एनसीआई@झांसी
वकील साहब मेरे केस की पैरवी कर रहे थे। जिस लड़की के साथ मैंने जीने-मरने की कसमें खाईं थीं, जिससे मैं शादी करने वाला था, उसी से दुष्कर्म के आरोप में मुझे सजा होने वाली थी। वकील ने मुझसे खूब पैसे लिए, लेकिन पैरवी ठीक से नहीं की। इसीलिए मैंने उनकी हत्या कर दी।

झांसी में गुरसराय के पूर्व चेयरमैन और पूर्व एडीजीसी (ADGC) भान प्रकाश सिरवारिया की हत्या करने के आरोपी सचिन ने यह कबूलनामा किया है। उस पर नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का केस चल रहा था। वकील भान प्रकाश झांसी कोर्ट में सचिन की पैरवी कर रहे थे।
इस मामले में 19 सितम्बर को आरोपी को सजा होने वाली थी। इससे नाराज होकर उसने घर में घुसकर उनकी गला घोंटकर हत्या कर दी। 5 अगस्त को उनका शव घर में मिला। पुलिस पहुंची तो घर का दरवाजा अंदर से बंद था।
एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि शुरुआती जांच में सामान्य मौत लग रही थी, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गला घोंटने की बात सामने आई। इसके बाद जांच शुरू की गई। पड़ोसी और जान-पहचान वालों से पूछताछ में पता चला कि सचिन का दो दिन पहले उनसे झगड़ा हुआ था। शुक्रवार को उसे उठाकर पूछताछ की गई तो उसने जुर्म कबूल कर लिया।
यह था पूरा मामला
भान प्रकाश सिरवारिया नवाबाद थाना क्षेत्र के तालपुरा में परिवार के साथ रहते थे। वह 2000 से 2005 तक गुरसराय नगर पंचायत के अध्यक्ष रहे। इसके बाद झांसी में रहकर वकालत करने लगे। कुछ साल पहले ही वह एडीजीसी (अपर जिला शासकीय अधिवक्ता) के पद से रिटायर हुए थे। उनके दो बच्चे हैं। बड़ी बेटी कविता की शादी हो चुकी है, जबकि बेटा मृत्युंजय अलीगढ़ में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा है। उनकी पत्नी सुशीला के दिमाग में ढाई साल पहले ब्लड क्लॉट हुआ था, तब से वह बीमार रहती हैं।

5 अगस्त की सुबह भान प्रकाश रोजाना की तरह मॉर्निंग वॉक से घर लौटे थे। कुछ समय बाद कमरे के अंदर उनकी लाश मिली। हाथ-पैर रस्सी से बंधे हुए थे। दामाद जितेंद्र वर्मा की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया। सूचना पर पुलिस पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बदल गया खेल
7 अगस्त को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई। इसमें पता चला कि भान प्रकाश की गला घोंटकर हत्या की गई है। इसके बाद पुलिस ने वहां रहने वाले किराएदार सहित परिजनों की मोबाइल सीडीआर निकाली। उनसे पूछताछ की, लेकिन सुराग नहीं मिला। इसके बाद मोहल्ले से सुराग जुटाए गए। पता चला कि भान प्रकाश और पड़ोसी सचिन वर्मा का घटना से दो दिन पहले झगड़ा हुआ था। पुलिस सचिन के घर पहुंची, लेकिन वह फरार था। 8 अगस्त को उसे सब्जी मंडी के पास पशु चिकित्सालय के सामने से गिरफ्तार कर लिया गया। सख्ती से पूछताछ में उसने जुर्म कबूल कर लिया। भान प्रकाश सिरवारिया की हत्या के बाद कई वकील भी मौके पर पहुंचे थे। पुलिस ने उनसे भी जानकारी ली थी।
आरोपी ने ऐसे किया कबूलनामा
आरोपी सचिन वर्मा ने बताया- 2021 में मेरा 17 साल की लड़की से अफेयर हो गया था। मैं उससे शादी करना चाहता था, लेकिन उसके घरवाले राजी नहीं थे। इसके बाद मैं उसे भगाकर ले गया। मगर उसकी बहन ने मेरे ऊपर केस दर्ज करा दिया।
पुलिस ने किशोरी को बरामद किया और दुष्कर्म की धारा बढ़ाते हुए मुझे जेल भेज दिया। पड़ोसी होने के नाते मैंने भान प्रकाश से पैरवी कराई। जमानत होने पर मैं जेल से बाहर आ गया। मगर कुछ समय बाद भान प्रकाश ने पैरवी में दिलचस्पी लेनी बंद कर दी। इस वजह से वारंट निकल गए और मुझे दोबारा 3 महीने तक जेल में रहना पड़ा।
फीस की जगह बाइक गिरवी रखी
सचिन ने बताया- भान प्रकाश ब्याज पर पैसा देने का काम करते थे। कुछ पैसे मैंने भी उनसे उधार लिए थे। आजकल उन्होंने अपनी फीस भी बढ़ा दी थी। अब तक मेरे ऊपर उनका 60 हजार रुपए कर्ज हो गया था। इसके बाद भान प्रकाश ने मेरी अपाचे बाइक गिरवी रख ली थी। मगर पिछली तारीख पर कोर्ट गया तो पता चला कि 19 सितम्बर को फैसले की तारीख है, उस दिन केस में मुझे सजा होने वाली है। भान प्रकाश ने मुझसे जमकर फीस ली थी, लेकिन उन्होंने लचर पैरवी की। सजा होने के डर से मेरे अंदर बहुत गुस्सा आ गया।
फिर ऐसे दिया वारदात को अंजाम
मैंने उनकी हत्या का प्लान बनाया। मेरे घर की छत भान प्रकाश की छत से लगी हुई है। 5 अगस्त की सुबह मैं छत से ही भान प्रकाश के घर पहुंचा। घर में उनकी पत्नी के अलावा और कोई नहीं था। किराएदार अपने कमरों में थे।
जब मैं उनके घर पहुंचा तो वह जीने के बगल में काम कर रहे थे। मैंने उनका गला दबाकर हत्या कर दी, फिर छत के रास्ते से ही घर लौट आया। उनके घर का मेन गेट बंद होने से पहले किसी को मुझ पर शक नहीं हुआ।
