एनसीआई@कोटा
राज्य सरकार की पहल के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर कस्टम हायरिंग केन्द्रों की स्थापना से किसानों को ट्रेक्टर, थ्रेसर, रोटावेटर, रीपर, सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल और फसल अवशेष प्रबंधन जैसे आधुनिक यंत्रों को किराये पर लेने की सुविधा उपलब्ध हो सकी है।
संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार अतीश कुमार शर्मा ने बताया कि यह योजना विशेषकर लघु और सीमांत किसानों के लिए राहत लेकर आएगी, जिन्हें सीमित संसाधनों के कारण आधुनिक कृषि यंत्र खरीदना संभव नहीं होता। कस्टम हायरिंग केन्द्रों की सुविधा से खेती की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होगा। जिले में 65 कस्टम हायरिंग केन्द्र पूर्व संचालित हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 22 स्वीकृतियां एवं 2026-27 में 14 कस्टम हायरिंग केन्द्र स्थापना की प्रशासनिक स्वीकृतियां क्रय-विक्रय सहकारी समितियां (केवीएसएस), ग्राम सेवा सहकारी समितियां (जीएसएस), राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) और ग्रामीण उद्यमी/प्रगतीशील किसान की प्राप्त हुई हैअ।
14 केन्द्र शुरू, 22 की स्थापना की प्रक्रिया
इनमें से 14 कस्टम हायरिंग केन्द्र स्थापित कर संचालन शुरू कर दिया गया है। 22 केन्द्रों की स्थापना प्रक्रियाधीन है। इस तरह वर्तमान में जिले में कुल 79 कस्टम हायरिंग केन्द्र संचालित हैं। वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 में 30 अप्रेल 2026 तक प्राप्त कस्टम हायरिंग केन्द्रों की प्रशासनिक स्वीकृतियों में बैंक ऋण मय स्थापना कर संचालन की अवधि को तीन माह की अवधि में संशोधन कर 31 जुलाई, 2026 तक कर दिया है। 31 जुलाई, 2026 तक कस्टम हायरिंग केन्द्र स्थापना कर संचालन नहीं होने की स्थिति में जारी प्रशासनिक स्वीकृतियां स्वतः ही निरस्त मानी जाएगी।
खेती के उत्पादन में वृद्धि और लागत में कमी
इस योजना से किसानों को आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा, जिससे वे कम समय में अधिक कार्य कर सकेंगे। विशेष रूप से जिन किसानों के पास खुद के संसाधन नहीं है, उन्हें अब मशीनों के अभाव में पिछड़ना नहीं पड़ेगा। आधुनिक यंत्रों के माध्यम में खेतों की बुवाई, कटाई और थ्रेसिंग अधिक कुशल ढंग से संभव हो सकेगी।
