अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद डकैत जगन गुर्जर की हत्या का मामला सामने आया है। प्रारम्भिक जांच में टॉवल या गमछे से गला दबाकर हत्या किए जाने की आशंका जताई गई है। पुलिस ने बैरिक में बंद साथी कैदी विष्णु गुर्जर पर हत्या का आरोप लगाया है। पूछताछ में विष्णु ने पुलिस को बताया कि जगन उसे लगातार ताने देता था, इसलिए उसने यह कदम उठाया। वहीं, पुलिस को दोनों के बीच पुरानी रंजिश होने की भी आशंका है।
एनसीआई@अजमेर/धौलपुर
राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर की कासव विला हाई सिक्योरिटी जेल से बहुत बड़ी खबर सामने आई है। इसके अनुसार, जेल में बंद कुख्यात डकैत जगन गुर्जर का शव संदिग्ध अवस्था में मिला है। जेल प्रशासन और सुरक्षा घेरे के बीच हुई इस घटना से पूरे महकमे में हड़कम्प मच गया है।
इस मामले में अब एक बड़ा खुलासा हुआ है। जेल के अंदर ही डकैत जगन गुर्जर की हत्या की गई है। शुरुआती जांच के अनुसार, यह घटना आज सुबह 11 से अपराह्न 3 बजे के बीच हुई है। कैदी जगन गुर्जर की उसी बैरक में बंद आरोपी विष्णु ने कथित तौर पर तौलिए से गला घोंटकर हत्या कर दी। जानकारी के अनुसार, सुबह नाश्ते के दौरान दोनों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद करीब 11 बजे दोनों को एक ही बैरक में बंद कर दिया गया, जहां 18 अन्य कैदी भी मौजूद थे। आरोप है कि उन्हीं कैदियों के सामने विष्णु ने जगन की हत्या कर दी, लेकिन किसी ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की। अपराह्न करीब तीन बजे बैरक खुलने पर जगन का शव मिला। तब जाकर इस घटना का पता चला।
पूछताछ में विष्णु ने पुलिस को बताया कि जगन उसे लगातार ताने देता था, जबकि पुलिस को दोनों के बीच पुरानी रंजिश होने की भी आशंका है। जगन तीन वर्ष से अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था, जबकि विष्णु को तीन महीने पहले ही यहां लाया गया था। इस घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गम्भीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि आतंकियों और अपराधियों के लिए बनी इस जेल में चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे और कड़ी निगरानी के बावजूद हत्या जैसी वारदात हो गई।

हत्या के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कम्प
हाई सिक्योरिटी जेल के अंदर हुई इस हत्या के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कम्प मच गया है। सूचना मिलते ही एसपी सहित पुलिस के आला अधिकारी और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं। फिलहाल एसपी खुद इस बेहद संवेदनशील मामले की जांच कर रहे हैं और आरोपी विष्णु गुर्जर से कड़ी पूछताछ की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस वारदात के बाद एफएसएल (FSL) टीम ने घटनास्थल पर पहुंच साक्ष्य जुटाए। देश की सबसे सुरक्षित जेलों में शुमार अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर इस वारदात ने जेल प्रशासन और उसकी त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था पर गम्भीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानें जगन गुर्जर का इतिहास
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर महल को गुर्जर आरक्षण आंदोलन के समय उड़ाने की धमकी देने वाले पूर्व कुख्यात दस्यु जगन गुर्जर के नाम से ही तीन राज्य थर्राते थे। यह 11 लाख रुपए का इनामी रहा था। जगन गुर्जर का राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा में आतंक था।
