एनसीआई@कौशाम्बी/लखनऊ
उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में एक फौजी (आईटीबीपी के जवान) के घर पर बुलडोजर कार्रवाई की जाने से बड़े सवाल पैदा हो गए हैं। इस मामले में चायल प्रशासन की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। इस पर आक्रोश जताने वाले खुद चायल तहसील के अहलादपुर गांव के निवासी फौजी राम किशन है। बड़ी बात यह है कि फौजी राम किशन इस समय अमरनाथ यात्रा मार्ग की सुरक्षा में तैनात हैं। इसी दौरान जब उन्हें घर पर बुलडोजर एक्शन की जानकारी मिली तो वह हैरान रह गए।
फौजी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया कि चायल तहसील की राजस्व टीम ने खलियान की जमीन पर यादव परिवार के अवैध रूप से बने हुए 25 से 30 मकानों को तो छुआ तक नहीं। केवल उनके मकान को बुलडोजर से धराशायी कर दिया। इसीलिए अमरनाथ यात्रा में तैनात आईटीबीपी जवान को यह मिली तो वह स्तब्ध रह गए। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने बदले के भावना से यह कार्रवाई की है। दलित का मकान गिरा दिया गया। वहीं, उसी जमीन पर बने हुए अन्य लोगों के मकान सुरक्षित हैं। फौजी ने प्रशासन पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया गया है। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं, प्रशासन ने नियमों के आधार पर एक्शन किए जाने की बात कही है।
यह है पूरा मामला
मामले के अनुसार, ग्राम पंचायत की गाटा संख्या 67 में दर्ज खलियान पर बने मकान को चायल तहसील की राजस्व टीम ने शनिवार को ध्वस्तीकरण अभियान चला कर ढहा दिया। इस अभियान में आईटीबीपी के जवान राम किशन भारतीय पुत्र लल्लू का मकान भी बुलडोजर से ढहा दिया गया।
वीडियो में फौजी राम किशन ने इस मामले को एक वर्ग को फायदा पहुंचाने के लिए उनके परिवार को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया है। इस मामले पर सोशल मीडिया पर भी बहस चल रही है। इस सम्बंध में उपजिलाधिकारी अरुण कुमार का कहना है कि गाटा संख्या 67 खलियान के नाम अभिलेखों में दर्ज है। इसे अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। उक्त भूमि पर शेष बने अन्य मकानों की जांच कराई जा रही है।
