नसबंदी फेल होने से हो गया चौथा बच्चा, अदालत के आदेश के बावजूद पूरा मुआवजा नहीं दिया, मजिस्ट्रेट की टीम सरकारी सम्पत्ति कुर्क करने सीएमएचओ ऑफिस पहुंच गई
एनसीआई@दौसा
जिले के लालसोट सरकारी हॉस्पिटल में करवाई गई महिला की नसबंदी फेल हुई तो उसने कोर्ट में दावा ठोक दिया। चिकित्सा विभाग ने उसे 30 हजार रुपए मुआवजा दिया। कोर्ट ने 40 हजार रुपए और देने का आदेश दिया। इस आदेश का पालन नहीं हुआ तो कोर्ट से टीम शुक्रवार को दौसा सीएमएचओ ऑफिस को कुर्क करने पहुंच गई।
ऑफिस और सरकारी सम्पत्ति कुर्क करने मुंसिफ मजिस्ट्रेट दौसा की टीम दौसा सीएमएचओ ऑफिस पहुंची तो वहां हड़कम्प मच गया। सीएमएचओ डॉ. सीताराम मीना और डिप्टी सीएमएचओ डॉ. महेन्द्र सिंह गुर्जर नदारद मिले। इधर, जब ड्राइवरों को पता चला कि सरकारी गाड़ी भी कुर्क की जा सकती है तो वे कारें लेकर फरार हो गए। सीएमएचओ ने डिप्टी सीएमएचओ को ऑफिस पहुंचने के निर्देश दिए।

कार्रवाई करने आए कोर्ट सेल अमीन विनोद शर्मा ने बताया-टीम ने सीएमएचओ डॉ. सीताराम मीना को फोन लगाया तो उन्होंने डिप्टी सीएमएचओ को दफ्तर में उपस्थित होने के निर्देश देने की बात कही। इसके बाद टीम के पास डिप्टी सीएमएचओ का फोन आया। डॉ. महेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि वे खेती से जुड़े किसी मामले में राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर आए हुए हैं। इसके बाद सीएमएचओ ने दफ्तर के ही एक अधिकारी को भेजकर टीम से लिखित में 15 दिन की मोहलत मांगी। हम कार्रवाई के लिए आए, लेकिन अधिकारी नहीं मिले। मोहलत मांगी गई है। यह लिखित प्रार्थना पत्र कोर्ट में पेश करेंगे। अब यह कोर्ट पर है कि आगे क्या फैसला लिया जाता है।
सरकारी हॉस्पिटल ने नसबंदी का प्रमाण पत्र भी दिया
नसबंदी कराने वाली महिला के वकील रविन्द्र सिंह बैंसला ने बताया- लालसोट थाना इलाके के एक गांव की महिला ने तीन संतानों के बाद 6 दिसंबर 2022 को लालसोट (दौसा) के सरकारी हॉस्पिटल में नसबंदी कराई थी। 12 जनवरी 2023 को महिला को नसबंदी का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया। तीन महीने बाद अप्रेल 2023 में पेट दर्द की शिकायत के बाद उसने हॉस्पिटल में सोनोग्राफी जांच कराई तो पता चला कि वह प्रेग्नेंट है। महिला ने लालसोट हॉस्पिटल में चिकित्सा अधिकारी से शिकायत की तो कहा- जैसा ऑपरेशन करना था, हमने कर दिया। अब हमारी जिम्मेदारी नहीं है।
इसके बाद चौथे बच्चे का जन्म हो गया
महिला ने 18 अगस्त 2023 को चौथे बच्चे को जन्म दिया। महिला ने नसबंदी फेल के लिए चिकित्सा विभाग को बताया जिम्मेदार महिला ने चिकित्सा विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुंसिफ मजिस्ट्रेट कोर्ट की शरण ली। शिकायत देते हुए कहा कि वह पहले से 3 बच्चों की मां है। चौथा बच्चा होने के कारण उस पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा। वह सरकार से मिलने वाली कई तरह की स्कीम का लाभ लेने से वंचित हो जाएगी। उसका पति चुनाव में उम्मीदवार बनने से वंचित हो जाएगा। चौथा बच्चा होने के कारण उसे शारीरिक और मानसिक कष्ट उठाना पड़ा। इसके लिए चिकित्सा विभाग जिम्मेदार है।
70 हजार की जगह केवल 30 हजार का भुगतान
इस पर कोर्ट ने महिला को 70 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश किया। इसके बाद विभाग ने मार्च 2024 में क्षतिपूर्ति राशि भुगतान की स्वीकृति जारी कर दी। 29 मार्च 2024 को उसके पति के खाते में 30 हजार रुपए की राशि भी आ गई। बाकी के 40 हजार रुपए का भुगतान करने में चिकित्सा विभाग आनाकानी करने लगा। इस पर महिला दोबारा कोर्ट में गई और शारीरिक मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 20 हजार और वकील की फीस के 20 हजार, कुल 40 हजार रुपए मुआवजे की मांग की। कोर्ट ने 40 हजार रुपए अदा करने के आदेश दिए, लेकिन शिकायत का निपटारा नहीं किया गया।
कोर्ट की अवहेलना पर हुई कार्रवाई
इसके बाद कोर्ट की अवहेलना को लेकर सीएमएचओ के खिलाफ कार्रवाई की गई। लेकिन इसके बावजूद मुआवजा नहीं दिया गया। आखिरकार शुक्रवार, 3 जनवरी को स्थायी लोक अदालत के आदेशानुसार कोर्ट की टीम सीएमएचओ ऑफिस, ऑफिस की सरकारी सम्पत्ति व अधिकारियों की कारें कुर्क करने के लिए पहुंच गई। टीम के पहुंचने की सूचना से ऑफिस में हड़कम्प मच गया। अधिकारी और उनके ड्राइवर गायब हो गए। अब कोर्ट से 15 दिन का समय मांगा गया है।
