एनसीआई@जयपुर
फैमिली कोर्ट ने बीमार पति की देखभाल नहीं करने को क्रूरता मानते हुए उसकी तलाक की अर्जी को मंजूर कर लिया। जयपुर महानगर प्रथम की फैमिली कोर्ट-5 के जज अनीश दाधीच ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी का व्यवहार पति के साथ अमानवीय रहा है।
बिना किसी उचित कारण के पति से झगड़ा करना, उसके माता-पिता, भाई-भाभी के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना, पति पर परिवार से दूर रहने का दबाव डालना और बीमारी में पति की देखभाल नहीं करना मानसिक और शारीरिक क्रूरता है। पत्नी धर्म का पालन नहीं किया। कोर्ट ने कहा- ऐसी परिस्थितियों में दोनों का एक ही छत के नीचे साथ रहकर वैवाहिक जीवन का निर्वहन करना असम्भव है।
मेट्रिमोनियल साइट से हुआ था रिश्ता
मामले से जुड़े वकील दिवेश शर्मा ने बताया-जयपुर के रहने वाले आईटी प्रोफेशनल युवक और असम की रहने वाली आईटी प्रोफेशनल युवती का रिश्ता जीवन साथी डॉट कॉम (मेट्रिमोनियल साइट) से तय हुआ था।
दोनों की शादी पूरे रीति-रिवाज के साथ 24 नवम्बर 2019 को हुई थी। शादी के बाद दोनों दिल्ली में रहने लगे। शुरू में दोनों का वैवाहिक जीवन सही रहा। कुछ महीनों बाद पत्नी का व्यवहार बदल गया। वह बिना किसी कारण के पति से झगड़ा करने लग गई।
पति अपने परिवार से मिलने आना चाहता तो पत्नी आत्महत्या की धमकी देकर उसे रोक देती थी। दीपावली और अन्य पारिवारिक कार्यक्रमों में उसने युवक के माता-पिता और रिश्तेदारों के साथ दुर्व्यवहार किया।
लकवा मारने पर नहीं की थी देखभाल
वकील ने बताया- दोनों नौकरी के सिलसिले में दिल्ली से बैंगलुरु शिफ्ट हो गए। यहां भी पत्नी के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया। 17 जनवरी 2023 को दोनों के बीच झगड़ा हुआ। विवाद इतना बढ़ गया कि पति को तनाव के चलते ब्रेन स्ट्रोक (लकवा) आ गया। इसके चलते 18 जनवरी 2023 से 18 मार्च 2023 तक अस्पताल और रिहेबिलिटेशन सेंटर में रहा। पत्नी देखभाल के लिए बहुत कम अस्पताल आती थी। उसकी पूरी देखभाल उसके माता-पिता और केयरटेकर ने की।
बैंगलुरु में घर पर रहने के दौरान भी पत्नी ने पति के माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर किया। वहीं, पत्नी के भाई ने पति के साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की। उसे घर से निकालने का प्रयास किया।
इसके बाद 8 जुलाई 2023 को युवक के पिता उसे बैंगलुरु से जयपुर ले आए। तभी से वह जयपुर रहकर अपना इलाज करवा रहा है। उसकी नौकरी भी छूट गई है। वह पूरी तरह से माता-पिता पर आश्रित है।
नोटिस के बाद भी कोर्ट नहीं पहुंची पत्नी
पति ने 24 मार्च 2025 को जयपुर की फैमली कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर की। इस पर कोर्ट ने पत्नी को नोटिस भेजा, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर कोर्ट ने पत्नी को ई-मेल के जरिए नोटिस तामील करवाया, लेकिन पत्नी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुई। इसके बाद कोर्ट ने एक पक्षीय कार्रवाई शुरू की।
कोर्ट ने कहा कि शारीरिक और मानसिक क्रूरता साबित करने का भार पति पर था। जो सबूत और तथ्य पति ने पेश किए, उसके खंडन में पत्नी की ओर से न कोई सबूत प्रस्तुत की गए और न ही जिरह की गई। इससे पति के सबूतों पर अविश्वास किया जा सकता हो।