इस प्रकार कभी दूसरों को डराने वाला जगन गुर्जर अब खुद डर के साए में अजमेर जेल में था। यह राजस्थान का खूंखार अपराधी रहा था। साल 2022 में बाड़ी विधानसभा क्षेत्र के विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को भी अशोभनीय भाषा बोलकर जान से मारने की धमकी दी थी।
इसके बाद पुलिस के दबाव को देखते हुए जगन गुर्जर ने 7 फरवरी 2022 की देर शाम को करौली पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। जगन के उत्पात को देखकर उसे अजमेर जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। डकैत जगन गुर्जर ने अपनी गैंग के साथ करीब सात साल तक राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में जमकर आतंक मचाया था।
पहली बार वर्ष 2001 में किया था आत्मसमर्पण
हत्या, अपहरण और लूट को लेकर तीनों राज्यों में जगन गुर्जर का खौफ कायम हो गया था। डकैत जगन ने वर्ष 2001 में तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसफ के सामने पहली बार आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद जमानत पर जेल से बाहर आ गया था और दोबारा अपना आतंक फैलाना शुरू कर दिया।
28 मई 2008 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान जगन गुर्जर ने राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के महल को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। इसके बाद उस पर 11 लाख रुपए का इनाम घोषित कर दिया। पुलिस से घबरा कर जगन गुर्जर ने 31 जनवरी 2009 को कैमरी गांव में राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था।
विधायक को दी थी जान से मारने की धमकी
वर्ष 2022 में बाड़ी विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक गिर्राज मलिंगा को धमकी देने के बाद जगन गुर्जर फिर से सुर्खियों में आ गया है और पुलिस ने जगन पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया। पुलिस के दबाव को देखते हुए जगन गुर्जर ने 7 फरवरी 2022 की देर शाम को करौली पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था।
करीब 20 वर्ष से धौलपुर जिले के डांग और चंबल के बीहड़ों में अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे डकैत जगन गुर्जर के खिलाफ 125 संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज थे। जगन गुर्जर राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में भी संगीन वारदातों को अंजाम दे चुका था।
तीन राज्यों की पुलिस हुई फेल
खास बात यह है कि डकैत जगन गुर्जर को कभी 3 प्रदेशों की पुलिस पकड़ नहीं पाई। हर बार उसने खुद ही सरेंडर किया। डकैत जगन ने वर्ष 2001 में तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसेफ के सामने समर्पण किया। उसके बाद 31 जनवरी 2009 को कैमरी गांव के जगन्नाथ मेला में पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के सामने समर्पण किया।
19 अगस्त 2018 को तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के समक्ष समर्पण किया। 28 जून 2019 को धौलपुर एसपी के समक्ष समर्पण किया और 5 सितम्बर 2021 को भी समर्पण किया। इसके बाद 7 फरवरी 2022 को करौली पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।
चम्बल के बीहड़ सदियों से बागी, बजरी, बंदूक और बदमाशों के नाम से कुख्यात रहे हैं। चम्बल के बीहड़ो पर डकैतों के लिए यह भी कहा जाता हैं कि ‘एक मरे दो जावे,जाको वंश डूब ना पावे’ वाली कहावत चरितार्थ होती हैं। सदियों से चम्बल के बीहड़ को डकैतों की शरण स्थली माना जाता रहा है। चम्बल के बीहड़ो में डकैतों की बंदूक कभी भी खामोश नहीं रही।
महिला डकैत पर आया दिल
