बिहार के सुपौल जिले में एक ट्रेनिंग स्कूल के प्रभारी प्रिंसिपल पर अपनी साथी महिला टीचर्स की फोटो और वीडियो बनाने का आरोप लगा है। इस घटना से पूरे जिले में हंगामा मच गया है। डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं।
एनसीआई@पटना
बिहार के सुपौल जिले के निर्मली स्थित एएनएम ट्रेनिंग स्कूल के हॉस्टल में उस समय हंगामा मच गया, जब दो महिला टीचर्स ने इंस्टिट्यूट के प्रभारी प्रिंसिपल मौलाना साजिद इकबाल कैफी पर बिना इजाजत उनके वीडियो बनाने और उनकी निजी तस्वीरें मोबाइल फोन में रखने का आरोप लगाया। घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और डीएम सावन कुमार ने तुरंत जांच के आदेश दिए। प्रशासनिक टीम इंस्टिट्यूट पहुंची और हर एंगल से पूरी घटना की जांच शुरू की।
शिकायत करने वाली महिला टीचर्स के मुताबिक, घटना लैब में शुरू हुई। उनका आरोप है कि वे जब लैब में काम कर रहीं थीं, तभी उन्होंने देखा कि प्रभारी प्रिंसिपल बिना उनकी इजाजत के अपने मोबाइल फोन पर उनका वीडियो बना रहे हैं। उन्होंने इस पर एतराज किया और मोबाइल फोन दिखाने को कहा, तो प्रिंसिपल पहले तो हिचकिचाया। जब विवाद बढ़ा, तो दूसरे टीचर्स और अन्य स्टाफ मौके पर इकट्ठा हो गए। दबाव बढ़ने पर प्रिंसिपल के मोबाइल फोन की गैलरी चेक की गई तो इसमे् महिला टीचर्स की करीब 150 फोटो मिलीं, जो अलग-अलग एंगल से ली गईं थीं। इससे मामला और गर्मा गया।
टीचर्स का दावा है कि मोबाइल में मिली फोटो निजी थीं और उनकी जानकारी के बिना ली गईं थीं। लम्बी बहस और दबाव के बाद ये फोटो मोबाइल फोन से डिलीट की गईं। बाद में, प्रिंसिपल ने माना कि फोन में फोटो थीं, लेकिन उन्होंने दावा किया कि उन्हें इंस्टाग्राम से डाउनलोड किया था।
इस घटना पर महिला टीचर्स ने अपनी सुरक्षा को लेकर गम्भीर चिंता जताई है। इनका कहना है कि जब इंस्टीट्यूट में सबसे ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति पर ऐसे आरोप लगते हैं तो वे किससे सुरक्षा की उम्मीद कर सकती हैं? उन्होंने कहा, “गर्ल्स हॉस्टल में न तो बाउंड्री वॉल है, न ही कोई सुरक्षित मेन गेट। कोई परमानेंट वार्डन नहीं है और न ही पर्याप्त सिक्योरिटी गार्ड हैं। पानी और खाने की क्वालिटी को लेकर भी शिकायतें हैं। अब, इस घटना के बाद, हम असुरक्षित महसूस कर रही हैं।”
प्रिंसिपल की सफाई
हंगामे के बाद, आरोपी प्रिंसिपल ने माना कि उसके मोबाइल फोन में फोटो थे, लेकिन उसने कहा कि इन्हें उसने इंस्टाग्राम से डाउनलोड किया था और उसका कोई गलत इरादा नहीं था। हालांकि, टीचर्स का दावा है कि फोटो इंस्टीट्यूट के अंदर चुपके से लिए गए थे।
हॉस्टल के कमरों के इस्तेमाल पर भी सवाल
जांच के दौरान, यह भी पता चला कि प्रिंसिपल हॉस्टल के दो कमरों का इस्तेमाल कर रहा था। टीचर्स के एतराज के बाद, प्रशासनिक टीम की मौजूदगी में कमरे से बेड और दूसरा सामान हटा दिए गए। इसे भी जांच के दायरे में रखा गया है।
फाइनेंशियल गड़बड़ियों के भी आरोप
शिकायत करने वालों ने न सिर्फ पर्सनल तस्वीरों का मुद्दा उठाया, बल्कि एडमिनिस्ट्रेटिव और फाइनेंशियल गड़बड़ियों का भी आरोप लगाया। उनका आरोप है कि लाइब्रेरी और कॉलेज डेवलपमेंट पर खर्च किए गए फंड का सही इस्तेमाल नहीं किया गया। 2021 से अक्टूबर 2025 तक इंस्टीट्यूट में कोई बड़ा डेवलपमेंट का काम नहीं हुआ। इसके अलावा, उन्होंने सरकारी ट्रेनिंग और मीटिंग्स के बारे में समय पर जानकारी न मिलने की भी शिकायत की। टीचर्स का आरोप है कि जब भी ट्रेनिंग का लेटर आता है, प्रिंसिपल चले जाते हैं, जिससे दूसरे टीचर्स को मौका नहीं मिल पाता।
डीएम ने जांच के आदेश दिए
मामले की गम्भीरता को देखते हुए, डीएम सावन कुमार ने जांच के आदेश दिए हैं। एसडीएम, एसडीपीओ, बीडीओ, सीओ और पुलिस फोर्स की एक टीम इंस्टीट्यूट पहुंची। टीम ने टीचर्स के बयान दर्ज किए और मौजूद सबूत इकट्ठा किए। एडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। अगर आरोप सही पाए गए तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
