अब सवाल यह-वो ऑफिसर कौन, जिसकी गलती से गहलोत ने पढ़ दिया पुराना बजट भाषण? जानें
एनसीआई@जयपुर
राजस्थान विधानसभा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज शुक्रवार को जैसे ही अपना बजट भाषण पढ़ना शुरू किया, उन्हें बहुत बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। दरअसल वह गत वर्ष का बजट पढ़ रहे थे। जैसे ही यह बात खुली, विपक्ष ने तगड़ा हंगामा कर दिया। स्पीकर सीपी जोशी के सभी प्रयास नाकाम रहे, अंततः सदन को आधे घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा। इस पर सवाल उठना स्वभाविक है कि आखिर इतनी बड़ी गलती कैसे हो गई ? आखिर वह कौन से अफसर हैं, जिनकी निगरानी में पूरा बजट तैयार किया गया है?
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राजस्थान बजट 2023 को तैयार करने में 4 आईएएस अफसर और एक आरएसएस अफसर की 105 दिन के लिए लगातार 12 घंटों की मेहनत लगी थी। इसके बावजूद बजट पेश करते समय इतनी बड़ी गलती हो गई कि सीएम गहलोत को माफी मांगनी पड़ी।
सबकी निगाहें उठीं अखिल अरोड़ा की ओर
सदन में जैसे ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट भाषण के दौरान पुराने बजट की कुछ प्रतियां पढ़ीं और विपक्ष ने हंगामा शुरू किया तो अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए । सभी अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) अखिल अरोड़ा की ओर तिरछी नजरों से देखकर मन ही मन कोसने लगे। इसके बाद तत्काल वित्त सचिव अखिल अरोड़ा ने महेश जोशी को अपने पास बुलाया और उन्हें इसके बारे में जानकारी दी। इस पर मुख्य सचेतक महेश जोशी मुख्यमंत्री के पास गए और कान में फुसफुसा कर इस बड़ी गलती का अहसास कराया। इससे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी हतप्रभ रह गए। सभी से मानवीय भूल बोलकर माफी मांगनी पड़ी।
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इनकी निगरानी में ही बना था बजट
यहां खास बात यह है कि यह बजट अखिल अरोड़ा की निगरानी में ही तैयार किया गया था। ऐसे में मुख्यमंत्री के द्वारा पुराना बजट पढ़ देना बेहद शर्मनाक माना जा रहा है। वह भी तब जबकि एक दिन पूर्व मुख्यमंत्री ने बजट की अटेची की पूर्ण तैयारियों के साथ फोटो सोशल मीडिया पर डाली थी। इस फोटो में राजस्थान का बजट तैयार करने वाले अफसरों में अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) अखिल अरोड़ा, राजस्व शासन सचिव (वित्त) कृष्ण कांत पाठक, शासन सचिव (वित्त) बजट रोहित गुप्ता, शासन सचिव (वित्त) व्यय नरेश कुमार ठकराल और निदेशक बजट ब्रजेश शर्मा साथ थे।
इन्हीं अफसरों ने बजट को अंतिम रूप दिया था। इसमें आईएएस अखिल अरोड़ा वरिष्ठ अफसर हैं। उनकी निगरानी में तैयार बजट में इतनी बड़ी गलती होना सरकार के भी गले नहीं उतर रहा है। ऐसे में विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि गहलोत सरकार में अफसर बेलगाम हैं, इसी का ये नतीजा है। हालांकि इस मामले में किस अफसर पर क्या कार्रवाई होगी यह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा।
