एनसीआई@बूंदी
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते उपयोग के बीच ई-कचरे की विकराल होती समस्या को लेकर जन-जागरुकता बेहद जरूरी है। इसके अनियंत्रित निस्तारण से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के समक्ष गम्भीर चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। यह बात शुक्रवार को राजकीय महाविद्यालय, बूंदी द्वारा ‘ई-कचरे को कम करना’ विषय पर आयोजित एक ऑनलाइन व्याख्यान में विशेषज्ञों ने कही। यह आयोजन ‘मिशन लाइफ’ (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) और ‘ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक’ के तहत किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी अशोक कुमार जेलिया रहे। उन्होंने ई-कचरे से उत्पन्न होने वाली पर्यावरणीय व स्वास्थ्य समस्याओं और इसके वैज्ञानिक व सुरक्षित निस्तारण पर विस्तार से प्रकाश डाला। जेलिया ने कहा कि ई-कचरे के उचित प्रबंधन, इसके पुनः उपयोग व पुनर्चक्रण (रिसाइकिलिंग) के लिए सामूहिक सहभागिता आज समय की मांग है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य राहुल सक्सेना ने कहा कि ई-कचरे में मौजूद हानिकारक पदार्थ हमारी मिट्टी, जल और वायु को प्रदूषित कर रहे हैं, जिसका सीधा असर जैव विविधता पर पड़ रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विवेकपूर्ण उपयोग करें, पुराने उपकरणों की मरम्मत कराकर उन्हें दोबारा काम में लेने (रीयूज) की आदत डालें और ई-कचरे को केवल अधिकृत संग्रहण केन्द्रों तक ही पहुंचाएं। उन्होंने सभी को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छोटे-छोटे व्यक्तिगत प्रयास बड़े पर्यावरणीय बदलाव का आधार बन सकते हैं।
‘जिला स्तरीय ई-कचरा संग्रहण केंद्र’ स्थापित होना जरूरी
वनस्पति शास्त्र के आचार्य डॉ. दिलीप कुमार राठौड़ ने कहा कि ई-कचरे में सीसा, पारा और कैडमियम जैसी विषैली धातुएं होती हैं। उन्होंने बूंदी जिले में ‘जिला स्तरीय ई-कचरा संग्रहण केंद्र’ स्थापित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. राठौड़ ने आमजन से अपील की कि वे अपने पुराने या खराब मोबाइल फोन व अन्य उपकरणों को घरेलू कबाड़ में बेचने, जलाने या फेंकने के बजाय अधिकृत केन्द्रों पर ही दें। उन्होंने सभी से ‘रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल के सिद्धांत को अपनाने की अपील की। कार्यक्रम प्रभारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ई-कचरे को कम करने को भावी पीढ़ियों के लिए एक अहम कदम बताया। वर्चुअल रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के 40 से अधिक संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. दिलीप कुमार राठौड़ ने किया।
