सुपर थर्मल पावर और आरएपीपी प्लांट की यूनिट ठप हो जाने से हाड़ोती में कई जगह बिजली रही गुल, इमरजेंसी कनेक्शन भी हुए ठप
एनसीआई@कोटा
ग्रिड पर बिजली की आपूर्ति व खपत का संतुलन बना रखने में रही खामी के कारण ग्रिड में आए व्यवधान से शनिवार तड़के कोटा थर्मल व रावतभाटा परमाणु बिजलीघर की सभी इकाइयां ठप हो गईं। इससे पूरे कोटा शहर सहित जिलेभर के कई क्षेत्रों के अलावा बूंदी व बारां जिलों के भी अधिकतर इलाकों में बिजली बंद हो गई। गम्भीर बात यह रही कि इन दोनों बिजलीघरों को फिर से चलाने के लिए भी बिजली नहीं थी। कोटा शहर सहित सम्पूर्ण प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं की बिजली भी ठप हो गई।
अस्पतालों में बिजली बंद होने से मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। वहीं पेयजल के प्लांट ठप हो जाने से लोगों के घरों में पानी की सप्लाई भी नहीं हो सकी। अचानक हुए इस घटनाक्रम के बाद विद्युत उत्पादन निगम, विद्युत प्रसारण निगम, जयपुर डिस्कॉम के अधिकारियों में हड़कम्प मच गया। सभी लोग जहां से भी व्यवस्था हो सकती थी, सप्लाई चालू करने के प्रयासों में जुट गए। ठप हुए प्लांटों के लिए अलग-अलग जगहों से बिजली की व्यवस्था कर इनकी इकाइयों को बिजली उत्पादन के लिए चालू किया गया। इसके बाद दूसरे ग्रिड सब स्टेशनों से जुड़े जीएसएस से वैकल्पिक व्यवस्था कर धीरे-धीरे प्रभावित क्षेत्रों में बिजली की व्यवस्था की गई। सभी जगहों पर विद्युत आपूर्ति पूरी तरह सुचारू होने में करीब 7 घंटे का समय लग गया। कई जगह तो सुबह 5 बजे बंद हुई विद्युत आपूर्ति को बहाल होने में दोपहर 2 बजे से भी अधिक का समय लग गया।
इसलिए आई आफत
कोटा थर्मल की सभी 7 इकाइयां बिजली उत्पादन कर कोटा थर्मल परिसर स्थित राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम के 132 केवी जीएसएस को देती हैं। रावतभाटा स्थित आरएपीपी भी इसी ग्रिड से जुडा हुआ है। शनिवार अल सुबह तक कोटा थर्मल की पांच इकाइयां पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन कर रहीं थीं। कोटा थर्मल की 110 मेगावाट की एक तथा 210 मेगावाट की एक इकाई पहले से ही मरम्मत के चलते बंद थीं। इसी तरह रावतभाटा आरएपीपी में भी बिजली उत्पादन हो रहा था। इन दोनों प्लांटों द्वारा बनाकर ग्रिड पर भेजी जा रही बिजली की तुलना में ग्रिड से हो रही बिजली की खपत कम हो गई, लेकिन उधर बिजली का उत्पादन जारी रहा। ग्रिड पर खपत की तुलना में सप्लाई अधिक हो जाने से ग्रिड में व्यवधान आ गया और दोनों प्लांटों की बिजली उत्पादन कर रही इकाइयां ट्रिप हो गईं। थर्मल पावर प्लांट के चीफ इंजीनियर एके आर्य ने बताया कि सुबह ग्रिड में कोई तकनीकी खामी आने की वजह से दिक्कत आई थी। थर्मल के तकनीकी अधिकारियों-कर्मचारियों ने तुरंत यूनिट्स को लाइट अप करने का काम शुरू किया।
शहर में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत चालू की बिजली
220 केवी सकतपुरा जीएसएस ठप हो जाने से सम्पूर्ण कोटा शहर में बिजली ठप हो गई। 220 केवी सकतपुरा से कोटा शहर में दादाबाड़ी, नांता व महावीर नगर स्थित 132 केवी जीएसएस में विद्युत आपूर्ति होती है। 220 केवी जीएसएस के ही बंद हो जाने से इन जीएसएस को भी बिजली नहीं मिल पाई। केईडीएल के 33 केवी जीएसएस को बिजली नहीं मिलने से केईडीएल के लिए लोगों के घरों तक बिजली बहाल करना किसी भी स्थिति में सम्भव नहीं था। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था की गई। सबसे पहले इमरजेंसी सेवाओं की बिजली बहाल करना था। एमबीएस अस्पताल व मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अलावा मुख्य जल उत्पादन केन्द्र अकेलगढ़ व सकतपुरा स्थित मिनी अकेलगढ़ की बिजली बहाल करने के पहले प्रयास शुरू हुए। इसके लिए पहला सहारा बना रानपुर स्थित 132 केवी जीएसएस। इस जीएसएस को मध्यप्रदेश के भानपुरा स्थित जीएसएस से बिजली मिलती है। ऐसे में जीएसएस बंद नहीं हुआ था। इस जीएसएस से वैकल्पिक व्यवस्था कर महावीर नगर स्थित 132 केवी जीएसएस को चालू किया गया। महावीर नगर जीएसएस को सप्लाई मिलते ही केईडीएल की टीम ने तत्काल आरकेपुरम जीएसएस से सुबह 7.34 बजे मेडिकल काॅलेज के न्यू अस्पताल व सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की बिजली आपूर्ति बहाल कर दी। इसी प्रकार स्टेशन क्षेत्र रंगपुर रोड स्थित 132 केवी गोपाल मिल जीएसएस को बारां जिले में स्थित 220 केवी डाहरा जीएसएस से जोड़कर चालू किया गया। इससे एमबीएस अस्पताल व जेकेलोन अस्पताल में बिजली बहाल की गई। इसके बाद केईडीएल की टीमें एक के बाद एक जीएसएस को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत चालू करने में जुट गईं।
