केन्द्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी से कहा है कि उसे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के परिवार वालों से माफी मांगनी चाहिए। रिजिजू ने इसके लिए 20 साल पहले मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में दिए गए उनके भाषण को शेयर किया है।
एनसीआई@नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ का मु्द्दा क्या उठाया, इससे विपक्षी पार्टियों से लेकर मीडिया तक में जैसे तूफ़ान आ गया। कमाल की बात तो यह है कि एक ओर जहां मोदी ने अपने भाषण में किसी को भी सीधे तौर पर दिमागी नक्सल नहीं कहा, ना ही इसकी कोई श्रेणी बताई थी। मगर बड़े विपक्षी नेताओं में खुद को जैसे ‘दिमागी नक्सल’ उपाधि से नवाजने की होड़ सी लग गई है, हालांकि नक्सल देश विरोध का पर्याय है। वहीं, कुछ आरोप लगाने लगे कि प्रधानमंत्री ने ‘दिमागी नक्सल’ परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन करने वाले विद्यार्थियों को कहा है। कुछ का शगूफा है कि पूरे विपक्ष के लिए इस उपमा का प्रयोग किया गया। जो भी सरकार से सवाल पूछता है, उसके लिए।
इस प्रकार प्रधानमंत्री मोदी के एक बेहद गम्भीर बयान पर विपक्ष की प्रतिक्रिया के कारण बड़ी हास्यास्पद-मनोरंजक स्थिति पैदा हो गई है। इस मामले को बेहद दिलचस्प बनाने में सबसे बड़ी भूमिका कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी चिदम्बरम की रही। उन्होंने पीएम मोदी की टिप्पणी के बाद खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताते हुए इस पर गर्व होने की बात कही। इसे केन्द्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का अपमान बताया।
पूर्व पीएम ने नक्सलवाद को सबसे बड़ी चुनौती कहा था
केन्द्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने ‘दिमागी नक्सल’ पर पी चिदम्बरम के बयान को लेकर कांग्रेस को घेरने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का 20 साल पुराना एक सम्बोधन शेयर किया। इसमें मनमोहन सिंह कह रहे हैं, ‘यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि हमारे देश के सामने नक्सलवाद की समस्या अब तक की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती है।’
‘मनमोहन सिंह के परिवार से माफी मांगे कांग्रेस पार्टी’
मनमोहन सिंह ने यह बयान 13 अप्रेल, 2006 को दिल्ली में नक्सलवाद पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में दिया था। एक्स पर उनका यह भाषण शेयर करते हुए किरेन रिजिजू ने कांग्रेस से कहा है कि वह मनमोहन सिंह के परिजनों से माफी मांगे।कांग्रेस पार्टी को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी के परिवार से माफी मांगनी चाहिए।
पीएम मोदी के मुताबिक कौन हैं दिमागी नक्सल?
इस पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में रिजिजू ने कहा कि देश के पूर्व गृहमंत्री चिदम्बरम का यह बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और नुकसान पहुंचाने वाला है। उन्होंने साफ किया कि पीएम मोदी ने विपक्षी नेताओं को दिमागी नक्सल नहीं कहा है। उन्होंने बताया कि सिर्फ वे दिमागी नक्सल हैं-
• जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारत के संविधान को नहीं मानते।
• जो अलगाववादियों का साथ देते हैं और अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं।
• जो नॉर्थ-ईस्ट को भारत से अलग करने के लिए चिकेन नेक को काटना चाहते हैं।
पीएम मोदी ने ‘दिमागी नक्सली’ शब्द का उपयोग उन लोगों के लिए किया है, जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान का सम्मान नहीं करते। किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी उन विचारधाराओं पर थी, जो देश को नुकसान पहुंचाती हैं।
इसी क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने ‘दिमागी नक्सल’ की परिभाषा में उन लोगों को शामिल किया है, जिन्हें हाफिज में ‘साहब’, याकूब मेनन में ‘ज्यूडिशियल किलिंग’, और ओसामा में ‘जी’ नजर आता है।
यह है मामला
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में ‘दिमागी नक्सल’ (इंटलेक्चुअल नक्सल) का जिक्र किया था। उनका पूरा बयान कुछ इस प्रकार था:-
“हथियारी नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। हिंसा अराजकता के वो रास्ते खोज रहे हैं। इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा। इन दिमागी नक्सलियों को आइसोलेट करना होगा और राष्ट्र को विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।”
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि हमें इस वैचारिक चुनौती को कम नहीं आंकना चाहिए और समाज को इसके प्रति बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। इस बयान को विपक्ष ने जैसे जबरन खुद पर ओढ़ लिया और तीखी प्रतिक्रिया देने लगे।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और अन्य विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया था कि यह सरकार की हताशा का संकेत है और इसका इस्तेमाल असहमति की आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है।
केजरीवाल भी बोल पड़े
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि ‘मैं दिमागी नक्सल हूं, क्योंकि मैं देशभक्त हूं, मुझे इस पर गर्व है।’
अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के हिसाब से दिमागी नक्सली कौन है, जो इस देश में प्रश्न उठाने की हिम्मत करता है। उन्होंने कहा कि जो सड़ी-गली व्यवस्था को बदलना चाहता है, जो अच्छे सरकारी स्कूल चाहता है, जो अच्छे सरकारी अस्पताल चाहता है, जो बिजली चाहता है, पानी चाहता है, सीवर चाहता है, ड्रेनेज चाहता है, अच्छी व्यवस्था चाहता है, भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखता है, वो प्रधानमंत्री के हिसाब से दिमागी नक्सली है।
