प्रयागराज के नवाबगंज थाना क्षेत्र के बरईपुर रामनगर गांव में एक मकान के बरामदे की खुदाई के दौरान जमीन में गड़े तीन ड्रम मिले। इनमें पॉलिथीन में लपेटकर नोटों के बंडल रखे गए थे। शुरुआती अनुमान में ये करोड़ों रुपए की बताए गए हैं ।पुलिस ने दो सगे भाइयों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। आयकर विभाग और अन्य एजेंसियों को भी सूचना दी गई है।
एनसीआई@प्रयागराज
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के एक गांव में मकान के बरामदे की खुदाई के दौरान जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए तीन ड्रम मिले। जब इन ड्रमों को बाहर निकाला गया, तो उनके अंदर नोटों के बंडल भरे हुए मिले। भारी मात्रा में इस प्रकार रुपए मिलने की खबर फैलते ही इलाके में हड़कम्प मच गया। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, बरामद रकम करोड़ों रुपए बताई जा रही है। हालांकि, रुपयों की गिनती जारी थी। यह मामला प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट के गंगानगर जोन के नवाबगंज थाना क्षेत्र स्थित बरईपुर रामनगर गांव का है। इस मामले में दो सगे भाइयों, राकेश यादव और राजेश यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली थी कि बरईपुर रामनगर गांव स्थित एक मकान में बड़ी मात्रा में रुपए छिपाकर रखे हुए हैं। इस पर नवाबगंज और सोरांव थाना पुलिस ने कार्रवाई की। एसीपी सोरांव श्यामजी और एसीपी फूलपुर राजकुमार सिंह की मौजूदगी में मकान के बरामदे की खुदाई कराई गई। इसमें जमीन में गड़े हुए तीन ड्रम बरामद हुए। इन ड्रमों में पॉलिथीन की थैलियों में लपेटकर नोटों के बंडल रखे मिले। बताया जा रहा है कि नोटों को पॉलिथीन की थैलियों में इसलिए लपेटा गया था, ताकि वे खराब न हों। बरामद नोटों में ज्यादातर 500 रुपए के बताए जा रहे हैं।
पुलिस जुटा रही जानकारी
फिलहाल पुलिस बरामद रकम की गिनती और उससे जुड़ी जानकारी जुटाने में लगी है। नकदी की सही मात्रा और उसके स्रोत को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। इस मामले में पुलिस ने राकेश यादव और राजेश यादव को हिरासत में लिया है। दोनों सगे भाई हैं। जिस मकान से ये राशि बरामद हुई है, उसे पुलिस ने अपने घेरे में ले लिया है। परिवार के सभी सदस्य फिलहाल वहां से कहीं और चले गए हैं। मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ है।
मौके पर एसीपी सोरांव श्यामजी, नवाबगंज थाना प्रभारी पंकज अवस्थी और भारी पुलिस बल तैनात है. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं. जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी कहां से आई और उसे जमीन के नीचे ड्रमों में छिपाकर क्यों रखा गया था.
ग्रामीणों के मुताबिक, राकेश यादव और राजेश यादव पहले पुणे की एक कम्पनी में काम करते थे। वहां इन्होंने मजदूरी करना बताया था। कुछ साल पहले वे गांव आ गए और यहां करोड़ों की जमीन, मकान और दुकानें भी खरीदी गईं। घर के पास एक मंदिर का निर्माण भी कराया जा रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर निर्माण के लिए लोगों से चंदा लेने की बात भी सामने आई है। गांव में दोनों भाइयों का व्यवहार सामान्य बताया गया है हालांकि, अब उनके मकान से भारी मात्रा में रुपए मिलने के बाद पुलिस इनकी सम्पत्ति और रुपयों से जुड़े मामलों की जांच कर रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि शारदीय नवरात्र के दौरान देवी प्रतिमा विसर्जन को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद किसी व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी कि मकान में काला धन छिपाकर रखा गया है। इसी सूचना के पर पुलिस ने कार्रवाई की और खुदाई के दौरान तीन ड्रमों में रखे नोटों के बंडल बरामद हुए। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
आयकर विभाग और अन्य एजेंसियों को दी गई सूचना
मामले की गम्भीरता को देखते हुए आयकर विभाग व जीएसटी विभाग सहित खुफिया एजेंसियों को भी सूचना दी गई है। इन एजेंसियों की मदद से बरामद रकम के स्रोत और उसकी वैधता की जांच की जाएगी। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि ड्रमों में मिली रकम कितनी है, वह कहां से आई और उसे मकान के नीचे छिपाकर रखने के पीछे क्या वजह थी।