जिले की एक खूबसूरत महिला भी डकैत जगन की गैंग में शामिल हुई थी। यह महिला थी कौमेश गुर्जर, जो बदले की आग में डकैत बन गई। धौलपुर जिले के नगर गांव के रहने वाले सरपंच छीतरिया गुर्जर के यहां 1986 में कौमेश का जन्म हुआ था। अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए 14 वर्ष की उम्र में ही कोमेश ने बंदूक थाम ली थी।
कोमेश अपने पिता की हत्या का बदला लेना चाहती थी। बदले की आग में कोमेश गुर्जर चम्बल के बीहड़ो में कूद गई। बीहड़ो में कौमेश की मुलाक़ात डकैत जगन गुर्जर से हुई। कौमेश जगन गुर्जर को बचपन से जानती थी, क्योकि जगन कौमेश के घर पर आता-जाता रहता था और कौमेश जगन से प्यार करती थी।
बीहड़ में जाने के बाद खूबसूरत महिला दस्यु सुंदरी बन गई। डकैत जगन ने कोमेश को उसके पिता छीतरिया की हत्या का बदला लेने में मदद की थी और इसके बाद कौमेश ने पलट कर नहीं देखा।
प्रसव पीड़ा में ऊंटों पर भेजा अस्पताल
वर्ष 2000 के आसपास की बात है, जब कौमेश गर्भवती हुई और प्रसव के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ने लगी तो कौमेश को अस्पताल ले जाने की नौबत आ गई। लेकिन डकैत जगन और उसके गिरोह के साथी अपनी जान खतरे में नहीं डाल सकते थे। इसके बाद कौमेश अकेले ही ऊंटों पर जंगलों से निकल कर हिंडौन सिटी पहुंच गई।
कौमेश को रास्ते भर जंगलों में जगन के लोगों और उसके रिश्तेदारों से मदद मिलती रही। कौमेश ने हिंडौन के नर्सिंग होम में पहले बच्चे को जन्म दिया। नर्सिंग होम से कुछ दिन बाद दस्यु सुंदरी कौमेश डकैत जगन और उसके साथियों के सहयोग से ऊंटों पर बैठ बच्चे के साथ दोबारा बीहड़ों में पहुंच गई। साल 2008 में कौमेश बीहड़ो में दोबारा गर्भवती हुई और पुलिस ने गैंग को घेर लिया।
पुलिस की मुठभेड़ में एक गोली कौमेश को लग गई और घायल होने पर कौमेश को पुलिस ने पकड़ लिया। कौमेश के गोली लगने के बाद इलाज के दौरान पेट में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। जेल से छूटने के बाद कौमेश ने एक बेटी को भी जन्म दिया। वर्ष 2014 की बात हैं कि कौमेश पुराने मामलों में डकैत जगन के साथ भरतपुर की जेल में बंद थी। तब कौमेश के छोटे भाई रामू की हत्या कर दी थी।
कौमेश को अपने भाई की हत्या का काफी दुख हुआ। जेल से बाहर आने के बाद कौमेश ने अपने भाई रामू की हत्या का बदला लेने के लिए अपने रिश्तेदार जंडेल गुर्जर के साथ मिलकर 21 अप्रैल 2020 को संजीत कोली की बाड़ी उप खंड के तिलुआ का अड्डा गांव में उसके घर में घुस सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। कौमेश पर दो हत्या सहित डेढ़ दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हुए।
पूर्व दस्यु सुंदरी कौमेश को पुलिस जब जब धौलपुर कोर्ट में पेशी पर लाती थी तो उसे देखने के लिए कोर्ट में लोगो की भीड़ लग जाती थी। कौमेश वर्तमान में अपने बच्चों के साथ गांव में जीवन व्यतीत कर रही है।
जगन की हैं तीन पत्नियां
जगन गुर्जर की 3 पत्नियां हैं। जून 2010 में बेटी की शादी में जेल में बंद डकैत जगन को पुलिस प्रोटेक्शन में गांव लाया गया था। बेटी की शादी में डकैत जगन गुर्जर ने अपराध से दूर रहने की कसम खाई थी। करीब 8 साल जेल में रहने के बाद 6 मार्च 2017 को जगन गुर्जर जेल से बाहर आ गया। साल 2017 विधानसभा चुनाव में धौलपुर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पत्नी ममता को चुनाव में उतारा।
चुनाव में पत्नी हार गई। जगन के उत्पात को देखकर उसे अजमेर जेल शिफ्ट कर दिया गया था। धौलपुर पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कुख्यात दस्यु जगन गुर्जर के खिलाफ वर्ष 1994 में साधारण मारपीट का पहला प्रकरण दर्ज हुआ था, उसके बाद उसके खिलाफ कुल 125 आपराधिक मामले दर्ज हुए। फिलहाल जगन गुर्जर मार्च 2026 में थाना कोतवाली बाड़ी के मारपीट के मामले में जेल गया था।
