एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क
कुछ समय पहले खुद को स्वतंत्र घोषित करने वाले बलूचिस्तान के
बलूच राष्ट्रवादी और स्वतंत्रता-समर्थक समूह 11 अगस्त को ‘बलूच राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस’ के रूप में मनाते हैं। 11 अगस्त 1947 को ब्रिटिश हुकूमत से कलात/बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की घोषणा हुई थी, जिसे मार्च 1948 में पाकिस्तान ने जबरन अपने क्षेत्र में मिला लिया था। इस अवसर पर एक ओर बलूच जनसमूह स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ मना रहा है तो दूसरी ओर पाकिस्तानी सुरक्षा बल सख्त पहरेदारी और सैन्य अभियानों के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने में लगे हैं।
बलूच संगठनों द्वारा जारी 5 प्रमुख निर्देश
बलूच राष्ट्रीय संघर्ष और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ और बलूच अलगाववादी संगठनों (जैसे BLA समर्थकों) ने जनता से निम्नलिखित 5 प्रमुख अपील की है:-
• बलूच राष्ट्रीय ध्वज फहराना : पाकिस्तानी झंडे को हटाकर सभी आवासीय घरों, दुकानों और व्यावसायिक परिसरों पर बलूचिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज अनिवार्य रूप से लगाना।
• बलूच राष्ट्रगान का गायन : सार्वजनिक आयोजनों और घरों में बलूचिस्तान के घोषित राष्ट्रगान ‘मां चुकैन बलोचानी’ को गाना व बजाना।
• पाकिस्तानी प्रतीकों को हटाना : सरकारी इमारतों, सड़कों और चौक-चौराहों से पाकिस्तानी झंडों व प्रतीकों को उतारकर बलूच ध्वज स्थापित करना।

• 11 अगस्त को आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस मानना : 14 अगस्त (पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस) का पूर्ण बहिष्कार करते हुए 11 अगस्त को ही बलूचिस्तान का वास्तविक स्वतंत्रता दिवस मनाना।
• पाकिस्तानी प्रशासन का बहिष्कार : पाकिस्तानी सरकार व सेना द्वारा आयोजित किसी भी 14 अगस्त समारोह में शामिल न होना और आम हड़ताल (शटडाउन) का कड़ाई से पालन करना।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मान्यता की मांग
स्वघोषित ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ और प्रमुख बलूच नेताओं (जैसे मीर यार बलूच) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और सम्प्रभु राष्ट्र के रूप में कूटनीतिक मान्यता देने का आग्रह किया है।
पाकिस्तानी सेना का क्रेकडाउन और सैन्य ऑपरेशन
बलूच स्वतंत्रता दिवस के समारोहों को रोकने और विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों ने पूरे बलूचिस्तान में कड़ा पहरा लगा रखा है। क्वेटा, कलात, खुजदार सहित राज्य के कई प्रमुख हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट और टेलीफोन सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। बलूचिस्तान के संवेदनशील इलाकों में पाकिस्तानी वायुसेना के हेलीकॉप्टर और ड्रोन लगातार हवाई गश्त कर रहे हैं।
ऑपरेशन ‘रद्द-उल-फ़ितना-3’ : पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा पंजगुर (Panjgur) जिले के सरकानी और छेडगी इलाकों में खुफिया जानकारी के आधार पर सैन्य ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें 5 विद्रोहियों को मारने का दावा किया गया है। इससे एक दिन पहले भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में 15 उग्रवादी मारे गए थे।
यह है बलूचिस्तान से जुड़ा पूरा मामला
1947 में भारत के विभाजन के समय बलूचिस्तान क्षेत्र में स्थित ‘कलात’ रियासत ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी। मार्च 1948 में पाकिस्तानी सेना के दबाव के बाद कलात के शासक ने पाकिस्तान में विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए। बलूच लोगों का आरोप है कि यह विलय धोखे और सैन्य बल के दम पर कराया गया था, जिसे वे आज तक स्वीकार नहीं करते।
विवाद और संघर्ष के मुख्य कारण
बलूचिस्तान प्राकृतिक गैस, तांबा, सोना और खनिज संसाधनों से समृद्ध है। इसके बावजूद यह पाकिस्तान का सबसे गरीब और कम विकसित क्षेत्र है। स्थानीय बलूच नागरिकों का मानना है कि पंजाब और केंद्र सरकार उनके संसाधनों का इस्तेमाल करती है, लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं देती। दूसरी ओर, अरब सागर पर स्थित ग्वादर पोर्ट CPEC का प्रमुख केन्द्र है। बलूच समूहों का विरोध है कि इस परियोजना से बाहरी लोगों (विशेषकर चीन और गैर-बलूच पाकिस्तानियों) को फायदा हो रहा है और स्थानीय लोगों को उनकी ही जमीन से बेदखल किया जा रहा है।
यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों (ISI) पर बलूच कार्यकर्ताओं, छात्रों और पत्रकारों के ‘जबरन गायब होने’ और हत्याओं के गम्भीर आरोप लगते रहे हैं। ‘बलूच यकजेहती कमेटी’ जैसे संगठन इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन करते हैं। बलूचिस्तान में कई अलगाववादी संगठन सक्रिय हैं, जिनमें बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) सबसे प्रमुख है। ये समूह पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, चीनी नागरिकों और CPEC से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निशाना बनाते हैं।
