एनसीआई@सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)
कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद का 30 दिन में बेदखली आदेश जारी होने के बाद लोगों में खलबली मच गई। इसके बाद शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोग मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए पहुंच गए। इनमें सांसद और विधायक भी शामिल थे। बारिश के बावजूद बड़ी तादाद में लोगों ने जुमे की नमाज अदा की। सुबह से ही मस्जिद का बेदखली आदेश लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। नमाज के दौरान मस्जिद की हिफाजत को लेकर विशेष दुआ भी की गई।
जुमे की इस नमाज में सांसद इमरान मसूद और एमएलसी शाहनवाज खान भी शामिल हुए। नमाज के बाद दोनों नेताओं ने मस्जिद के जिम्मेवारों के साथ बातचीत में पूरे प्रकरण की जानकारी ली और मामले के कानूनी पहलुओं को लेकर भी चर्चा की और सहयोग का भरोसा दिलाया। उधर, बेदखली आदेश के बाद शुक्रवार को मस्जिद परिसर में लोगों की आवाजाही अधिक दिखी।
प्रशासन की रही कड़ी नजर
कई लोग मस्जिद की स्थिति जानने और घटनाक्रम की जानकारी लेने पहुंचे तो कुछ लोग मस्जिद के बाहर जानकारी करते दिखे। पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की भी नजर बनी रही और परिसर के आसपास सामान्य व्यवस्था सामान्य बनाए रखी गई। अब सभी की निगाहें प्रकरण में कानूनी पहलुओं और मस्जिद पक्ष के साथ प्रशासन के भी अगले कदम पर टिकी हैं। पुलिस प्रशासन भी एहतियातन पूरे प्रकरण पर नजर बनाए रहा। कलक्ट्रेट में भी पुलिस व सुरक्षा व्यवस्था चुस्त रही।
मस्जिद के मुतव्वली बोले, आदेश मिलने पर बनेगी रणनीति
सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा मस्जिद को सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा मानते हुए बेदखली और 6.41 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाए जाने के आदेश के बाद मस्जिद पक्ष ने कहा है कि फिलहाल उन्हें अदालत के आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। मस्जिद के मुतव्वली अर्थात व्यवस्थापक ने कहा कि आदेश मिलने के बाद उसका विधिक परीक्षण कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। मुतव्वली तनवीर अहमद एडवोकेट ने आरोप लगाया कि कोर्ट ने अपने फैसले से पूर्व उनके साक्ष्यों का पर्याप्त संज्ञान नहीं लिया। कहा यह मस्जिद 1911 से पहले की बनी है। सम्बंधित भूमि मुस्लिम खेवटदारों द्वारा वक्फ की गई थी। इसके अलावा, मामले को सिविल अदालत में स्थानांतरित किए जाने के उनके प्रार्थना पत्र पर भी समुचित विचार नहीं किया गया।
70 साल से कब्जा मान 6.41 करोड़ का जुर्माना भी लगाया
उधर, सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अपने निर्णय में 1359 फसली के राजस्व अभिलेखों आदि के आधार पर भूमि को कलक्ट्रेट की सरकारी जमीन माना है। कोर्ट ने 70 साल से कब्जा मानते हुए मस्जिद को बेदखल करने के साथ बतौर क्षतिपूर्ति 6.41 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इसी को लेकर मस्जिद पक्ष ऊपरी अदालत में जाने की बात कह रहा है। मुतवल्ली ने बताया कि अभी उन्हें आदेश की कॉपी ही नहीं मिली है। अब सभी की नजर इस पर है कि आदेश की प्रति मिलने के बाद मस्जिद पक्ष क्या कानूनी कदम उठाता है।
