।
कम से कम खर्च की कोशिश
विक्रम ने कहा कि मैं सामान्य परिवार का हूं। कोशिश करता हूं कि खर्चा कम से कम हो। 2 महीने की इस यात्रा में करीब 30 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं। पिता ही पैसों की व्यवस्था कर रहे हैं। रास्ते में कभी-कभी कुछ लोग अपने घर खाना खिलाने को भी ले जाते हैं।
रात कोटा में गुजारेंगे
विक्रम बूंदी से कोटा की ओर रवाना हुए। उनकी 40 किलोमीटर की यह दूरी आज शाम तक पूरी होगी। उन्होंने कहा कि आज रात वे वहीं अपने एक रिश्तेदार के यहां ठहरेंगे। वहां कपड़े धोकर सुखाएंगे। जूते खराब हो गए हैं, वे (रिश्तेदार) नए जूते भी दिलाएंगे। इसके अलावा रिश्तेदार ने ‘बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ’ स्लोगन लिखी हुई टी-शर्ट भी उसके लिए तैयार की है।
