एनसीआई@टोंक
देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। करीब 9 महीने बाद हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद झालावाड़ में प्रदर्शन के दौरान दोबारा गिरफ्तारी हुई। इसे जमानत की शर्तों का उल्लंघन मानते हुए टोंक एससी/एसटी कोर्ट ने 13 जुलाई को उनकी जमानत रद्द कर दी थी। अब कोर्ट के आदेश पर नगरफोर्ट थाना पुलिस ने उनकी चल-अचल सम्पत्ति का रिकॉर्ड मांगा है, जिसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। नरेश मीणा पर एसडीएम से मारपीट सहित कई धाराओं में केस दर्ज हैं। वहीं, उसके समर्थकों का आरोप है कि सरकार उसकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
कोर्ट के आदेश पर सरपंच से मांगी चल-अचल सम्पत्ति की जानकारी
नगरफोर्ट थानाधिकारी राजेन्द्र ताड़ा ने बताया कि एससी/एसटी कोर्ट के आदेश की पालना में नरेश मीणा की चल-अचल सम्पत्ति का रिकॉर्ड मांगा गया है। इसके लिए उनकी ग्राम पंचायत नयागांव उर्फ नानवता, तहसील मोठपुर (जिला बारां) के सरपंच (प्रशासक) को पत्र भेजा गया है। पत्र में नगरफोर्ट थाने में दर्ज मुकदमा का हवाला देते हुए जल्द सम्पत्ति का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि उसे न्यायालय में पेश किया जा सके।
समर्थक बोले- सरकार अहंकार में, आवाज दबाने की कोशिश
नरेश मीणा के सहयोगी राकेश बैंसला ने कहा कि सरकार अहंकार में है और नरेश मीणा की बढ़ती लोकप्रियता से घबराई हुई है। उनका आरोप है कि पंचायत राज चुनाव से पहले सरकार उन्हें जेल में रखकर गरीबों, किसानों, मजदूरों और छात्रों की आवाज दबाना चाहती है। उन्होंने कहा कि पहले स्पेशल लोक अभियोजक नियुक्त कर जमानत रद्द कराई गई और अब सम्पत्ति का रिकॉर्ड मंगवाया जा रहा है। उनका दावा है कि जनता इसका जवाब पंचायत राज और नगर निकाय चुनाव में देगी। बात न्याय पालिका के आदेश की तो उसका हम सम्मान करते है, हमें न्याय पालिका में विश्वास है, वह हमारे साथ न्याय करेगी और राहत देगी।
एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में हुई थी गिरफ्तारी
यह मामला 13 नवम्बर को देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के मतदान के दौरान शुरू हुआ था। समरावता गांव के लोगों ने गांव को उनियारा उपखंड में शामिल करने की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था। उस समय निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा भी ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे।
आरोप है कि जबरन तीन लोगों से मतदान कराने का विरोध करते हुए नरेश मीणा ने एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था। अगले दिन 14 नवम्बर को पुलिस ने उन्हें धरना स्थल से गिरफ्तार किया और 15 नवम्बर को कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया। इस मामले में 60 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। नरेश मीणा को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों को जमानत मिल गई थी। करीब 9 महीने बाद हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को सशर्त जमानत पर रिहा किया था।
झालावाड़ प्रदर्शन के बाद रद्द हुई जमानत
25 जुलाई 2025 को झालावाड़ के पिपलोदी सरकारी स्कूल की इमारत का हिस्सा गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद नरेश मीणा एसआरजी हॉस्पिटल के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद नगरफोर्ट थाना पुलिस ने इसे हाईकोर्ट की जमानत शर्तों के उल्लंघन का आधार बनाते हुए एससी-एसटी कोर्ट में उनकी जमानत रद्द करने की अर्जी लगाई।
कोर्ट ने अभी 13 जुलाई को उनकी जमानत रद्द कर दी। जज आरती माहेश्वरी ने माना कि हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को सशर्त जमानत दी थी, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने उन शर्तों का पालन नहीं किया। जमानत रद्द होने के बाद अब उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी हो सकता है।
